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भीड़ में खो चुके कलाकारों के लिए वरदान बना ओटीटी

ओवर द टाप या अदर देन टाप यानी ओटीटी प्लेटफार्म ने पिछले दो-तीन बरस में.. कलाकारों के लिए तो तोहफे ही बरसाए हैं।

भीड़ में खो चुके कलाकारों के लिए वरदान बना ओटीटी
अजय देवगन।

राजीव सक्सेना

सिनेमा के बड़े पर्दे के नामी-गिरामी सितारों के चाहे जो हाल हों, कोई फिल्म करोड़ों कमाए या कोई जबरन के बहिष्कार का शिकार बने, लेकिन सेंसर के शिकंजे से अब तक मुक्त ओटीटी के जरा से स्क्रीन ने न सिर्फ नवागत, बल्कि कहीं खो गए अभिनेता-अभिनेत्रियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के मौके दिए…

बड़े बजट की या बड़े बैनर की हिंदी फिल्मों में कहीं पक्षपात, कहीं भाई- भतीजावाद या कास्टिंग निर्देशक की मनमानी के कारण अपनी कला के प्रदर्शन से वंचित कई बेहतर कलाकार कोरोना की पूर्णबंदी के दौर में ओटीटी पर वेब सीरीज बनाने वालों के सामने अपनी प्रतिभा और साहस की वजह से चर्चा में आए और उन्हें काम मिलता गया। बाघबहादुर, सलीम लंगड़े पर मत रो सरीखी कलात्मक फिल्मों और नुक्कड़ जैसे टीवी शो के बाद भीड़ में खो चुके अभिनेता पवन मल्होत्रा को अंतराल बाद खोज निकाल कर वेबसीरीज में लानेवाला, वाकई तारीफ का हकदार है।

टब्बर से लेकर शिक्षा मंडल कितनी ही सीरीज में पवन ने दूसरी पारी में भी खुद को बेहतर साबित करने में कसर नहीं छोड़ी। कभी बड़े पर्दे पर नायिका रही टिस्का चोपड़ा के लिए भी दूसरा दौर कामयाब साबित हुआ है। टीवी शो मधुबाला की नायिका दृष्टि धामी हों या फिल्मों से नदारद हुर्इं ईशा गुप्ता ओटीटी ने ऐसी कितनी ही अभिनेत्रियों को नया जीवन प्रदान कर दिया।

सिनेमा में कोई अच्छा चरित्र तलाश रहे समर्थ कलाकार नवनी परिहार, मुकेश तिवारी, कन्नन अरुणाचलम, शक्ति सिंह, जाकिर हुसैन, राजेश तैलंग, विभा छिब्बर, हर्ष छाया, सौरभ शुक्ला या फिल्में हासिल करने में पिछड़ गए राजीव खंडेलवाल, अरुणोदय सिंह, कुणाल केमू और चंकी पांडेय वगैरह एक के बाद एक वेब सीरीज में अपनी छुपी हुई काबिलियत का प्रदर्शन करते दिखाई दे रहे हैं।

लेकिन सबसे आगे साबित हो रहे हैं अभी-अभी उभर कर आए, वे कलाकार जिनके हुनर को पहचानने में पारखी निगाहों ने शायद देर कर दी थी। उनमें, हर तीसरी वेब सीरीज में खास भूमिका कर रहे प्रतीक गांधी, विक्रांत मैसी, मोहित रैना, अहाना कामरा हैं तो वहीं अमित सियाल, दिव्येन्दु भट्टाचार्य, कृतिका कामरा, सोहम ठाकुर, ऋत्विक सिहोरे, जीतेन्द्र कुमार, सचिन श्राफ, परितोष त्रिपाठी, गुलशन देवैया और प्रणय नारायण, जयशंकर त्रिपाठी जैसे छुपे हुए कितने ही प्रतिभावान कलाकार भी हैं।

नेटफ्लिक्स, अमेजान प्राइम, डिजनी हाटस्टार, डिस्कवरी प्लस, सोनी लिव, जी फाइव, वूट से लेकर एमएक्स प्लेयर सरीखे ओटीटी मंचों पर अजय देवगन, अक्षय कुमार, मनोज वाजपेयी, जान अब्राहम, बाबी देओल, अभिषेक बच्चन, आदित्य राय कपूर, हुमा कुरैशी, सैफ अली खान, पंकज त्रिपाठी नीना गुप्ता, प्रकाश राज जैसे दिग्गज कलाकारों की लोकप्रियता को भुनाते हुए ओटीटी की खास फिल्में और बड़े बजट की वेब सीरीज बनाने की होड़ सी लगी हुई है।

ऐसे में सारेगामा, हंगामा, अतरंगी 2.0 आदि नवागत ओटीटी चैनल्स ही एकदम नए चेहरों को सामने लाकर कम बजट की वेब सीरीज बनाने को आगे आई हैं। लब्बोलुबाब यह कि दृश्य-श्रव्य के सबसे लोकप्रिय माध्यम, सिनेमा के बड़े परदे को टेलीविजन से कहीं दस कदम आगे बढ़कर, तमाम मर्यादाओं को ताक में रखते हुए.. असभ्य संस्कृति में गिनी जाने वाली गंदी गालियों के जरिए तकरीबन हर वर्ग, हर समुदाय के दर्शकों को प्रभावित करने में सफल सिद्ध हुई।

वेब सीरीज इन दिनों कई सारे नुकसान झेल चुके फिल्म निर्माताओं के साथ ही पुराने और नवोदित निर्देशकों-पटकथा लेखकों, तकनीकी विशेषज्ञों और कलाकारों के लिए वरदान बनी हुई हैं।बहरहाल, किसी एक नेता को बहुत अधिक बर्दाश्त न कर पाने वाले देश के मतदाताओं की तरह मनोरंजन के नित नए प्रयोग इस्तेमाल में लाने वाले आम और खास दर्शक ओटीटी की इस चरम उन्मुक्तता से कब तक नहीं ऊबते हैं यह वक्त ही बताएगा।

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First published on: 06-10-2022 at 10:11:26 pm
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