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CAA विवाद: नसीरुद्दीन शाह बोले- डरा नहीं, आक्रोशित हूं; अनुपम खेर को बताया जोकर, चापलूस

Naseeruddin Shah on CAA, NRC, NPR, Anupam Kher, Deepika Padukone, Modi Government: नागरिकता विवाद पर उन्होंने बताया, "अगर यहां 70 साल रहने के बाद भी कोई यह साबित न कर पाए कि वह भारत का है या रहा है, तब मुझे नहीं मालूम कि क्या करना चाहिए।"

एक्टर नसीरुद्दीन फोटो- इंडियन एक्सप्रेस

Naseeruddin Shah on CAA, NRC, NPR, Anupam Kher, Deepika Padukone, Modi Government: जाने-माने बॉलीवुड ऐक्टर नसीरुद्दीन शाह ने नागरिकता विवाद के बीच चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा है कि वह न तो डरे हैं और न ही घबराएं हैं, बल्कि वह इस पूरे प्रकरण पर आक्रोशित हैं। ये बातें उन्होंने हाल ही में ‘The Wire’ को दिए इंटरव्यू में कहीं हैं। शाह ने इस दौरान CAA, NRC और NPR समेत विभिन्न मुद्दों पर खुल कर बेबाकी से अपनी राय रखी।

नागरिकता विवाद पर उन्होंने बताया, “अगर यहां 70 साल रहने के बाद भी कोई यह साबित न कर पाए कि वह भारत का है या रहा है, तब मुझे नहीं मालूम कि क्या करना चाहिए।” देश के मौजूदा हालात पर उन्होंने कहा- मैं डरा या घबराया नहीं हूं। न ही मैं चिंतित हूं। मैं बस आक्रोशित (गुस्सा) हूं।

यह पूछे जाने पर कि फिल्म जगत में विभाजनकारी राजनीति का समर्थन करने वाले हैं? इस सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि सरकार की ऐसी नीतियों का विरोध करने वालों की तुलना में ऐसे लोग कम (सपोर्ट करने वाले) ही हैं।

अक्सर बीजेपी और मोदी सरकार का समर्थन करने वाले खेर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “खेर काफी कुछ बोलते हैं। मुझे नहीं लगता है कि उन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वह एक क्लाउन (जोकर) हैं। एफटीआईआई और एनएसडी के उनके समकालीनों में से कोई भी उनके चापलूस स्वभाव की पुष्टि कर सकता है। ये चीज उनके खून में है और वह इसमें कुछ नहीं कर सकते।”

यही नहीं, चंद दिनों पहले जेएनयू (JNU) हिंसा के बाद कैंपस जाने को लेकर आलोचना झेल रहीं ऐक्ट्रेस दीपिका पादुकोण का भी उन्होंने समर्थन किया। कहा कि “आपको दीपिका जैसी लड़की के साहस की सराहना करनी चाहिए, जो शीर्ष पर है और फिर भी इस पर एक कदम उठाती है।”

नसीरुद्दीन शाह ने इंटरव्यू में देशभक्ति फिल्मों की प्रकृति पर चर्चा करते हुए कहा कि फिल्म उद्योग अभी कुछ समय के लिए मंथन कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘फिल्म उद्योग हमेशा सत्ता में बैठे लोगों की मदद करता है। मुझे वास्तव में आश्चर्य है कि इन फिल्म निर्माताओं में कितना विश्वास है, जो इतिहास को फिर से लिखने में मदद कर रहे हैं।’ इसके अलावा, नसीरुद्दीन शाह ने 70 के दशक में बनी और आज जिस तरह की फिल्में बन रही हैं, उनकी तुलना की।

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उन्होंने आगे कहा कि “मसान, गली बॉय या अनुराग (कश्यप) जैसी फिल्में नहीं बनती, अगर 70 के दशक के निर्देशकों ने आज काम करने वाले युवा निर्माताओं के लिए रास्ता नहीं बनाया होता। कला के लिहाज से, आज की बनी सस्ती फिल्में 70 के दशक में हमारे द्वारा बनाई गई फिल्मों से कहीं बेहतर हैं। हालांकि, नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध ने राष्ट्र के सभी स्वतंत्र विचार वाले लोगों को एकजुट किया है।

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