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जब महाभारत के ‘शकुनि’ को ट्रेन में सीट देने से कर दिया गया था इंकार, मुकेश खन्ना ने सुनाया दिलचस्प किस्सा

मुकेश खन्ना ने बताया कि गुफी पेंटल को उनके 'शकुनी मामा' के किरदार के कारण एक बंगाली कपल ने ट्रेन में सीट देने से इंकार कर दिया था।

mahabharat cast, mukesh khanna as bhishm pitamah, gufi paintalगुफी पेंटल को लेकर मुकेश खन्ना ने सुनाया एक दिलचस्प किस्सा

बी. आर. चोपड़ा द्वारा निर्मित एपिक धारावाहिक ‘महाभारत’ के सभी कलाकार बेहद लोकप्रिय हुए और आज भी लोग उनमें महाभारतकालीन महापुरुषों की छवि देखते हैं। लोगों में उनके बारे में जानने की उत्कंठा बनी रहती है। महाभारत में भीष्म पितामह का किरदार निभा चुके मुकेश खन्ना भी एक ऐसे ही किरदार हैं। अपने यूट्यूब चैनल ‘भीष्म इंटरनेशनल’ पर उन्होंने एक वीडियो के ज़रिए महाभारत के ‘शकुनि मामा’ यानि गुफी पेंटल से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि एक बंगाली कपल ने ट्रेन में उन दोनों को सीट देने को लेकर कहा कि हम ‘पितामह’ को तो बिठाएंगे, लेकिन ‘शकुनि मामा’ को नहीं बिठाएंगे।

मुकेश खन्ना ने पूरा किस्सा सुनाया, ‘इलाहाबाद के पास एक जगह है, सतना, वहां हर साल बहुत बड़े लेवल पर कवि सम्मेलन होता है। वहां के बड़े उद्योगपतियों ने महाभारत के टॉप लिस्ट के कलाकार शकुनि मामा और मुझे बुलाया। कवि सम्मेलन ख़त्म हुआ और हमें इलाहाबाद एयरपोर्ट पर छोड़ने की बात हुई, जहां पहुंचने के लिए हमें 2 घंटे की ड्राइव करनी थी। उन्होंने हमें छोड़ने के लिए 3 गाड़ी दी, एक गाड़ी हमारे आगे, एक पीछे। मैंने पूछा ये क्या है तो उनके मैनेजर ने बताया कि हमारे बॉस ने कहा है कि कोई भी गड़बड़ नहीं होनी चाहिए, इनको एयरपोर्ट पर गाड़ी पकड़वानी है।’

मुकेश खन्ना ने आगे बताया कि इतना कुछ ऑर्गनाइज करने के बाद भी कुछ ऐसा हुआ कि उन्हें भी हंसी आ गई। उन्होंने बताया, ‘हम जब पहुंचे इलाहाबाद के पास तो हमें लगा कि हम थोड़ा जल्दी पहुंच गए। मैंने गुफी से कहा कि किसी रेस्टोरेंट में चाय पी लेते हैं। जब वक़्त हो गया प्लेन का तब हम जल्दी से वहां से निकले। जब हम पहुंचे तो पता लगा कि ड्राइवर ने हमें एयरफोर्स के एयरपोर्ट पर पहुंचा दिया है। उसने कहा कि लगता है मैं कुछ आगे आ गया हूं। उसके बाद हम जब एयरपोर्ट पहुंचे तब वहां के ऑफिसर्स ने कहा कि अब तो प्लेन रेडी हो गया है, आप बहुत लेट हैं।’

 

मुकेश खन्ना ने आगे बताया, ‘हम फिर उनके साथ उनके ब्रांच ऑफिस आए, शाम के 3 बज चुके थे, फिर किसी ने कहा कि लखनऊ से 8 बजे फ्लाइट है। जब हम वहां पहुंचे तो प्लेन हमारे सामने उड़ती हुई दिखी। फिर किसी ने कहा कि लखनऊ से 10 बजे दिल्ली के लिए ट्रेन जाती है। तो हमने कहा चलो डूबते को तिनके का सहारा।’

मुकेश खन्ना ने आगे बताया, ‘हमारे पास टिकट नहीं था, हमने टीसी को बुलाया तो वो कहने लगा कि पूरी ट्रेन आपकी है। उसने कहा कि एसी कोच में जगह है। वो हमें कुपे में ले आए और कहानियां शुरू कर दी कि सर आप दोनों ने कितना अच्छा काम किया है। मैंने उनसे कहा कि सीट तो दो। वो पूरा कुपे सिस्टम था फिर टीसी ने कहा कि उधर लास्ट कुपे में एक बंगाली कपल है, साथ में बच्चे भी हैं उनके। हमने उनसे रिक्वेस्ट किया तो उन्होंने कहा कि हम ‘पितामह’ को तो बिठाएंगे लेकिन ‘शकुनि मामा’ को नहीं बिठाएंगे। मैने गुफी से कहा कि देख तेरी क्या इमेज है। मुझे जगह मिल गई, स्टेशन पर उतरकर गुफी से पूछा तो उसने कहा कि उसे भी जगह मिल गई थी।’

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