दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने शिक्षा सुधारों की मांग कर रहे छात्रों के समर्थन में एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें वह गुस्से भरे, भावुक और कड़े शब्दों के साथ अपनी बात रखते हुए नजर आए थे। अब हाल ही में उनका एक इंटरव्यू सामने आया है, जिसमें उन्होंने बड़े सेलिब्रिटीज के इस मुद्दे पर न बोलने को लेकर रिएक्ट किया है।
नसीरुद्दीन शाह से जब ‘द वायर’ ने बात करते हुए पूछा कि कई बड़े सितारे इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं, तो अभिनेता ने अपने खास अंदाज मजाक-मजाक में उन सेलेब्स पर निशाना साधते हुए कहा, “वे तब बोलेंगे जब उनका जमीर उनसे ऐसा करने को कहेगा। एक कहावत है- जिस कुत्ते के मुंह में हड्डी हो वह भौंक नहीं सकता। जैसे ही हड्डी उनके मुंह से गिरेगी या उनके दांत टूटेंगे, तब वे भौंकेंगे।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि लोग अपनी चुप्पी से फायदा उठा रहे हैं और इसलिए अपनी अंतरात्मा की आवाज को दबा रहे हैं, तो शाह ने जवाब दिया, “बिल्कुल, हां और वे ऐसा कब तक कर सकते हैं? यह तो वक्त ही बताएगा।”
दुलकर सलमान ने किया पोस्ट
इंस्टाग्राम स्टोरी पर दुलकर सलमान ने लिखा, “जंतर-मंतर पर जो हो रहा है, वह हमें रुककर सुनने और एक-दूसरे को समझने की याद दिलाता है। शिक्षा हमेशा उम्मीद, अवसर और बेहतर भविष्य के वादे का प्रतीक रही है। युवाओं को अनिश्चितता का सामना करते देखना दिल तोड़ देने वाला है। इससे भी ज्यादा दुख की बात यह है कि कुछ छात्रों को लग रहा है कि उनके पास आगे बढ़ने का कोई रास्ता नहीं बचा है, जबकि कुछ ने तो अपनी ज़िंदगी खत्म करने तक का फैसला कर लिया। वहीं माता-पिता अपने बच्चों के सपनों को ज़िंदा रखने के लिए कर्ज़ और दर्द का बोझ उठा रहे हैं।”
टकराव की बजाय संवेदनशीलता की अपील करते हुए अभिनेता ने आगे कहा, “हर राय और विचार के पीछे ऐसे लोग हैं जिनके अपने सपने, परिवार, उम्मीदें और आकांक्षाएं हैं। वे करुणा और सम्मान के हकदार हैं। मेरी उम्मीद है कि सार्थक बातचीत हो, शांतिपूर्ण समाधान निकले और फैसले समझदारी व सहानुभूति के साथ लिए जाएं। समझ और संवाद पर बना भविष्य, विभाजन और हिंसा पर बने भविष्य से हमेशा मजबूत होगा।”
अदिति ने की घटना की निंदा
अभिनेत्री अदिति राव हैदरी ने भी इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए इस घटना की निंदा की। उन्होंने कहा कि उनकी बात राजनीति नहीं, बल्कि इंसानियत के नजरिए से है। अभिनेत्री ने लिखा,
‘मैं सबसे पहले एक इंसान हूं। मैं एक अभिनेता के रूप में नहीं, बल्कि अपने देश की एक जागरूक, सोचने-समझने और महसूस करने वाली जिम्मेदार नागरिक के रूप में बोल रही हूं। हिंसा और उसके प्रति दिखाई जा रही बेरुखी ने मुझे गहराई से परेशान किया है। जो लोग मुश्किल में हैं, उनके लिए आवाज़ उठाना और अहिंसा, गरिमा, सुरक्षा तथा शांतिपूर्ण और पारदर्शी संवाद की मांग करना कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं, बल्कि इंसानियत है।”
उन्होंने आगे कहा, “मैं अपने देश से प्यार करती हूँ और उसकी रक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालने वाले हर बहादुर व्यक्ति को सलाम करती हूँ। जो लोग पीड़ा में हैं उनका साथ देना और जो हमारी रक्षा करते हैं उनका सम्मान करना, ये एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। दोनों ही हमारी साझा इंसानियत से जुड़े मूल्य हैं।”
जंतर-मंतर पर क्या हुआ?
जंतर-मंतर पर पिछले महीने से कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में प्रदर्शन चल रहा है। इस आंदोलन को तब और गति मिली जब शिक्षा सुधार और पर्यावरण के मुद्दों पर काम करने वाले सोनम वांगचुक ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। उनकी हड़ताल अब 25वें दिन में पहुंच चुकी है। सोमवार को मानसून सत्र शुरू होने के साथ ही देशभर से आए छात्र नई दिल्ली में इकट्ठा हुए और संसद की ओर मार्च निकाला।
मार्च को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने हस्तक्षेप किया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर काफी नाराजगी देखने को मिली। प्रदर्शनकारी केंद्र सरकार के साथ बातचीत की मांग कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में नीट-यूजी पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी शामिल है।
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