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“लिपस्टिक अंडर माय बुर्का” पर पहलाज निहलानी बोले- हिंदुस्तान की परंपरा को आगे रख कर फिल्म बनाएं

पहलाज ने फिल्म मेकर्स को सलाह देते हुए कहा- हिंदुस्तान की परंपरा को आगे रख कर फिल्म बनाएं। फेस्टिवल में फिल्म दिखाओ ताली बजती है पर थिएटर में पब्लिक नहीं आती।

Author नई दिल्ली | February 25, 2017 2:41 PM
सेंसर बोर्ड के पूर्व प्रमुख पहलाज निहलानी।

सेंसर बोर्ड को 24 फरवरी को अवॉर्ड विनिंग फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माय बुरका’ को सर्टिफिकेट देने से इनकार करने के चलते लोगों के रोष झेलना पड़ा। ऑडियो पोर्नोग्राफी, सेक्सुअल सीन्स और अभद्र शब्दों के लिए आरोप झेल रही फिल्म का सेंसर बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन ने विरोध किया था। मालूम हो कि अलंकृता श्रीवास्तव की नारीवादी फिल्म लिपस्टिक अंडर माई बुर्का जोकि छोटे शहर की चार महिलाओं की यौन इच्छाओं के बारे में है। सीबीएफसी के चेयरमैन पहलाज निहलानी ने इस मामले पर पहले जहां खुलकर बात करने से मना कर दिया था, वहीं 25 फरवरी को उन्होंने कहा- लोगों और मीडिया को सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया नहीं मालूम है। उन्होंने कहा कि सीबीएफसी उनके मुताबिक काम नहीं करेगा।

पहलाज ने कहा कि टीवी चैनल्स पर डिबेट चल रही हैं लेकिन उन्होंने सीबीएफसी की गाइडलाइन्स पर होमवर्क नहीं किया है। टाइटल के शब्द बुरखा पर नहीं बल्कि ऑब्जेक्शन कंटेंट पर है। यह महिला शशक्तिकरण के पक्ष में है लेकिन इसका प्रोजेक्शन सही नहीं है। पहलाज ने फिल्म मेकर्स को सलाह देते हुए कहा- हिंदुस्तान की परंपरा को आगे रख कर फिल्म बनाएं। फेस्टिवल में फिल्म दिखाओ ताली बजती है पर थिएटर में पब्लिक नहीं आती। फिल्म को सर्टिफिकेट नहीं दिए जाने की बात पर पहले पहलाज ने कहा था कि फिल्म को सर्टिफिकेट ना देने का निर्णय सर्वसम्मत से लिया गया है। वहीं फिल्म के प्रोड्यूसर प्रकाश झा ने मुंबई मिरर से कहा- हमारे देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है लेकिन सीबीएफसी के फिल्म को सर्टिफिकेट ना देने की वजह से अरामदायक कहानी ना दिखाने वाले फिल्मकार हतोत्साहित होते हैं।

सीबीएफसी ने कहा है कि वो फिल्म को सर्टिफिकेट नहीं दे सकते क्योंकि इसकी कहानी नारीवादी, जिंदगी से बढ़कर उनकी फैंटेसी के बारे में है। इसमें लगातार सेक्सुअल सीन, गाली-गलौज वाले शब्द, ऑडियो पोर्नोग्राफी और समाज के एक वर्ग से जुड़े कुछ संवेदनशील स्पर्श शामिल हैं। इसलिए फिल्म को 1(a), 2(vii), 2(ix), 2(x), 2(xi), 2(xii) and 3(i) गाइडलाइन के तहत नकारा जाता है। वहीं श्रीवास्तव ने कहा कि बोर्ड उनकी फिल्म को सर्टिफिकेट इसलिए नहीं देना चाहती क्योंकि यह एक नारीवादी फिल्म है जिसमें महिला की आवाज को मजबूती के साथ पेश किया गया है। यह पितृसत्तात्मक समाज को चुनौती देती है। अब निर्माता रिवाइजिंग कमिटी के आधिकारिक पत्र का इंतजार कर रही है। जिसके बाद वो फिल्म सर्टिफिकेशन एपीलेट ट्रिब्यूनल को अप्रोच करेंगे जिससे कि सर्टिफिकेट मिल सके और फिल्म की रिलीज संभव हो पाए।

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