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विनोद खन्ना डेथ एनिवर्सरीः राजनीति में सबसे ज्यादा सफल हुए अभिनेताओं में शुमार थे, ओशो से जुड़ने के बाद छोड़ दी थीं फिल्में

विनोद खन्ना एक सफल अभिनेता होने के साथ-साथ बेहतरीन राजनीतिक नेता भी थे। वह गुरदासपुर सीट से चार बार सांसद चुने गए थे। उन्होंने साल 1997 में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी।

vinod khannaविनोद खन्ना फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

जाने-माने अभिनेता विनोद खन्ना के निधन को एक साल बीत चुका है। फिल्मों से लेकर सियासत तक अपनी छाप छोड़ने वाले विनोद खन्ना का जीवन भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। भारतीय जनता पार्टी में उन्होंने अपनी मजबूत जगह बनाई और लंबी सियासी पारी भी खेली। 70 साल की उम्र में मुंबई के एक अस्पताल में जब उन्होंने अंतिम सांस ली, तब भी वे गुरुदासपुर से सांसद थे। उनका निधन कैंसर की वजह से हुआ था। उनका जन्म पाकिस्तान के पेशावर में हुआ था लेकिन 1947 में बंटवारे के बाद उनका परिवार मुंबई आ गया था।

राजनीतिक करियरः विनोद का राजनीतिक करियर अन्य अभिनय से सियासत में आने वाले दूसरे नेताओं के मुकाबले काफी शानदार रहा। विनोद ने साल 1997 में बीजेपी के साथ अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। वो साल 1998 में पंजाब की गुरदासपुर सीट से पहली बार सांसद चुने गए। आजादी के बाद से कांग्रेस के इस गढ़ से खन्ना लगातार तीन बार (1998, 1999, 2004) में यहां से सांसद बने। हालांकि 2009 में वे यहां से हार गए लेकिन 2014 में फिर से यह सीट उन्होंने बीजेपी की झोली में डाल दी, हालांकि उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में यह सीट कांग्रेस के पंजाब प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने जीत ली थी। खन्ना अटल बिहारी सरकार के दौरान 2002 में केंद्र सरकार में संस्कृति और पर्यटन मंत्री भी रहे। अपनी फिल्मों की ही तरह उनकी राजनीतिक छवि भी काफी प्रभावी और मजबूत थी। 2019 के चुनाव में बीजेपी ने यहां से बॉलीवुड स्टार सनी देओल को मैदान में उतारा है।

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हेमा को लाए राजनीति मेंः मथुरा से मौजूदा सांसद और बीजेपी प्रत्याशी हेमा मालिनी को राजनीति में लाने का श्रेय और किसी को नहीं बल्कि विनोद खन्ना को ही जाता है। दरअसल एक बार अपने एक चुनावी प्रचार के लिए उन्होंने हेमा को आमंत्रित किया था और राजनीति में आने के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया था।

ओशो से थे प्रभावितः मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ओशो (आध्यात्मिक गुरु) से प्रभावित होकर विनोद ने न केवल अपने सफल फिल्मी सफर पर लगाम लगा दी। बल्कि उनकी शादी-शुदा जिंदगी पर भी इसका गहरा असर पड़ा। ओशो के संपर्क में आने के बाद विनोद ने साल 1975 में फिल्मों से संन्यास का ऐलान किया और अमेरिका में ओशो के आश्रम रहकर वहां उनकी सेवा में लग गए। वहां पर वह पांच साल रहे। आश्रम बंद होने के बाद वे भारत वापस लौट आए और दूसरी शादी कर ली। इसके बाद उन्होंने वॉन्टेड, दबंग जैसी मशहूर फिल्मों में अभिनय किया था।

हिट फिल्मेंः विनोद अपने समय के सबसे बेहतरीन और खूबसूरत अभिनेताओं में शुमार किए जाते थे। उन्होंने अपने फिल्मी करियर में कई हिट फिल्में दी। जैसेः चांदनी, मुकद्दर का सिकंदर, अमर अकबर एंथनी, हेराफेरी, परवरिश, मेरे अपने आदि उनकी बेहतरीन फिल्मों में शुमार की जाती हैं।

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