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पद्मावती विवाद: ‘आपत्तिजनक दृश्य’ हटाने की याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

इस फिल्म के निर्माता वायकाम 18 ने पहले कहा था कि एक दिसंबर को फिल्म के प्रदर्शन का प्रस्तावित कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है।
Author November 21, 2017 08:34 am
बिहार में बैन हुई दीपिका पादुकोण की फिल्म पद्मावती।

सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म पद्मावती के कथित आपत्तिजनक दृश्यों को हटाने के लिए दायर याचिका को सोमवार (20 नवंबर) को खारिज करते हुए कहा कि यह समय पूर्व है। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने कहा कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने अभी तक फिल्म को प्रमाण पत्र नहीं दिया है और शीर्ष अदालत इस विधायी संस्था को अपना काम करने से नहीं रोक सकती। पीठ ने कहा, हमें सूचित किया गया है कि फिल्म को अभी तक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से प्रमाण पत्र नहीं मिला है। इस तथ्य के मद्देनजर इस याचिका में हमारा दखल समय से पहले ही राय बनाना होगा जो हम नहीं करना चाहते।

पीठ ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा की याचिका के कुछ अंश हटाते हुए कहा कि अदालती दस्तावेज का मकसद समाज में किसी प्रकार की कटुता पैदा करना नहीं हो सकता। सुनवाई के दौरान शर्मा ने सेन्सर बोर्ड से प्रमाण पत्र मिले बगैर ही इसके गानों को प्रसारित करने का मुद्दा भी उठाया और आरोप लगाया कि दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह और शाहिद कपूर अभिनीत यह फिम प्रमाणन बोर्ड द्वारा आवेदन लौटा देने के बावजूद प्रदर्शित की गई है। प्रतिवादियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने इन दलीलों का प्रतिवाद करते हुए कहा कि फिल्म के प्रोमो जारी किए गए हैं और इसके लिए प्रमाणन बोर्ड से मंजूरी मिली हुई है।

याचिकाकर्ता ने बार बार यह आरोप लगाया कि फिल्म के कुछ अंश रिलीज कर दिए गए हैं तो पीठ ने टिप्पणी की, सेन्सर बोर्ड की इसमें निश्चित ही भूमिका है। वे दिशा निर्देश देंगे जो कानून में ही शामिल हैं। यह उनकी ड्यूटी है। हम दूसरे मुद्दों पर हैं। क्या शीर्ष अदालत को एक फिल्म रोकने के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए? याचिका में आरोप लगाया गया है कि फिल्म में रानी पद्मावती के चरित्र का हनन किया गया है और प्रमाणन बोर्ड इन पहलुओं पर गौर नहीं करेगा। पीठ ने इस पर फिल्म के प्रमाणन के लिए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के कामकाज का विस्तार से जिक्र करते कहा कि हम इसके काम में कैसे हस्तक्षेप कर सकते हैं।

न्यायालय बोर्ड से यह नहीं कह सकता कि किसी मामले पर एक विशेष तरीके से फैसला लिया जाए क्योंकि यह काम बोर्ड का ही है। इस फिल्म के निर्माता वायकाम 18 ने पहले कहा था कि एक दिसंबर को फिल्म के प्रदर्शन का प्रस्तावित कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है।

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  1. B
    Bharat
    Nov 20, 2017 at 9:27 pm
    Hand over this country again to those Rajput old kings who worked as an agent during the British rule, if a Democratic Govt can't allow a simple movie to play and see its citizen. If a film could be made on Gandhi then why not to anybody else, who is bigger than Gandhi here? I like to request Madhu Bhandarke who made film on 'Sanjay Gandhi ' should make another movie on Rajput Kings who worked as an agent of British Rule and how they supported British ruler to suppress 1857 movement and killed 1857 freedom fighters! These all 'Tamasa' to divert our attention from main issue like un-employment and price rise.
    (0)(0)
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