Nirdosh Movie Review - Jansatta
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‘Nirdosh’ Film Review: कातिल कौन है

अरबाज खान की दिली ख्वाहिश ये है कि वे भी सुपर स्टार बने। आखिर जिसका भाई सलमान खान हो उसे ये इच्छा क्यों न हो? पर सिर्फ इच्छा रखने से क्या होता है।

अरबाज खान की दिली ख्वाहिश ये है कि वे भी सुपर स्टार बने। आखिर जिसका भाई सलमान खान हो उसे ये इच्छा क्यों न हो? पर सिर्फ इच्छा रखने से क्या होता है। दम भी तो हो। यानी अभिनेता बनने का दम। वही अरबाज में नहीं है। ये बात फिर से इस फिल्म से साबित होती है। निर्दोष एक हत्या, रहस्यकथा यानी मर्डर मिस्ट्री है। लेकिन निर्देशक को ये बात समझ में नहीं आई कि जब आपने फिल्म का नाम ही निर्दोष रख दिया तो रहस्य वाला मसला कैसे आगे बढ़ेगा?  बहरहाल, निर्दोष की कहानी में मुंबई केंद्रित है। इसमें शिनाया ग्रोवर (मंजरी फडनीस) नाम की महिला पर पुलिस को शक है कि उसने अपने पड़ोसी (मुकुल देव) की हत्या की। शिनाया की पूछताछ शुरू होती है और इसका जिम्मा दिया जाता है लोखंडे (अरबाज खान) नाम के पुलिस अफसर को। लोखंडे एक ऐड़ा पुलिस अफसर है और अपने तरीके से काम करता है।

वह तहकीकात जारी रखता है और शिनाया के अलावा उसके पति गौतम (अश्मित पटेल) से भी पूछताछ करता है। अदा सक्सेना (महक चहल) नाम की एक संघर्षरत महिला कलाकार और मॉडल का नाम भी इस सिलसिले में उभरता है। सवाल है कि हत्या किसने की और क्या शिनाया ग्रोवर दोषी है या निर्दोष-ये गुत्थी कैसे सुलझती है इसी पर पूरी फिल्म निर्भर है। दिक्कत ये है कि फिल्म की पटकथा बेहद लचर और पुरानी शैली की है और इसी कारण हत्या आधारित होने के बावजूद ये फिल्म कई जगहों पर ढीली हो गई है। मर्डर मिस्ट्री वाली फिल्मों में सस्पेंस का तत्व आखिर तक बने रहना चाहिए और ह्यकातिल कौनह्ण वाला पहलू भी। ये सारे तत्व कसे हुए हैं नहीं, इसलिए ये फिल्म भी चुस्त अपराध कथा नहीं बन सकी है।

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