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लड़ते रहिये मुकदमा, सरकार नहीं दे रही जवाब- पेगासस जासूसी का जिक्र कर बोले रवीश कुमार, सोशल मीडिया पर उबाल

अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट में रवीश ने लिखा, फ़ोन की जासूसी हाल तक हुई है और अंदाज़ा नहीं कि कितने नागरिकों के फ़ोन से सारा डेटा उड़ा लिया गया है। जो लोग निजता का मतलब नहीं समझते हैं उन्हें समझना चाहिए।

पेगासस के जरिये कथित जासूसी पर सियासी घमासान मच गया है। (Photo- Indian Express)

पेगासस स्पाइवेयर के जरिये कथित जासूसी का मामला गरमा गया है। संसद से सोशल मीडिया तक इस मामले पर उबाल देखने को मिल रहा है। विपक्षी दलों ने इस मसले पर मोदी सरकार को घेरा है। संसद में भी मामले को उठाया। इसी बीच वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने भी पेगासस मामले का जिक्र करते हुए सरकार पर निशाना साधा है।

अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट में रवीश ने लिखा, ‘फ़ोन की जासूसी हाल तक हुई है और अंदाज़ा नहीं कि कितने नागरिकों के फ़ोन से सारा डेटा उड़ा लिया गया है। जो लोग निजता का मतलब नहीं समझते हैं उन्हें समझना चाहिए और जो समझते हैं उन्हें जानना चाहिए कि इसका मतलब केवल निजी ज़िंदगी में ताकझांक नहीं है।’

एनडीटीवी से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने आगे लिखा, ‘आपका डेटा उड़ेगा तो उसके साथ बैंक के खाते की जानकारियां भी उड़ेंगी और एक दिन अज्ञात एजेंसी आपके खाते से पूंजी निकाल कर कंगाल बना देगी। आप लड़ते रहिएगा केस-मुक़दमा। सरकार जवाब नहीं दे रही है। उसके अपने मंत्री और उनसे जुड़े लोगों के फ़ोन नंबर निशाने पर थे तब भी जांच नहीं कर रही है। उसे लगता है कि कुतर्कों का जाल बिछा देने से जनता उलझ जाएगी। ऐसा सोचना ग़लत भी नहीं है लेकिन इसके बाद भी पर्दे के पीछे से हो रहे इस खेल से नुक़सान उसी जनता का ही होता रहेगा जो कुतर्कों पर यक़ीन करेगी।’

उन्होंने आगे लिखा, ‘इस सॉफ़्टवेयर के इस्तेमाल से पत्रकारों की हत्या हुई और उन्हें झूठे मुक़दमों में फंसा कर जेल में बंद किया गया है। कर्नाटक में विधायकों को तोड़ने के खेल में फ़ोन की टैपिंग का इस्तेमाल न हुआ होगा इसमें किसी को संदेह है तो फिर वह महान है।’

वहीं, वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम ने लिखा, ‘सीधा सवाल का सीधा जवाब ही तो नहीं दे रही है सरकार….एक लाइन में बोलो तो पेगासस खरीदा है या नहीं ? जलेबी की तरह घुमाकर जवाब देने की बजाय इतना ही बता दीजिए ‘सरकार ‘ मान लेंगे आपकी बात…।’

पत्रकार आशुतोष ने लिखा, ‘पेगासस : 50 फ़ोन की गुप्तचरी के लिये क़रीब 60 करोड़ रूपये। कौन इतने पैसे खर्च कर पत्रकारों की गुप्तचरी करवायेगा?’ उन्होंने सवाल किया, ‘पेगासस की जांच से क्यों भाग रही है सरकार?

क्या है पूरा मामला? आपको बता दें, वॉशिंगटन पोस्ट, ले मोंडे, गार्जियन समेत कई मीडिया संगठनों ने मिलकर फोन नंबरों की एक लिस्ट जारी की थी और कहा था कि इजरायल के एनएसओ ग्रुप द्वारा तैयार किये पेगासस मॉलवेयर के जरिए दुनिया के 45 देशों में जासूसी की गई। इन मीडिया संसस्थानों में भारत की द वायर वेबसाइट भी शामिल है।

भारत में करीब 40 पत्रकारों, सरकार के मंत्रियों, विपक्षी नेताओं आदि की कथित जासूसी का दावा किय़ा जा रहा है। पत्रकारों में सिद्धार्थ वरदराजन, एमके वेणु, रोहिणी सिंह का नाम सामने आया है। तो वहीं, राहुल गांधी, प्रशांत किशोर जैसे लोगों के फोन की जासूसी का दावा भी किया जा रहा है। हालांकि भारत सरकार ने इस मामले में कहा है कि इस कथित जासूसी में उसकी कोई भूमिका नहीं है। देश को बदनाम करने के लिए ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि विपक्ष लगातार सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा है।

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