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‘कालीन भैया’ को ऐसे हुआ था पहला प्यार, शादी के खिलाफ थीं लड़की की मां; पंकज त्रिपाठी को देख सिकोड़ती थीं नाक

पंकज त्रिपाठी ने अपनी प्रेम कहानी का ज़िक्र करते हुए बताया कि उन्हें मृदुला के बारे में सुनकर ही प्यार हो गया था। पहली बार जब उन्होंने अपनी बहन की तिलक में मृदुला को देखा तो...

pankaj tripathi, mridula tripathi, mirzapur 2पंकज त्रिपाठी की सास नहीं चाहतीं थीं कि शादी हो

मिर्ज़ापुर 2 आज अमेज़ॉन प्राइम पर रिलीज़ हो चुकी है जिसे दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। इस वेब सीरीज में पंकज त्रिपाठी ने अपने किरदार ‘कालीन भैया’ से अभिनय की एक गहरी छाप छोड़ी है। वो आज बॉलीवुड और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के सर्वश्रेष्ठ अभिनेताओं में से एक हैं। बिहार के गोपालगंज में एक छोटे से गांव में जन्में पंकज त्रिपाठी ने अपनी ज़िन्दगी में कई उतार – चढ़ाव देखें तब जाकर आज वो एक स्थापित कलाकार बने हैं। पंकज त्रिपाठी की प्रेम कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। कुछ दिनों पहले उन्होने लल्लनटॉप से बातचीत में अपनी प्रेम कहानी और शादी का ज़िक्र किया था।

उन्होंने बताया कि उन्हें मृदुला से बिना देखे ही प्यार हो गया था और वो उनकी याद में गाने सुनकर रोया करते थे। उन्होंने अपनी पूरी प्रेम कहानी बताई, ‘1992 में सुलभ शौचालय बनाना था। मेरे गांव से उनके गांव एक राजमिस्त्री गया था सुलभ शौचालय का एस्टीमेट देने कि कितना सीमेंट लगेगा, कितना छड़ लगेगा। मेरे भाई सुलभ शौचालय के एक्सपर्ट हैं गांव में तो उन्होंने ही मिस्त्री को भेजा था। मुख्तार नाम के उस मिस्त्री ने उनके घर पर जाकर शौचालय का एस्टीमेट लिया और उन्हें देखा। आकर उसने मुझे बताया कि उधर एक लड़की है एकदम हिरण की माफिक। उधर उसने शौचालय का एस्टीमेट दिया, इधर मुझे ज़िन्दगी का एस्टीमेट दिया।’

पंकज त्रिपाठी ने बताया कि उन्हें राजमिस्त्री से सुनकर ही प्यार हो गया था और वो मृदुला की याद में गाने गाकर रोया करते थे। उन्होंने बताया, ‘होता है न सुनकर प्यार हो जाना। खबर सुनी थी और मुख्तार के नज़रों से ही मैंने अपनी कल्पना कर ली। बस ‘तुम दिल की धड़कन में रहती हो’, ‘बहुत प्यार करते हैं तुमको सनम’ जिन गानों पर हम 90s के दौर में रोते थे, उन गानों पर अब बात करके हंसते हैं। प्यार में होने का मतलब होता है अच्छा आदमी बनना।’

पंकज त्रिपाठी ने अपनी पहली मुलाक़ात के बारे में बताया, ‘मेरी बहन का तिलक था, हम तिलक पर बैठे थे और उसी घर में शादी हो रही थी। मेरे हाथ में नारियल, पान का पत्ता और हाथ में रुमाल था। आंगन में करीब 200 – 250 लोग थे। पंडित जी मंत्र पढ़ रहे थे और मैं इधर – उधर देख रहा था कि वो हिरन दिख नहीं रही जिसका ज़िक्र हुआ था। अचानक ऐसा लगा कि भीड़ ख़त्म, मैं अकेला नारियल लिए बैठा हूं और वो खाली आंगन में अकेले चलते हुए आईं और कुलाचे भरते हुए चली गईं। तिलक के दूसरे दिन बस हाय हैलो वाली बात हुई। उसके बाद हमें करीब 10- 12 साल लग गए।’

पंकज त्रिपाठी ने बताया कि उनकी शादी में भी बड़ी मुश्किलें आई क्योंकि मृदुला की मां नहीं चाहती थीं कि शादी हो। उन्होने बताया, ‘लड़की के मां शादी के ख़िलाफ़ थीं। उनकी लगता था कि ये नाटक – नौटंकी करता है, कभी होटल में काम करता है, कभी जूते बेचता है। मां खिलाफ थी क्योंकि उन्हें लगता था कि लड़का करता क्या है।’ पंकज त्रिपाठी ने बताया कि दोनों में जमीन आसमान का अंतर था फिर भी एक चीज सामान्य थी कि दोनों को साहित्य का बहुत शौक था और उन्होंने कहानियों से ही मृदुला को इंप्रेस किया था।

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