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मौत मुबारक हो, कभी वापस मत आना- मीना कुमारी के निधन पर बोल पड़ी थीं नरगिस, जानें क्या थी वजह

मीना कुमारी के निधन पर बॉलीवुड एक्ट्रेस नरगिस दत्त ने उन्हें अंतिम विदाई देते हुए कहा था कि मौत मुबारक हो, फिर कभी इस दुनिया में वापस मत आना।

मीना कुमारी के निधन पर नरगिस ने लिखा था आर्टिकल (फोटो सोर्स- एक्सप्रेस फोटो)

बॉलीवुड की मशहूर एकट्रेस मीना कुमारी ने अपनी एक्टिंग से फिल्मी दुनिया में जबरदस्त पहचान बनाई थी। अपने करियर के दौरान मीना कुमारी ने करीब 92 फिल्मों में काम किया था। फिल्मों में उनके अंदाज को लेकर आम लोग तो उनके फैन थे ही, साथ ही कई बॉलीवुड सितारे भी उनके दीवाने थे। लेकिन मीना कुमारी करियर में जितनी ऊंचाइयों पर थीं, असल जिंदगी में वह उतनी ही मुसीबतों से घिरी हुई थीं। 31 मार्च, साल 1972 को मीना कुमारी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। वहीं, उनके निधन पर बॉलीवुड एक्ट्रेस नरगिस दत्त ने उन्हें अंतिम विदाई देते हुए कहा था कि मौत मुबारक हो, फिर कभी इस दुनिया में वापस मत आना।

दरअसल, नरगिस दत्त ने मीना कुमारी के निधन के बाद एक आर्टिकल लिखा था, जो कि उर्दू भाषा में प्रकाशित हुआ था। उन्होंने अपने आर्टिकल में बताया था कि मीना कुमारी असल जिंदगी में किन परिस्थितियों से गुजरी हैं। उनकी जिंदगी से जुड़ी बातों को बताते हुए नरगिस ने मीना कुमारी को इस दुनिया में दोबारा न आने की सलाह दी थी।

नरगिस दत्त ने मीना कुमारी के लिए आर्टिकल में लिखा, “मीना, आज आपकी बाजी आपको आपके निधन पर बधाई देती है और यह सलाह भी देती है कि कृप्या इस दुनिया में दोबारा कदम मत रखना। यह दुनिया आप जैसे लोगों के लिए नहीं बनी है।” अपने लेख में नरगिस ने मीना कुमारी से हुई दोस्ती का किस्सा भी साझा किया।

नरगिस ने लिखा, “मैं चुप रहूंगी’ की शूटिंग के दौरान मेरे पति सुनील दत्त ने मुझे बच्चों के साथ सेट पर बुलाया था। उस वक्त ही मैं और मीना काफी अच्छे दोस्त बन गए थे। जब भी मैं दत्त साहब के साथ डिनर या किसी और काम के लिए बाहर जाती तो मीना, संजय और नम्रता का ख्याल रखतीं और उनके कपड़े बदला करती थीं।”

नरगिस ने अपने लेख में इस बात का भी खुलासा किया कि उन्होंने मीना के कमरे से मार-पीट की आवाजें सुनी थीं। उन्होंने इस बारे में आगे लिखा, “एक रात मैंने देखा कि मीना गार्डन में बैठकर बहुत हाफ रही थी। ऐसे में मैंने उन्हें कहा कि आप आराम क्यों नहीं करती हैं, आप बहुत थकी हुई लग रही हैं। इसपर मीना ने कहा कि बाजी आराम करना मेरे नसीब में नहीं है।”

नरगिस ने अपने लेख में आगे बताया, “उस रात उनके कमरे से मारपीट की आवाजें आ रही थीं। अगले दिन मैंने देखा कि मीना की आंखें सूजी हुई थीं। ऐसे में मैंने गुस्से में आकर कमाल अमरोही के सेक्रेटरी को पकड़ लिया और कहा कि आप लोग मीना को मारना क्यों चाहते हो? उन्होंने आप लोगों की खातिर बहुत काम किया है।” नरगिस ने अपने लेख में बताया था कि मीना कुमारी इस बात से काफी परेशान थीं कि कमाल अमरोही के सेक्रेटरी ने उनपर हाथ उठाया। इसके बाद भी कमल अमरोही ने अपने सचिव को कुछ नहीं कहा था।

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