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सेंसर बिना बैन हुई पहली फिल्म है पद्मावती

‘पद्मावती’ संभवत: पहली ऐसी फिल्म है जो अभी तक सेंसर की नजरों से गुजरी भी नहीं है और रिलीज होने से पहले बैन तक हो गई।
Author नई दिल्ली | December 4, 2017 02:18 am
फिल्म पद्मावत का एक दृश्य।

अपने देश में राजनीतिक कारणों या इतिहास में छेड़छाड़ के नाम पर फिल्मों के विरोध का लंबा इतिहास रहा है। ब्रिटिश हुकूमत के वक्त से इसके उदाहरण मिलते हैं लेकिन जानकारों के मुताबिक इस कड़ी में ‘पद्मावती’ संभवत: पहली ऐसी फिल्म है जो अभी तक सेंसर की नजरों से गुजरी भी नहीं है और रिलीज होने से पहले बैन तक हो गई। संजय लीला भंसाली की इतिहास के कथानक पर आधारित ‘पद्मावती’ को लेकर विवाद शूटिंग के समय से ही शुरू हो गया था जो आज तक थम नहीं पाया है। रानी पद्मावती और अलाउददीन खिलजी के बीच प्रेम के स्वप्नदृश्य के कयासों और इतिहास को गलत तरह से दिखाने के आरोपों के चलते फिल्म को इतना विरोध झेलना पड़ा है कि अभी स्पष्ट नहीं है कि यह पर्दे पर कब उतर पाएगी।

फिल्म मामलों के जानकार व इंदौर के वरिष्ठ पत्रकार हेमंत पाल बताते हैं कि ‘पद्मावती’ से पहले भी ऐसी कई फिल्में बनी हैं, जिनके परदे पर नहीं उतर पाने के पीछे राजनीतिक कारण रहे हैं। कुछ फिल्में तो काटछांट के बाद रिलीज हो गर्इं, लेकिन कुछ ने अभी तक सिनेमाघर नहीं देखा। वह दावा करते हैं कि इन फिल्मों को लेकर जो भी आपत्तियां उठीं, उन सभी में सेंसर बोर्ड की भूमिका रही। यदि उन फिल्मों को बैन भी किया गया तो केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने ही किया। सेंसर के प्रमाणपत्र के बाद भले ही अलग-अलग राज्यों में उन पर पाबंदी लग गई हो।

‘पद्मावती’ संभवत: पहली फिल्म है, जिसे शूटिंग के वक्त से ही विरोध का सामना करना पड़ रहा है और सेंसर में जाने से पहले ही सिर्फ अनुमान और कयास के आधार पर हो रहे विरोध को देखते हुए फिल्म पर प्रतिबंध का एलान कुछ राज्य कर चुके हैं। सीबीएफसी के चेयरमैन प्रसून जोशी ने पिछले दिनों संसद की दो समितियों को बताया कि फिल्म को अभी तक सेंसर बोर्ड की मंजूरी नहीं मिली है और विशेषज्ञों को दिखाने के बाद ही इसके प्रदर्शन पर फैसला किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार समझा जाता है कि समिति के एक सदस्य के सवाल पर जोशी ने कहा कि उन्होंने अभी तक फिल्म नहीं देखी है। साफ है कि फिल्म की रिलीज के लिए अभी और इंतजार करना पडेगा। वैसे भी सीबीएफसी में प्रमाणपत्र के लिए फिल्म निर्माताओं की ओर से 11 नवंबर को ही आवेदन किया गया है और सिनेमेटोग्राफी कानून के तहत फिल्म को प्रमाणपत्र देने में बोर्ड 68 दिन तक का समय ले सकता है।

 

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