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राम मंदिर जमीन सौदे से जुड़े लोग पर्दे के पीछे क्यों छिपे हैं? PM मोदी का नाम लेकर रवीश कुमार ने किया सवाल

रवीश कुमार ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कुछ गड़बड़ नहीं है तो सौदे में शामिल तमाम किरदार मीडिया के सामने क्यों नहीं आ रहे हैं? इस मंदिर का भूमि पूजन सबके सामने हुआ।

पीएम नरेंद्र मोदी (फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस)

अयोध्या में राम मंदिर के लिए जमीन खरीद में कथित घोटाले को लेकर वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने ट्रस्ट के सदस्यों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आखिर इतने गंभीर आरोप के बाद ट्रस्ट से जुड़े लोग पर्दे के पीछे क्यों छुप गए हैं? एनडीटीवी पर अपने कार्यक्रम प्राइम टाइम में इस मुद्दे को उठाते हुए रवीश ने कहा कि राम मंदिर के लिए जमीन खरीद से जुड़ा एक मामला सामने आया है। यह मामला सामने आने के बाद इससे जुड़े कई किरदार सामने ही नहीं आ रहे हैं।

रवीश कुमार ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कुछ गड़बड़ नहीं है तो सौदे में शामिल तमाम किरदार मीडिया के सामने क्यों नहीं आ रहे हैं? इस मंदिर का भूमि पूजन सबके सामने हुआ। एक-एक बात पूरे देश को बताई गई। अब उसी मंदिर के लिए जमीन से जुड़े यह किरदार आखिर पर्दे के पीछे क्यों छिपे हुए हैं? उन्हें याद होना चाहिए कि इसी मंदिर के भूमि पूजन के वक्त प्रधानमंत्री साष्टांग हो गए थे।

रवीश कुमार यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि मंदिर के भूमि पूजन को एक साल भी नहीं हुए हैं कि ऐसी खबर सामने आ गई है। तालाबंदी की तबाही झेल रहे भारत के लिए यह दृश्य आर्थिक उन्नयन के समान था। भूमि पूजन के वक्त सैकड़ों पवित्र स्थान और नदियों से मिट्टी और जल आदि लाया गया था। हर तरह से पवित्रता सुनिश्चित की गई थी, इसके बाद भी जमीन के एक सौदे पर सवाल उठ गया है। राम मंदिर ट्रस्ट में कथित घोटाले को लेकर पूर्व IAS सूर्य प्रताप सिंह ने भी तंज़ कसा था। पूर्व आईएएस अधिकारी ने तंज करते हुए एक और ट्वीट किया और लिखा ‘मुँह में राम, जेब में चंदा, चम्पत होगा अब ये बंदा।’

क्या है पूरा मामला? दरअसल, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया था कि राम मंदिर के निर्माण के लिए ट्रस्ट ने एक जमीन का सौदा किया था। यह जमीन पहले 2 करोड़ रुपए में खरीदी गई और बाद में ट्रस्ट ने इस जमीन को कुछ मिनट के अंतराल पर 18 करोड रुपए में खरीद लिया। हालांकि मंदिर ट्रस्ट की तरफ से सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया गया है।

राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि जितना क्षेत्रफल है उसकी तुलना में इस भूमि का मूल्य 1423 रुपये प्रति वर्ग फीट है जो बाजार मूल्य से बहुत कम है। मालिकाना हक का निर्णय करना बहुत जरूरी था जो कराया गया। हमने जमीन का एग्रीमेंट करा लिया। अभी बैनामा कराया जाना बाकी है।

उन्होंने आगे कहा कि सभी लेनदेन बैंक टू बैंक हुए हैं और टैक्स में कोई चोरी नहीं की गई है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि आरोप लगाने वालों ने आरोप से पहले ट्रस्ट के पदाधिकारियों से तथ्यों की जानकारी नहीं ली। उन्होंने समाज को भ्रमित किया है। भ्रमित न हों और मंदिर समय सीमा में पूरा करने में सहयोग करें।

क्या है ताज़ा अपडेट? उधर, खबर है कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने इस पूरे विवाद पर रिपोर्ट तलब कर ली है। साथ ही राजस्व विभाग के अधिकारियों को भी तलब कर पूरे मामले की जानकारी ली गई है। विवाद पर ट्रस्ट में घमासान मचने की भी खबर है।

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