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नए विषयों-कथानकों के साथ दो बरस में सबसे ऊपर रहीं ओटीटी की शृंखलाएं

दो वर्ष पूर्व की कई वेब शृंखलाएं विभिन्न ओटीटी मंचों पर देखने को मिलीं।

नए विषयों-कथानकों के साथ दो बरस में सबसे ऊपर रहीं ओटीटी की शृंखलाएं

राजीव सक्सेना

ओटीटी ने विगत दो वर्ष में अपने नाम ‘ओवर द टाप’ यानी सबसे ऊपर को साबित करने की सफल कोशिश की है। साल की शुरुआत से ही 12 नई वेब शृंखलाओं ने दर्शकों के उस वर्ग को भी जोड़ा, जो संवादों और दृश्यों में अनर्गल के विरुद्ध हैं। साफ-सुथरे कथानक वाली कई शृंखलाओं में युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक की पसंद के विविध रोचक और रोमांचक मनोरंजन ओटीटी पर प्रस्तुत किए गए।

जेएल 50 : रोमांच से भरपूर

दो वर्ष पूर्व की कई वेब शृंखलाएं विभिन्न ओटीटी मंचों पर देखने को मिलीं। इनमें सोनी लिव पर ‘जेएल 50’ ने एक अलग तरह के रोमांच से सराबोर कर दिया। हिंदी फिल्मों के उम्दा कलाकारों के साथ बनाई गई इस सीरीज में कोलकाता से किसी खास जगह के लिए उड़ान भरने वाले विमान के रहस्यपूर्ण तरीके से गायब होने की कहानी को बेहद दिलचस्प कथानक में खूबसूरती से पिरोया गया है।

सीबीआइ अधिकारी शांतनु को एक ऐसे विमान की दुर्घटना से जुड़ी जांच के लिए नियुक्त किया जाता है, जो 35 बरस पहले पूर्वोत्तर राज्य के किसी अंचल में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। उस वक्त बहुत खोजने पर भी उसका मलबा नहीं मिला। इस छानबीन के दौरान एक अन्य विमान का अपहरण हो जाता है और अपहरणकर्ता अपने नेता की रिहाई की मांग करते हैं। जेएल 50, वेब शृंखला विभिन्न कालखंडों का सफर कराते हुए कितने ही दिलचस्प मोड़ से दर्शकों का सामना कराती है।

नायक शांतनु, अपने सहयोगियों के साथ 35 साल पहले के कालखंड में पहुंचता है। कुछ अजीब और असंभव लगने वाली इस प्रक्रिया के जरिए विमान दुर्घटना के कारणों का पता चलता है। कथ्य रोचक है, लेकिन दर्शक सोचता रह जाता है कि काश ऐसी कोई टाइम मशीन होती कि हम अपने भूतकाल में जा सकते और कई सारी गलतियों का खुलासा ही नहीं होता, बल्कि उन्हें सुधारने का भी प्रयत्न कर पाते। हालीवुड में इस तरह के साइंस फिक्शन पर कितनी ही सफल फिल्में और टीवी सीरीज बनाई जा चुकी हैं।

सोनी लिव पर प्रसारित जेएल 50, शैलेंद्र व्यास के निर्देशन में एक पूरी फिल्म को तोड़कर बनाई गई शृंखला है, जिसमें पंकज कपूर, अभय देओल, पीयूष मिश्रा, रितिका आनंद और राजेश शर्मा ने अपने-अपने किरदारों के साथ पूरा इंसाफ किया है।

राष्ट्रकवच ओम : एक उलझी हुई फ़िल्म

कहानियों में कुछ नया लाने की होड़ का नतीजा कभी-कभी दर्शकों के दिमाग को चकरघिन्नी की तरह घुमाने में कसर नहीं छोड़ता। विगत सप्ताह जी फाइव पर प्रदर्शित ओटीटी फिल्म ‘राष्ट्रकवच ओम’ ताजा उदाहरण है। रा एजंट ओम को सरकार एक खास मिशन के तहत एक युद्धपोत पर घुसपैठ कर रक्षा मंत्रालय की एक खास संपत्ति को खोजने के लिए भेजती है, जहां गोली लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो जाता है। एक अन्य अधिकारी डाक्टर काव्या को ओम की देखभाल करते हुए मालूम होता है कि उसकी याददाश्त कमजोर हो गई है। उसे लगता है उसका नाम ऋषि है।

भ्रमित करने वाली पटकथा के मुताबिक ओम, देश के साथ कथित धोखा करने वाले अधिकारी देव का बेटा है, जिसे पिता के लापता होने के बाद उसके चाचा जय राठौर ने पाला और अपने दिवंगत बेटे का नाम ऋषि दिया। फिल्म कई सारे भावनात्मक और एक्शन भरे घटनाक्रम के बाद देव पर लगा देशद्रोही का दाग छुड़ाने और असली दुश्मन का पर्दाफाश करने में कामयाब हो जाती है।

कपिल वर्मा का निर्देशन मार-धाड़ के दृश्यों के साथ कुछ भावुक दृश्यों में भी प्रभावित करता है, लेकिन निकेत पाण्डेय और राज सलूजा पटकथा और संवादों में बांध नहीं सके। मुख्य भूमिका में आदित्य राय कपूर और नायिका संजना सांघी के साथ, जैकी श्राफ, प्रकाश राज, आशुतोष राणा, प्राची शाह पंड्या, विक्की अरोड़ा, रोहित चौधरी, विक्रम कोचर, अबूधर अल हसन और अमिताभ घाणेकर प्रभावित करते हैं। अटैक और फारेंसिक के बाद ओटीटी के दर्शकों को यह एक और फिल्म मनोरंजन के नए आयाम देती है।

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