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न्यूटन की शूटिंग के दौरान ही गुजर गई थीं राजकुमार राव की मां, और फिर…

शूटिंग सेट पर मौजूद हर शख्स यही मान कर चल रहा था कि राजकुमार को वापस आने में 3-4 दिन तो लग जाएंगे... लेकिन ऐसा नहीं हुआ

Author नई दिल्ली | September 23, 2017 1:33 PM
न्यूटन की कहानी आपको छत्तीसगढ़ के एक जंगल दण्डकारण्य में ले जा जाती है।

बॉलीवुड एक्टर राजकुमार राव का उनके काम के प्रति समर्पण भाव कितना ज्यादा है इस बात का अंदाजा कोई भी इंसान उनका काम देख कर लगा सकता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि राजकुमार अपने काम को लेकर इतने ज्यादा संजीदा हैं कि हाल ही में रिलीज हुई उनकी फिल्म न्यूटन की शूटिंग के दौरान उनकी मां का निधन हो गया था। क्योंकि फिल्म की शूटिंग छत्तीसगढ़ के जंगलों में चल रही थी जहां नेटवर्क काफी कमजोर होता है, तो राजकुमार को इस बात की खबर काफी देर से लगी। अपनी मां के निधन की खबर मिलते ही राजकुमार रायपुर के लिए रवाना हो गए। शूटिंग सेट पर मौजूद हर शख्स यही मान कर चल रहा था कि राजकुमार को वापस आने में 3-4 दिन तो लग जाएंगे। ऐसा इसलिए भी क्योंकि राजकुमार अपनी मां से बहुत ज्यादा लगाव रखते थे।

हालांकि सेट पर मौजूद निर्देशक और बाकी क्रू को यह जानकर काफी हैरानी हुई कि राजकुमार अगले ही दिन सेट पर पहुंच गए थे। असल में राजकुमार को जब इस बात की खबर मिली कि उनके सेट पर नहीं होने के चलते पूरा क्रू छत्तीसगढ़ के जंगलों में परेशानी झेल रहा है तो उनसे यह सहा नहीं गया और वह अपनी मां के अंतिम संस्कार के बाद वापस शूटिंग लोकेशन के लिए रवाना हो गए। राजकुमार ने एक चैनल से बातचीत में कहा कि मुझे पता है कि मेरी मां को यह जानकर खुशी मिलेगी कि मैं अपना कमिटमेंट निभा सका। राजकुमार ने कहा कि मेरी मां को सबसे ज्यादा खुशी मुझे स्क्रीन पर देख कर ही मिलती थी। काम के प्रति राजकुमार के डेडिकेशन को देखते हुए निर्माताओं ने फिल्म के शुरुआत में राजकुमार की मां के फोटो के साथ उन्हें स्पेशल क्रेडिट देते हुए अपनी श्रद्धांजलि दी है।

गौरतलब है कि न्यूटन की कहानी आपको छत्तीसगढ़ के एक जंगल दण्डकारण्य में ले जा जाती है। जहां लोगों ने कभी वोटिंग मशीन नहीं देखी होती। इसी वजह से उन्हें समझाया जाता है कि वोटिंग मशीन एक खिलौना है जिसमें जो बटन अच्छा लगे उसे दबा दो। जिसका न्यूटन (राजकुमार राव) इस बात का विरोध करते हैं। उनकी कोशिश होती है कि वो लोगों को चुनाव का मतलब समझा सकें और उन्हें जागरुक बना सकें। लेकिन यह काम एक दिन में तो होता नहीं है इसी वजह से उन्हें काफी सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। नक्सल प्रभावित इलाके में चुनाव करवाना आसान नहीं होता क्योंकि हर समय गोली चलने का और मौत का डर लगा रहता है।

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