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मोदी और शरीफ ही कम कर सकते हैं दूरी: ओम पुरी

बालीवुड के दिग्गज कलाकार ओमपुरी ने कहा है कि केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाना तय कर सकते हैं..

Author लाहौर | December 20, 2015 1:41 AM
फिल्म फेस्टिवल में भाग लेकर पाकिस्तान से अटारी वाघा बॉर्डर से शनिवार को वापस लौटते ओम पुरी।

बालीवुड के दिग्गज कलाकार ओमपुरी ने कहा है कि केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाना तय कर सकते हैं। रफी पीर थिएटर वर्कशॉप की तरफ से आयोजित समारोह में शिरकत करने के लिए पुरी यहां तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान की सरकारों को कट्टरपंथियों से भयभीत नहीं होना चाहिए। पुरी ने अलहमरा आर्ट सेंटर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में शुक्रवार को कहा, ‘पाकिस्तान और भारत की तरफ दो ताले हैं और इन तालों की चाबी नवाज शरीफ और मोदी के हाथ में है। इन्हें खोलने से दोनों तरफ के लोगों को एक-दूसरे से बातचीत करने का मौका मिलेगा’। 65 साल के अभिनेता ने कहा, ‘भारत में 80 से 90 फीसद लोग धर्मनिरपेक्ष हैं और पाकिस्तानियों के खिलाफ उनमें कोई गुस्सा नहीं है’। पुरी ने कहा कि जो भारतीय पाकिस्तान को चरमपंथी देश के तौर पर देखते हैं उनसे अक्सर मैं तर्क करता हूं कि अगर ऐसा है तो फिर पाकिस्तान में मस्जिदों और स्कूलों पर बम से हमले क्यों होते हैं।

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उन्होंने कहा, ‘मैं उन सभी भ्रमित लोगों से अपील करता हूं कि घृणा के मार्ग को छोड़ें। अल्लाह ने निर्दोष लोगों की हत्या के खिलाफ चेतावनी दी है, मानव होकर ऐसे लोग जानवरों की तरह व्यवहार क्यों करते हैं’। सिनेमा में विविध तरह की भूमिका निभाने और कई पुरस्कार जीतने वाले पुरी ने कहा कि उन्हें पाकिस्तान में इतना प्यार और सम्मान मिला है कि वे यहां हर साल आना चाहते हैं। अपने बचपन की यादों और संघर्ष को याद करते हुए पुरी ने कहा कि वे छह साल के थे जब रेलवे के कर्मचारी उनके पिता को रेलवे स्टोर में सीमेंट चोरी के आरोप में जेल में बंद कर दिया गया।

उन्होंने कहा, ‘हमें रेलवे क्वार्टर को खाली करना पड़ा और मेरी मां ने किराए पर कमरा लिया। उसने मेरे बड़े भाई को कुली के रूप में काम करने के लिए रेलवे स्टेशन भेजा और मैं चाय की दुकान पर लोगों को चाय पिलाता था’। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, ‘अगर मेरे पास चाय की दुकान होती तो मैं भारत का प्रधानमंत्री बन गया होता’।

पुरी ने दर्शकों को बताया कि उनकी पहली फिल्म ‘चोर चोर छुप जा’ थी। पुरी ने नसीरुद्दीन शाह के साथ अपनी मित्रता की भी चर्चा की जिनसे उनकी मुलाकात नेशनल स्कूल आॅफ ड्रामा में हुई थी। उन्होंने दर्शकों को बताया कि उस समय की मशहूर थिएटर अदाकारा और निर्देशक नीलम मान सिंह ने तंगी के समय फिल्म संस्थान में प्रवेश लेने में उनका सहयोग किया। पुरी ने ‘एक्टर्स स्टूडियो’ में अपनी नौकरी के बारे में बताया जहां वे बोलने की कला के बारे में पढ़ाते थे और उनके शिष्यों में अनिल कपूर, गुलशन ग्रोवर और अन्य मशहूर भारतीय कलाकार थे।

उन्होंने कहा, ‘मैं मुख्य धारा की सिनेमा का हिस्सा बनने के लिए संघर्ष कर रहा था तब नसीरुद्दीन शाह मुझे लेकर श्याम बेनेगल के पास गए और मैंने नाटक और पंजाबी सिनेमा भी किया। लोग मेरी पंजाबी फिल्म चान परदेशी और लौंग दा लश्कारा को अब भी याद करते हैं। मुझे 1981 में फिल्म आक्रोश से पहचान मिली जिसके लिए मुझे दस हजार रुपए मेहनताना मिला था’। व्यावसायिक और कला सिनेमा के बाद पश्चिमी सिनेमा का हिस्सा बनने के अनुभव के बारे में उन्होंने कहा कि ‘सिटी आॅफ ज्वॉय’ का अनुभव अच्छा रहा और फिल्म में एक विशेष भूमिका के लिए उन्होंने रिक्शा चलाना सीखा।

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