नेटफ्लिक्स के को-सीईओ टेड सारंडोस ने पिछले साल स्वीकार किया था कि भारत में नेटफ्लिक्स की शुरुआत 2017 में अनुराग कश्यप और विक्रमादित्य मोटवानी की क्राइम थ्रिलर सीरीज ‘सेक्रेड गेम्स’ से करने के बजाय कुछ ज्यादा ‘पॉपुलर’ या ‘मसालेदार’ कंटेंट के साथ होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा था कि अगर उन्हें दोबारा मौका मिलता, तो वह ‘सेक्रेड गेम्स’ को कुछ साल आगे खिसकाकर भारत में नेटफ्लिक्स की शुरुआत किसी ‘मस्सी’ कंटेंट से करते।

नई दिल्ली में गुरुवार को आयोजित इंडियन एक्सप्रेस अड्डा में बातचीत के दौरान सारंडोस ने रियलिटी शो ‘लॉक अप’ को नेटफ्लिक्स इंडिया के शुरुआती कंटेंट में शामिल करने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा, “काश हमने ‘सेक्रेड गेम्स’ के साथ ही ‘लॉक अप’ जैसा कुछ किया होता। यह जानते हुए कि आखिरकार हम दोनों तरह के कंटेंट करने वाले हैं।”

दर्शक कंटेंट को क्लासी और मास्सी के तौर पर नहीं देखते

सारंडोस का यह बयान ऐसे समय आया है जब नेटफ्लिक्स इंडिया लगातार ज्यादा ‘मास्सी’ और बड़े दर्शक वर्ग वाले कंटेंट को अपने प्लेटफॉर्म पर जगह दे रहा है। इनमें कॉमेडी शो ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शो’, समय रैना का रोस्ट शो ‘इंडियाज गॉट लैटेंट’ और हाल ही में एकता कपूर का रियलिटी शो ‘लॉक अप’ शामिल हैं। ‘लॉक अप’ के दूसरे सीजन का समापन इसी हफ्ते हुआ है।

नेटफ्लिक्स के ‘क्लासी’ से ‘मास्सी’ कंटेंट की ओर बढ़ने की रणनीति पर बात करते हुए सारंडोस ने कहा कि इसकी जड़ें नेटफ्लिक्स के शुरुआती डीवीडी बिजनेस के दिनों में हैं। उनके मुताबिक, उस समय उन्हें पता चला था कि लोगों की पसंद बेहद अलग-अलग होती है और हर तरह के कंटेंट की अपनी ऑडियंस होती है।

उन्होंने कहा, “तब हमें समझ आया कि अगर आप पूरी दुनिया का मनोरंजन करना चाहते हैं, जो हमारा मंत्र है, तो आपके पास हर किसी के लिए कुछ न कुछ होना चाहिए। मुझे नहीं लगता कि लोग इसे क्लासी या मस्सी के तौर पर देखते हैं। शायद विचार रखने वाले लोग और एग्जीक्यूटिव इसे इस तरह देखते हैं, लेकिन दर्शक अपनी पसंद के मस्सी कंटेंट को आपकी क्लासी पसंद से कम पसंद नहीं करते। इसलिए हमें दोनों तरह के दर्शकों को कंटेंट देना होगा।”

यह भी पढ़ें: ‘स्क्विड गेम’ की सफलता ने सभी अनुमान किए फेल, टेड सारंडोस बोले- कोई डेटा इसे नहीं पकड़ सका

‘लॉक अप’ को भी क्लासी मानते हैं टेड सारंडोस

सारंडोस ने यह भी स्पष्ट किया कि वह ‘लॉक अप’ को कमतर या कम ‘क्लासी’ कंटेंट नहीं मानते। उन्होंने कहा कि इस समय लोग ‘लॉक अप’ को बेहद पसंद कर रहे हैं और यह काफी लोकप्रिय है।

उन्होंने हाल ही में रिलीज हुई विक्रांत मैसी स्टारर और प्रोड्यूस्ड रोमांटिक सीरीज ‘मुसाफिर कैफे’ का उदाहरण देते हुए कहा कि एक तरफ ‘लॉक अप’ है, जिसे आमतौर पर मस्सी कहा जा सकता है, वहीं दूसरी तरफ ‘मुसाफिर कैफे’ जैसा कंटेंट है, जिसे लोग क्लासी कह सकते हैं। दोनों एक साथ एक बड़े दर्शक वर्ग को सर्व कर सकते हैं।

उन्होंने दोहराया कि पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें लगता है कि ‘सेक्रेड गेम्स’ के साथ ही ‘लॉक अप’ जैसा शो भी लॉन्च करना बेहतर होता।

भारत में स्टार पावर को भी अहमियत देता है नेटफ्लिक्स

भारत में स्टार कल्चर को लेकर भी सारंडोस ने कहा कि नेटफ्लिक्स के लिए बड़े सितारे काफी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने माना कि किसी स्टार की मौजूदगी दर्शकों को किसी शो या फिल्म को देखने के लिए आकर्षित कर सकती है और उन्हें कंटेंट को आजमाने का एक कारण देती है।

नेटफ्लिक्स इंडिया की अब तक की कंटेंट लाइनअप में सैफ अली खान (‘सेक्रेड गेम्स’, ‘कर्तव्य’), माधुरी दीक्षित (‘द फेम गेम’, ‘मां बहन’), रवीना टंडन (‘अरण्यक’), ईशान खट्टर और भूमि पेडनेकर (‘द रॉयल्स’) जैसे कई बड़े नाम शामिल रहे हैं।

यह भी पढ़ें: यूट्यूब पर फ्री फिर नेटफ्लिक्स पर क्यों आया ‘इंडियाज गॉट लैटेंट 2’, सीईओ टेड सारंडोस ने बताई वजह

कब आएगा भारत का ‘मनी हाइस्ट’ जैसा ग्लोबल मोमेंट?

सारंडोस से जब भारत के ‘मनी हाइस्ट’ मोमेंट को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि भारत को किसी एक खास पल का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, भारतीय कंटेंट पहले ही कई बार दुनियाभर में अपनी पहचान बना चुका है।

उन्होंने बताया कि 2024 से हर हफ्ते नेटफ्लिक्स की ग्लोबल टॉप 10 लिस्ट में कोई न कोई भारतीय फिल्म या सीरीज शामिल रही है। उन्होंने कहा कि इस साल दुनियाभर में नेटफ्लिक्स पर भारतीय कंटेंट को 3.5 अरब घंटे देखा गया है।

सारंडोस ने यह भी दावा किया कि आदित्य धर की 2025 में रिलीज हुई स्पाई थ्रिलर ‘धुरंधर’ इस साल नेटफ्लिक्स पर सबसे ज्यादा देखी जाने वाली नॉन-इंग्लिश फिल्म रही।

भारत में नेटफ्लिक्स क्यों हुआ सफल?

भारत में पिछले करीब 10 वर्षों में नेटफ्लिक्स की सफलता पर बात करते हुए सारंडोस ने कहा कि भारत में मनोरंजन की मांग बहुत ज्यादा है, लेकिन देश की आबादी के मुकाबले सिनेमाघरों की संख्या बेहद कम है।

उन्होंने कहा कि छोटे स्क्रीन यानी टीवी और स्मार्टफोन इस कमी को पूरा करने में मदद कर सकते हैं। यही वजह है कि स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म भारत जैसे बाजार में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

सारंडोस ने माना कि भारत में कारोबार करना नेटफ्लिक्स के लिए एक लंबा और लगातार चुनौतीपूर्ण सफर रहा है। उन्होंने कहा कि कई अमेरिकी कंपनियां भारत में इसलिए असफल हुईं क्योंकि उन्होंने एक सफल फिल्म के आधार पर यह मान लिया कि वे भारत को समझती हैं।

उन्होंने कहा, “भारत सिर्फ एक नहीं है। यहां सफल होने के लिए आपको पूरे भारत में जाना होगा। हम यह काम कैलिफोर्निया से नहीं करते, हम इसे मुंबई से करते हैं।”