नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘गांधारी’ मां-बेटी के रिश्ते पर आधारित है, लेकिन फिल्म उस इमोशन को सही तरीके से उभार नहीं पाती। आइडिया अच्छा है, लेकिन कहानी में इतने मोड़ और घुमाव हैं कि एक वक्त बाद आप कन्फ्यूज हो जाते हैं।

1 घंटा 56 मिनट की इस फिल्म को देखकर ‘मर्दानी 3’ वाली फील भी आती है। सच कहें तो 3 सितंबर को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई इस फिल्म का नाम ‘गांधारी’ की जगह ‘चक्रव्यूह’ होता तो ज्यादा सही रहता, क्योंकि कहानी आपको इतना गोल-गोल घुमाती है कि समझना मुश्किल हो जाता है कि शुरुआत कहां से हुई थी और अंत आखिर कहां हो रहा है। चलिए बताते हैं फिल्म देखनी चाहिए या नहीं?

Mirzapur The Movie Review LIVE

क्या है तापसी पन्नू की गांधारी की कहानी

तापसी पन्नू (बानी) अपने पति इश्वाक सिंह (गोकुल) के साथ ट्रेन के सफर में हैं। ट्रेन जोयपुरा स्टेशन पर रुकी हुई है। अपनी बेटी मिष्टी के साथ बानी कविता गुनगुना रही है और बस 2 मिनट के लिए उसे अकेला छोड़ कर बानी को वॉशरूम जाना पड़ता हैं। अचानक उनकी बेटी की कविता की आवाज आनी बंद हो जाती है, बानी बाहर देखती हैं कि कोई मिष्टी का अपहरण कर ले जा रहा है। पीछा करते हुए बानी के माथे पर चोट लगती है और अस्थाई रूप से उसकी आंखों की रोशनी चली जाती है।

पुलिस के पास कंप्लेंट और पूरे इलाके में बेटी के गुमशुदगी के पोस्टर्स बांटते हुए उसकी मुलाकात अचानक अपनी ही मां से हो जाती है, जिसने उसे बचपन में बेच दिया था। वही उसे अंधे बने रहने की सलाह देती है। धीरे-धीरे कहानी की परते खुलती हैं और पुलिस वालों से लेकर हर वो शख्स जिसे बानी अपना मान रही थी वो चाइल्ड ट्रैफिकिंग के अपराध से जुड़ा होता है।

एक्शन और परफॉर्मेंस में कैसी रहीं तापसी

फिल्म में कई शानदार एक्टर्स को शामिल किया गया है। तापसी पन्नू, इश्वाक सिंह, मीता वशिष्ठ, स्वास्तिका मुखर्जी, चंदन रॉय जैसे तमाम शानदार एक्टर्स इस फिल्म में दिखाई दिए हैं। फिल्म से तापसी ने दमदार एक्शन किया है, वह अकेली सबसे लड़ती और सबको खत्म करती दिखीं। फिल्म में बतौर विलेन आपको प्रशांत नारायणन नजर आएंगे। आंखों में सुरमा लगाए एक खतरनाक खलनायक का रोल उन्होंने फिल्म में निभाया है।

यह भी पढ़ें: Hanuman Ansh Box Office: ‘हनुमान अंश’ ने ‘टॉक्सिक’ को पछाड़ा, 3 गुना कमाई कर यश की फिल्म को दी मात

प्रशांत को देखकर एक बार फिर आपको ‘मर्डर 2’ के विलेन की याद आ जाएगी। पूरा जोयपुरा उनके इशारों पर ही चलता है और सभी लोग बच्चों की तस्करी के अपराध से जुड़ें है।

डायरेक्शन कैसा है

देवाशीष मखीजा के निर्देशन में बनी फिल्म गांधारी का लेखन कनिका ढिल्लों ने किया है। फिल्म की कहानी में जहां लगने लगता है कि अब यहां कनेक्ट फील होगा, वहीं पर कहानी को पूरी तरह बदल दिया जाता है। करीब 2 घंटे की फिल्म में 3 कहानियां चलने लगती हैं, जिसमें अलग-अलग लोग मिष्टी को ढूंढ रहे हैं लेकिन बदले में सिर्फ कंफ्यूजन ही देखने मिलती है।

बेटी को ढूंढते हुए बानी (तापसी) अपने खुद के अतीत से मिलती हैं और दर्शकों को फिल्म यहीं से इमोशनल की जगह इरिटेटिंग लगने लगती है। फिल्म का कॉन्सेप्ट अच्छा था लेकिन खराब एक्जीक्यूशन ने तापसी की फिल्म को कमजोर बना दिया। जिसकी वजह से फिल्म एक वन टाइम वॉच फिल्म बन कर रह गई और इंपेक्ट छोड़ जाने में नाकामयाब रही। हर एक्टर ने अच्छा काम किया लेकिन कमजोर कहानी इस फिल्म को उभार नहीं पाती।

Netflix की इस थ्रिलर फिल्म को देखना चाहिए या नहीं?

सिर्फ एक्शन के लिए फिल्में देखना पसंद है तो ये फिल्म देखी जा सकती है लेकिन अच्छी कहानी, इमोशन और जुड़ाव महसूस करने के लिए इस फिल्म का रेकेमेंडेशन सही नहीं होगा।