हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ कलाकार ऐसे हुए हैं, जिन्होंने अपने अभिनय से हर दौर के दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। ऐसे ही अभिनेता के बारे में आज हम बात करने जा रहे हैं, जिनका नाम था जीवन। जी हां! ओमकार नाथ धर उर्फ जीवन की आज 10 जून पुण्यतिथि है, इस मौके पर उन्हें याद करना खास है क्योंकि उन्होंने अपने करियर में देवताओं के दूत नारद मुनि से लेकर पर्दे के सबसे खतरनाक और चालाक विलेन तक के किरदारों को जीवंत किया।
जीवन उन चुनिंदा कलाकारों में से थे, जिन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई और दशकों तक बॉलीवुड में बने रहे। उनका जीवन संघर्ष, मेहनत और शानदार किरदारों से भरा था।
कश्मीर से मुंबई तक का सफर
24 अक्टूबर 1915 को जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में जन्मे ओमकार नाथ धर एक संपन्न परिवार से ताल्लुक रखते थे। उन्हें बचपन से ही फिल्मों में काम करने का शौक था। परिवार की इच्छा के खिलाफ उन्होंने अभिनय की दुनिया में करियर बनाने का फैसला किया और मुंबई का रुख किया।
मुंबई पहुंचने के बाद उन्हें शुरुआती दिनों में काफी संघर्ष करना पड़ा। छोटे-मोटे काम करने के साथ-साथ उन्होंने फिल्मों में काम तलाशने शुरू किया। धीरे-धीरे उन्हें छोटे रोल मिलने लगे और यहीं से उनकी फिल्मी सफर शुरू हुआ।
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हीरो बनने का सपना, लेकिन विलेन बनकर मिली पहचान
जीवन ने अपने करियर की शुरुआत बतौर हीरो की थी। 1930 और 1940 के दशक में उन्होंने कई फिल्मों में मुख्य भूमिकाएं निभाईं। लेकिन वक्त के साथ उन्हें एहसास हुआ कि उनकी असली ताकत चरित्र भूमिकाओं और नेगेटिव किरदारों में है।
इसके बाद उन्होंने विलेन के रूप में ऐसी पहचान बनाई कि दर्शक उन्हें देखते ही किरदार से नफरत करने लगते थे। उनकी आंखों की गंभीरता, डायलॉग बोलने का अंदाज और चेहरे के भाव उन्हें बाकी खलनायकों से अलग बनाते थे।
नारद मुनि बनकर घर-घर में हुए मशहूर
जीवन के करियर का सबसे यादगार अध्याय पौराणिक फिल्मों से जुड़ा रहा। उन्होंने कई फिल्मों में नारद मुनि का किरदार निभाया और इस भूमिका में इतनी लोकप्रियता हासिल की कि लोग उन्हें असल जिंदगी में भी नारद मुनि के नाम से पहचानने लगे।
उन्हें 1950 के दशक की पौराणिक फिल्मों में नारद मुनि के किरदार के लिए लोकप्रियता मिली। माना जाता है कि उन्होंने अपने करियर में 49 बार नारद मुनि की भूमिका निभाई। हालांकि कुछ लेखों और रिकॉर्ड्स में यह संख्या 60 या 61 फिल्मों तक भी बताई गई है।
उनकी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस, अनोखा अंदाज और यादगार अभिनय उन्हें हिंदी सिनेमा के सबसे बहुमुखी कलाकारों में से एक बनाता है। उनकी मुस्कान, वीणा हाथ में लिए डायलॉग बोलना और चुटीला अंदाज दर्शकों को बेहद पसंद आता था।
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हर तरह के किरदार में छोड़ी छाप
जीवन सिर्फ पौराणिक या खलनायक भूमिकाओं तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने सामाजिक, पारिवारिक और एक्शन फिल्मों में भी दमदार अभिनय किया। अपने लंबे करियर में उन्होंने सैकड़ों फिल्मों में काम किया और हर भूमिका को यादगार बना दिया।
उनकी चर्चित फिल्मों में ‘नया दौर’, ‘हीर रांझा’, ‘जॉनी मेरा नाम’, ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘धर्मवीर’, ‘लावारिस’ और ‘कुर्बानी’ जैसी कई फिल्में शामिल हैं। इन फिल्मों में उनके अभिनय को खूब सराहा गया।
तीन पीढ़ियों के सितारों के साथ किया काम
जीवन उन कलाकारों में थे जिन्होंने हिंदी सिनेमा के कई दौर देखे। उन्होंने दिलीप कुमार, देव आनंद, राज कपूर जैसे दिग्गज सितारों के साथ काम किया। बाद में वे अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, विनोद खन्ना और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे कलाकारों के साथ भी नजर आए।
यही वजह है कि उनका करियर करीब पांच दशकों तक सफलतापूर्वक चला और वे फिल्म इंडस्ट्री के सबसे भरोसेमंद कैरेक्टर एक्टर्स में गिने गए।
हमेशा याद रहेंगे जीवन
10 जून 1987 को जीवन का निधन हो गया था, लेकिन उनकी निभाई हुई भूमिकाएं आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा हैं। चाहे नारद मुनि की चतुर छवि हो या फिर पर्दे पर साजिश रचने वाले खलनायक का रूप, जीवन ने हर किरदार को अपनी खास शैली से अमर बना दिया।
