नदिया के पार की मासूम प्रेम कहानी जितनी सुकून देने वाली लगती है, उसकी मूल कहानी उतनी ही मार्मिक और दर्द से भरी है। बहुत कम लोग जानते हैं कि यह फिल्म मशहूर साहित्यकार केशव प्रसाद मिश्र के उपन्यास कोहबर की शर्त पर आधारित है, लेकिन फिल्म का अंत उपन्यास से बिल्कुल अलग है।
फिल्म में दिखी खुशहाल प्रेम कहानी
गांव की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म में गुंजा (साधना सिंह) और चन्दन (सचिन पिलगांवकर) की प्रेम कहानी दिखाई गई है। कहानी में ओमकार की शादी रूपा से होती है, लेकिन रूपा की मृत्यु बच्चा होने के कुछ दिनों बाद हो जाती है। घरवालों को बच्चे की देखभाल की चिंता होती है, इसलिए गुंजा का रिश्ता ओमकार से तय कर दिया जाता है।
हालांकि शादी के दिन सच सामने आता है कि गुंजा और चन्दन एक-दूसरे से प्रेम करते हैं। ओमकार बड़ा दिल दिखाते हुए शादी तोड़ देता है और गुंजा-चन्दन का मिलन हो जाता है। फिल्म यहीं एक सुखद मोड़ पर खत्म होती है।
मगर असली कहानी में नहीं है हैप्पी एंडिंग
उपन्यास कोहबर की शर्त चार खंडों में लिखा गया है, जबकि फिल्म केवल शुरुआती दो खंडों पर आधारित है। मूल कहानी में गुंजा की शादी सचमुच ओमकार से हो जाती है और वह चन्दन की भाभी बनकर घर आती है।
कुछ समय बाद गांव में चेचक की महामारी फैलती है और ओमकार की मृत्यु हो जाती है। गुंजा मायके चली जाती है। बाद में वह लौटकर चन्दन से विवाह का प्रस्ताव रखती है, लेकिन चन्दन इंकार कर देता है।
दिल टूटने और बीमारी के कारण बाद में गुंजा की भी मृत्यु हो जाती है। चन्दन उसकी चिता के सामने खड़ा होकर बिखर जाता है। उपन्यास का अंत बेहद त्रासद है जहां प्रेम मिलन नहीं, बल्कि बिछड़ने का दुख और पश्चाताप छोड़ जाता है।
लेखक ने पहले नहीं दी थी इजाजत
फिल्म निर्माता ताराचंद बड़जात्या ने जब इस उपन्यास पर फिल्म बनाने की इच्छा जताई, तो लेखक केशव प्रसाद मिश्र ने शुरुआत में अनुमति देने से इंकार कर दिया था। उनका मानना था कि रचना लेखक के लिए संतान समान होती है और उसे बिना संवेदना के बदला नहीं जाना चाहिए।
बाद में आश्वासन मिलने पर उन्होंने सहमति दी, लेकिन फिल्मकारों ने दर्शकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए कहानी का क्लाइमैक्स बदल दिया।
बॉक्स ऑफिस पर रचा इतिहास
1982 में रिलीज हुई नदिया के पार ने करीब 5.4 करोड़ रुपये की कमाई की थी और अपने बजट से लगभग 30 गुना ज्यादा कलेक्शन किया। ग्रामीण परिवेश, सादगी और पारिवारिक मूल्यों ने इसे दर्शकों का चहेता बना दिया।
इसी कहानी को आधुनिक रूप देकर हम आपके हैं कौन..! बनाया गया, जिसे सूरज बड़जात्या ने निर्देशित किया। सलमान खान और माधुरी दीक्षित स्टारर इस फिल्म ने 128 करोड़ रुपये की ऐतिहासिक कमाई की और पारिवारिक सिनेमा का नया दौर शुरू किया।
घर-घर में बस गई थी गुंजा
फिल्म में गुंजा का किरदार निभाने वाली साधना सिंह उस दौर में इतनी लोकप्रिय हुईं कि लोग अपनी बेटियों का नाम ‘गुंजा’ रखने लगे। आज उनका लुक भले बदल चुका हो, लेकिन ‘नदिया के पार’ की गुंजा आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा है।
जहां फिल्म ने दर्शकों को सुखद अंत देकर मुस्कुराने का मौका दिया, वहीं मूल उपन्यास सामाज की कड़वी सच्चाई दिखाता है।
