फिल्मों में बेहतरीन जोड़ी के तौर पर पहचान बनाने वाले राजेश खन्ना और मुमताज का रिश्ता सिर्फ पर्दे तक सीमित नहीं था, बल्कि निजी जिंदगी में भी दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी। उनका जुड़ाव इतना खास था कि वे अक्सर मिलते-जुलते रहते थे। हाल ही में मुमताज ने खुलासा किया कि खन्ना उनके पति बिजनेसमैन मयूर माधवानी को भी अपने परिवार की तरह ही मानते थे।

मुमताज ने हाल ही में विक्की लालवानी के साथ खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने राजेश खन्ना के आशीर्वाद बंगले के बारे में भी बात की। यह वही जगह थी जिसे खन्ना के निधन (2012) के बाद बेच दिया गया। मुमताज ने बताया कि इस घर में उन्होंने खन्ना और उनकी पूर्व साथी, एक्ट्रेस-डिजाइनर अंजू महेंद्रू के साथ कई यादगार पल बिताए थे। उन्होंने अफसोस जताया कि आखिर क्यों परिवार ने इस खास प्रॉपर्टी को बेचने का फैसला लिया, यह बात आज भी उन्हें समझ नहीं आती।

‘आशीर्वाद का टूटना मुझे दुख देता है’

जब उनसे आशीर्वाद के टूटने पर सवाल किया गया, तो मुमताज ने कहा, “बिल्कुल दुख हुआ। आज भी जब मैं उस बिल्डिंग को देखती हूं, तो कहती हूं ‘ये मेरे हीरो का घर था।’ मैं बहुत भावुक इंसान हूं। मैं अंजू और काका के बहुत करीब थी। वे मयूर का भी बहुत ख्याल रखते थे। काका और अंजू हमें बड़े प्यार से खिलाते-पिलाते थे। लेकिन जिंदगी में ऐसा होता रहता है।”

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जब उनसे कहा गया कि खन्ना चाहते थे कि इस बंगले को म्यूजियम बनाया जाए, तो मुमताज ने जवाब दिया, “उनके जाने के बाद मुझे नहीं पता कि अक्षय कुमार जी ने इसे क्यों बेच दिया। मैंने सुना है कुछ अंदरूनी मसले थे, लेकिन मुझे इसकी पूरी जानकारी नहीं है। जब सच्चाई नहीं पता हो, तो टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।”

मुमताज ने याद करते हुए बताया, “मेरी बहन मलिका का घर, जो कार्टर रोड पर है, कभी मीना कुमारी का था। वो राजेश खन्ना के बंगले के बहुत करीब था। मैं वहां अक्सर जाती थी और इसलिए आशीर्वाद भी अक्सर जाना होता था। जब अंजू उनके साथ थीं, तो वे मुझे बुलाती थीं और साथ बैठाती थीं। मेरी सगाई के बाद मैं मायूर को भी वहां लेकर जाती थी। फिल्म इंडस्ट्री के लोग बहुत बड़े दिल वाले होते हैं।”

राजेश खन्ना और मुमताज ने ‘दो रास्ते’, ‘बंधन’, ‘प्रेम कहानी’, ‘आप की कसम’, ‘सच्चा झूठा’ और ‘अपना देश’ जैसी फिल्मों में काम किया। आशीर्वाद बंगले की कहानी दिलचस्प बात यह है कि खन्ना ने यह बंगला राजेश से लगभग 3.5 लाख रुपये में खरीदा था, जबकि कुमार ने इसे कई साल पहले सिर्फ 65,000 रुपये में खरीदा था। कहा जाता है कि इस बंगले में रहने के बाद कुमार का करियर भी बुलंदियों पर पहुंचा।

खन्ना इस बंगले का नाम अपनी पत्नी डिंपल कपाड़िया के नाम पर डिंपल रखना चाहते थे, लेकिन राजेंद्र कुमार ने उनसे दूसरा नाम रखने का अनुरोध किया, क्योंकि उनकी बेटी का नाम भी डिंपल था और उनका घर भी इसी नाम से जाना जाता था। इस तरह इस बंगले का नाम “आशीर्वाद” पड़ा।

लेखक गौतम चिंतामणि ने अपनी किताब ‘डार्क स्टार: लोनलीनेस ऑफ राजेश खन्ना’ में लिखा है कि खन्ना के ‘दरबार’ में निर्माता घंटों इंतजार करते थे। वे अक्सर सिल्क लुंगी-कुर्ता पहनकर आते और ऊंची कुर्सी पर बैठते, जिससे उनकी अलग पहचान बनती। अंदर देर रात तक महफिलें चलतीं, जहां उनकी खूब तारीफ होती। खन्ना के निधन के बाद यह बंगला कथित तौर पर 90 करोड़ रुपये में एक बिजनेसमैन को बेच दिया गया, और अब वहां एक ऊंची इमारत खड़ी है।