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‘अखबार में गोबर छपत बा, टीवी पे खाली सुशांत सिंह के कवरेज चलत बा’- वायरल हो रहा रवीश कुमार का ये VIDEO

न्यूज चैनलों पर निशाना साधते हुए रवीश कुमार आगे कहते हैं कि न्यूज चैनल देख रहे हैं? यही देश है? 3 महीने से सिर्फ सुशांत सिंह राजपूत का कवरेज चल रहा है। आप लोगों को ऐसा ही देश चाहिए?

ravish kumar, NDTV, journalist ravish kumar, bihar chunav,NDTV के वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार की फाइल फोटो। फोटो सोर्स- सोशल मीडिया

सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) केस में ड्रग्स एंगल को लेकर छिड़ी बहस खत्म होती नहीं दिख रही है। एक तरफ एनसीबी तमाम स्टार्स से पूछताछ कर रही है, तो दूसरी तरफ मीडिया में भी यह मामला सुर्खियों में है। इसी बीच एनडीटीवी से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार (Ravish Kumar) का एक फेसबुक लाइव वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में रवीश भोजपुरी में रूबरू हैं और तमाम मुद्दों पर अपनी बात रख रहे हैं।

वीडियो में रवीश कुमार बिहार चुनाव और रोजगार को लेकर लोगों से कह रहे हैं कि रोजगार के सवाल पर ढंग से सोचिए। पूछिए। सवाल थोड़ा कठोर पूछिए। यहां तो लोगों को पता ही नहीं है कि नाराज क्यों हैं और सरकार से खुश क्यों हैं? तो इसका पता रखिए। थोड़ी मेहनत करिए और आंख खोलिए। रवीश कुमार आगे कहते हैं कि जो अखबार पढ़ रहे हैं उसमें सिर्फ गोबर छप रहा है (भोजपुरी में कहत हैं, हउ अखबार पढ़त बानीं वोह में खाली गोबर छपत बा)। वे कहते हैं उसमें कोई खबर है? कुछ नहीं है। आपलोगों से वे दो-दो सौ रुपए लेकर अखबार भी बेच रहे हैं और सरकार से मिलकर धंधा भी कर रहे हैं।

एनडीटीवी के पत्रकार रवीश कुमार लोगों से सवाल पूछते हुए कहते हैं कि आप अखबार क्यों ले रहे हैं? जब उसमें पत्रकिरिता नहीं है तो दो सौ रुपए क्यों दे रहे हैं? ये सब बंद करिए। जो पैसा बचेगा उससे कुछ खाइए। मिठाई ही खा लीजिए। नहीं तो गांव में ही किसी को दे दीजिए दो सौ। वे कहते हैं सब कोई धंधा बना लिया है। सुबह-सुबह अखबार खोलकर बैठ जाते हैं जिसमें कुछ है ही नहीं।

न्यूज चैनलों पर निशाना साधते हुए रवीश कुमार आगे कहते हैं कि न्यूज चैनल देख रहे हैं? यही देश है? 3 महीने से सिर्फ सुशांत सिंह राजपूत का कवरेज चल रहा है। आप लोगों को ऐसा ही देश चाहिए! ये ड्रामा चल रहा है। इसी के पीछे आपके बेटों की नौकरी पढ़ाई सब खत्म है। कोई नाम ले रहा है कि दरभंगा में कौन सा कॉलेज है? कोई पटना यूनिवर्सिटी का नाम ले रहा है?

रवीश कहते हैं कि सब बिला गया है। सब खत्म हो गया है। सिर्फ भाषण देना है। जाकर पूछिए न कि जिला अस्पताल में कितने डॉक्टर्स होने चाहिए और कितने हैं? रवीश कहते हैं कि बीमा पॉलिसी दे दे रहे हैं। बीमा पॉलिसी से इलाज होता है? डॉक्टर सामने रहेगा तब तो आला लगाकर देखेगा कि बीपी बढ़ा है। एक्स-रे मशीन काम ही नहीं कर रहे हैं। तो बीमा पॉलिसी से इलाज हो जाएगा। रवीश ने कहा कि नेताओं से क्या मांगना है? क्या मिला है और क्या नहीं मिला है? थोड़ा ढंग से इसकी बात करिए।

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