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Narayan Movie Review: बेटे के लिए मुक्केबाजी

इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें कोई स्टार कलाकार नहीं है, लेकिन इसके बावजूद यह दर्शकों को बांधे रखने में सफल रहती है।

Author November 4, 2017 2:14 AM

इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें कोई स्टार कलाकार नहीं है, लेकिन इसके बावजूद यह दर्शकों को बांधे रखने में सफल रहती है। इसकी कहानी के दो तत्त्व हैं- एक तो बाप-बेटे का रिश्ता, जिसमें बाप अपने बेटे के लिए जिंदगी की बाजी लगा देता है। और दूसरा बॉक्सिंग यानी मुक्केबाजी।
फिल्म नारायण (जोगेश सहदेवा) नाम के एक शख्स के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड का काम करता है। बचपन में नारायण को बॉक्सिंग से लगाव था, लेकिन अपने पिता की वजह से उसे ये शौक छोड़ना पड़ा। नारायण अब सिर्फ सामान्य जीवन गुजार रहा है। उसकी जिंदगी अपनी पत्नी और बेटे के चारों तरफ घूमती है।

लेकिन बेटा कबीर अपने स्कूली दिनों मे एक गिरोह के जाल में फंस जाता है जिसका सरगना राणा (राहुल अमथ) है।
राणा के कब्जे से अपने बेटे को निकलने के लिए नारायण को ऐसी बॉक्सिंग प्रतियोगिता जीतनी है, जिसे अंडरवर्ल्ड के लोग चलाते हैं। राणा अपनी चालें चलता जाता है और नारायण उसमें फंसता जाता है। क्या नारायण यह प्रतियोगिता जीत कर अपने बच्चे को छुड़ा पाएगा और एक सामान्य जिंदगी जी पाएगा? फिल्म में कुछ ऐसी चीजें हैं जो इसे चुस्त बनाती हैं। एक तो आगे क्या होगा वाला रोमांच इसमें बना रहता है। दूसरा, इसकी कहानी का भावनात्मक पक्ष जिसमें एक छोटे से परिवार के लोग एक चक्रव्यूह में फंस गए हैं।

निर्देशक और मुख्य अभिनेता दोनों एक हैं- जोगेश सहदेवा। फिल्म के दूसरे हिस्से में जोगेश का काम अधिक निखरता है। पर पहले हिस्से में खलनायक की भूमिका में राहुल अमथ का व्यक्तित्व बेहतर ढंग से सामने आया है। राणा का चरित्र एक ऐसे खलनायक का है, जो शांत रहता है लेकिन साथ ही वह बेहद निर्दयी है। वह चाल पर चाल चलता रहता है। इस फिल्म के ज्यादातर किरदार दिल्ली रंगमंच से जुड़े रहे हैं इसलिए स्टार न होने के बावजूद उनके अभिनय में ताजगी है। वे आसपास के लोग लगते हैं, परिचित से।

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