ताज़ा खबर
 

‘रईस’ ने दंगा पीड़ितों की मदद करके बनाई थी रॉबिनहुड की छवि, पुलिसवालों को ‘गिफ्ट’ देकर कायम किया था साम्राज्य

1986-87 में लतीफ ने अहमदाबाद की पांच नगरपालिका सीटों (दरियापुर, जमालपुर, कालुपुर, राखांड़ और शाहपुर) से चुनाव लड़ा

Author January 24, 2017 8:04 AM
शाहरुख खान की फिल्म रईस को गुजरात के गैंगेस्टर अब्दुल लतीफ के जीवन पर आधारित बताया जा रहा है लेकिन फिल्म निर्माताओं ने इससे इनकार किया है।

बुधवार (25 जनवरी) को रिलीज हो रही शाहरुख खान की फिल्म रईस को गुजरात के शराब माफिया और गैंगेस्टर अब्दुल लतीफ के जीवन पर आधारित बतायी जा रही है। हालांकि खुद खान और फिल्म के निर्देशक राहुल ढोलकिया ने इससे इनकार किया है। फिल्म में शाहरुख ने रईस नामक गुजराती शराब माफिया और गैंगेेस्टर की भूमिका निभायी है। अब्दुल लतीफ और रईस में कितनी समानता है ये तो फिल्म रिलीज होने के बाद पता चलेगा लेकिन अब्दुल लतीफ को अपराध जगत की बुलंदियों पर पहुंचाने में पुलिसवालों और राजनेताओं का बड़ा हाथ रहा है। लतीफ की कहानी सुनकर आपको भी मनुव्वर राणा को शेर याद आ जाएगा कि “किसी भी शहर के क़ातिल बुरे नहीं होते। दुलार करके हुकूमत बिगाड़ देती है।”

अक्टूबर 1951 में जन्मे अब्दुल लतीफ ने शुरुआत गुजरात के अहमदाबाद में एक जुए और शराब के ठेके पर 30 रुपये महीने की नौकरी से की थी। गुजरात में शराबबंदी लागू थी इसलिए इसकी तस्करी का धंधा राज्य में पैसा कमाने की मशीन बना हुआ था। लतीफ को जल्द ही अहसास हो गया कि इस धंधे में बड़ा मुनाफा है। लतीफ के साथी रहे महबूब सीनियर अब रियल एस्टेट का कारोबार करते हैं। महबूब ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “नौकरी के साथ-साथ देसी शराब की थैलियां बेचने से शुरू करके वो अंग्रेजी शराब की बोतलें बेचने लगा।” धीरे-धीरे गुजरात में अवैध शराब के लगभग पूरे कारोबार पर लतीफ का कब्जा हो गया।

लतीफ का कारोबार बढ़ने में सबस अहम भूमिका उसकी पुलिसवालों से “साझीदारी” थी। नाम देने की शर्त पर उस समय लतीफ के इलाके में तैनात एक पुलिस अफसर ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “उन दिनों लतीफ पागलों की तरह पैसे छाप रहा था। वो स्थानीय पुलिसवालों को हफ्ता और महंगे गिफ्ट देता था। कांस्टेबल से इंस्पेक्टर तक उससे गिफ्ट लेने वालों में थे। उसने बजाज स्कूटर और बुलेट मोटरसाइकिल तक पुलिसवालों को गिफ्ट में दी थी। उसकी वजह से कालूपूर थाना पुलिसवालों के लिए आकर्षक पोस्टिंग बन गई थी।”

Abdul Latif 1995 में अब्दुल लतीफ को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया और उसे गुजरात लाया गया। (फाइल फोटो)

रिटायर्ड असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर आईसी राज ने 1995 में लतीफ की गिरफ्तारी में अहम भूमिका निभायी थी। राज जब गुजरात एंटी-टेररिज्म स्क्वायड में तैनात थे उन्होंने महीने तक लतीफ से पूछताछ की थी।  इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में राज ने माना कि लतीफ को शुरू में स्थानीय पुलिस का संरक्षण प्राप्त था जो उसके खिलाफ होने वाली कार्रवाइयों की खबर दे देते थे। राज कहते हैं, “ये दुखद है लेकिन सच है।”

पुलिसवालों को साधने के बाद लतीफ ने नेताओं से संपर्क बढ़ाना शुरू कर दिया। उसने राजनीतिक दलों को चंदा देने से शुरू कर दिया। 1980 के दशक में ही उसे असमाजिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। लतीफ जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट तक गया। उसने जमानत के लिए मशहूर वकील राम जेठमलानी की भी सेवाएं ली थीं।

abdul latif encounter house इसी मकान में हुई मुठभेड़ में अब्दुल लतीफ 1997 में मारा गया।

शराब माफिया और गैंगेस्टर लतीफ जिससे आम लोग डरते थे वो गरीबों की चहेता कैसे बन गया? लतीफ के एक पड़ोसी बताते हैं कि 1980 के दशक में अहमदाबाद में कई बार दंगे हुए। उम्र की छह दशक पूरे कर चुके स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता अजीज गांधी कहते हैं, “पहले से ही गरीब और वंचित मुसलमान दंगों में ज्यादा पीड़ित होते थे। उनका काम धंधा कर्फ्यू के दौरान बंद हो जाता था। इसमें कोई शक नहीं कि लतीफ ने दंगापीड़ितों की बड़ी मदद की।” गरीबों और पीड़ितों की मदद करके लतीफ ने अहमदाबाद में “रॉबिनहुड” जैसी छवि बना ली।

Abdul Latif, gangester शराब माफिया और गैंगेस्टर अब्दुल लतीफ ने 1986-87 में अहमदाबाद नगपालिका चुनाव में पांच सीटों पर एक साथ जीत हासिल की थी। (फाइल फोटो)

वो आम लोगों में उसकी लोकप्रियता कितनी थी ये इस बात से पता चलता है कि जब 1986-87 में लतीफ ने अहमदाबाद की पांच नगरपालिका सीटों (दरियापुर, जमालपुर, कालुपुर, राखांड़ और शाहपुर) से चुनाव लड़ा तो उसे सभी पर जीत मिली। हैरानी की बात ये है कि जब लतीफ ने चुनाव लड़ा और जीता तो असामाजिक गतिविधियों के आरोप में जेल में बंद था।

गुजरात में हुई कई हत्याओं में वांछित और मुंबई बम धमाकों में अभियुक्त लतीफ 1992 में दुबई के रास्ते पाकिस्तान भाग गया था। 1995 में जब वो भारत वापस आ गया। नवंबर 1995 में गुजरात एंटी-टेररिज्म स्क्वायड ने लतीफ को पुरानी दिल्ली के एक पीसीओ बूथ से गिरफ्तार किया। लतीफ करीब दो साल तक साबरमती जेल में रहा। पुलिस के अनुसार नवंबर 1997 में लतीफ ने भागने की कोशिश की और पुलिस मुठभेड़ में मारा गया।

वीडियो: देखिए शाहरुख खान की ‘रईस’ का ट्रेलर; दमदार डायलॉग और एक्शन से भरपूर

 

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App