वंदे मातरम को लेकर चल रही बहस के बीच अभिनेता मुकेश खन्ना ने अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के कथित बयान पर नाराजगी जताई है। शर्मिला टैगोर ने कथित तौर पर कहा था कि देश की धार्मिक विविधता को देखते हुए वंदे मातरम के शुरुआती छंद ही गाए जाने चाहिए। इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मुकेश खन्ना ने उनके विचारों पर सवाल उठाए।
द फ्री प्रेस जर्नल से बातचीत में मुकेश खन्ना ने शर्मिला टैगोर की शादी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शादी के बाद शर्मिला टैगोर आयशा बेगम बनीं और अब वह दूसरे धर्म के लोगों की भावनाओं की चिंता कर रही हैं।
मुकेश ने कहा, “आप शादी के लिए आयशा बेगम बनीं, लेकिन आज आप आयशा बेगम के तौर पर बोल रही हैं।” उन्होंने सवाल किया कि क्या शर्मिला को शादी के बाद ही पता चला कि इस्लाम भी एक अलग धर्म है। उन्होंने यह भी कहा कि शर्मिला बंगाल में पली-बढ़ी हैं, जहां हिंदू संस्कृति और परंपराओं का गहरा प्रभाव है।
मुकेश खन्ना ने हिंदू धर्म को लेकर भी रखी अपनी बात
मुकेश खन्ना ने इस दौरान हिंदू धर्म में देवी-देवताओं को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में 33 करोड़ देवी-देवताओं की बात होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि 33 करोड़ अलग-अलग भगवान हैं। उनके मुताबिक भगवान निराकार हैं और भक्त उन्हें अपनी आस्था के अनुसार राम, कृष्ण, शिव या हनुमान के रूप में देख सकता है।
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वंदे मातरम पर क्या बोले मुकेश खन्ना?
वंदे मातरम विवाद पर मुकेश खन्ना ने कहा कि इसे लेकर आपत्ति सिर्फ गीत में देवी-देवताओं के जिक्र को लेकर नहीं रही है। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोगों की आपत्ति इस बात पर भी रही है कि वे भगवान के अलावा किसी और के सामने नहीं झुक सकते।
मुकेश ने एआर रहमान के गाने ‘मां तुझे सलाम’ का उदाहरण देते हुए कहा कि इसमें भी देश को मां मानकर उसे सलाम किया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी को जबरदस्ती झुकने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
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उनका कहना था कि अगर कोई भारत माता के सामने नहीं झुकना चाहता तो उसे मजबूर नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन वंदे मातरम गाने पर ही आपत्ति जताना उन्हें समझ नहीं आता।
मुकेश खन्ना ने इस विवाद को राजनीति से भी जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग मुस्लिम वोट पाने के लिए तुष्टीकरण की राजनीति कर रहे हैं। उनके मुताबिक, देश के राष्ट्रीय गीत और प्रतीकों का सम्मान होना चाहिए और इसके लिए किसी को खुश करने की जरूरत नहीं है।
