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आजादी कैसे मिली, इससे बेहतर गुलाम क्यों हुए थे पढ़ाना जरूरी- बोले परेश रावल, लोग करने लगे ऐसे कमेंट्स

अभिनेता परेश रावल ने हाल ही में एक ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने देश के गुलाम होने की कहानी पढ़ाने की बात कही है। इस ट्वीट से वो सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में बने हुए हैं।

Paresh Rawal, Bollywood Actor
अभिनेता परेश रावल (फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस)

बॉलीवुड अभिनेता परेश रावल को सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव देखा जाता है। आए दिन वो सोशल मीडिया पर कोई न कोई पोस्ट करते नजर आते हैं। परेश रावल अभिनेता होने के साथ-साथ बीजेपी सांसद भी रह चुके हैं। वहीं अब उन्होंने एक और ट्वीट किया है, जिसमें वो देश के गुलाम होने की कहानी बच्चों को पढ़ाने की बात कहते नजर आ रहे हैं।

परेश रावल ने हाल ही में अपने ट्विटर हैंडल पर एक ट्वीट किया है, जिसकी वजह से सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में बने हुए हैं। वो अपने इस ट्वीट में कहते हैं कि देश गुलाम क्यों हुआ ये बताना ज्यादा जरुरी है। परेश रावल ने ट्वीट में लिखा है ‘आजादी कैसे मीली पढ़ाने से बेहतर, गुलाम क्यों हुए थे पढ़ाना ज्यादा जरुरी’। उनके इस ट्वीट के बाद यूजर जमकर कमेंट कर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। परेश का ये ट्वीट सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।

उनके इस ट्वीट पर कोई उनकी आलोचना कर रहा है तो कोई उनकी बात पर सहमति देते हुए कारण बता रहा है। इसी बीच एक यूजर ने एक न्यूज का फोटो शेयर करते हुए लिखा है ‘ऐसे नेताओ की वजह से’, तो दूसरे ने लिखा है ‘बिल्कुल कभी किसी का इस तारफ ज्यादा ध्यान नहीं गया’।

वहीं उनकी आलोचना करते हुए एक यूजर ने लिखा है ‘बाबू भैय्या गुलाम क्यों हुए ये आप अपने आपसे पूछो जो पार्टी में न होते हुए भी आज भी एक पार्टी की गुलामी कर रहे हो उस दौर में भी इस तरह के लोग थे जो आजादी आंदोलन को छोड़ कर हिंदू राष्ट्र के सपने देख रहे थे जिस तरह आप रोज छात्रों पर बरस रही लाठियों को नजरंदाज कर रहे हैं’।

उधर किसी ने लिखा है ‘सुबह-सुबह फॉरवर्ड मेसेज चिपकने से बेहतर है कुछ न लिखे’। दूसरी तरफ एक यूजर ने मजाकिया अंदाज में कहा ‘हेरा फेरी 3 कब रिलीज हो रही है’।

बता दें, इसके पहले भी परेश रावल ने कोरोना नियमों को लेकर भी एक ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने लिखा था ‘ट्रेनों, थिएटरों और बार और रेस्तरां आदि को 50% क्षमता के साथ खुले रहने की अनुमति है, लेकिन जिम को नहीं !!! इसके पीछे क्या लॉजिक है? क्या अपने स्वास्थ्य की देखभाल करना अपराध है? क्या यह एक आवश्यक सेवा नहीं है?’।

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