बड़े शौक से पाकिस्तान से तिल्ले वाली जूती लाए थे मोहम्मद रफी, फिर भी रिकॉर्डिंग स्टूडियो से लौटे नंगे पांव; ये थी वजह

मोहम्मद रफी के गानों ने तो कई लोगों के दिलों को छुआ ही था, वहीं उनकी जीवनशैली से भी लोग बहुत प्रभावित थे।

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लेजेंड मोहम्मद रफी साहब (फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस)

हिंदी सिनेमा में मोहम्मद रफी एक ऐसा नाम है जिसका चार्म आज भी बरकरार है। आज की जनरेशन की फेवरेट म्यूजिक प्ले लिस्ट में भी मोहम्मद रफी का नाम सबसे ऊपर आता है। अपनी गायकी से सबके दिल को छू लेने वाले मोहम्मद रफी साहब एक दिलदार शख्सियत थे। मोहम्मद रफी से जुड़ा एक किस्सा एक्टर जोगिंदर शैली ने बताया था। एक बार जोगिंदर शैली मेहबूब स्टूडियो में गाने की रिकॉर्डिंग पर मौजूद थे। तभी वहां मोहम्मद रफी भी आ गए। वहीं उनकी दिलदारी का एक नायाब उदाहरण देखने को मिला था।

इस किस्से को बयां करते हुए जोगिंदर शैली ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था- ‘एक बार मोहम्मद रफी साहब पाकिस्तान से लौटे तो साथ तिल्ले वाली जूती लाए। वह बड़े शैक से वो तिल्ले वाली जूतियां खरीद कर वहां से लाए थे। वो जूतियां पहन कर वह एक बार मेहबूब स्टूडियो आए, वहां हमारे एक गाने की रिकॉर्डिंग चल रही थी। तो मैंने कहा- ‘क्या जूती डाली है सर आपने।’ वो कहने लगे- ‘आपको पसंद है!’ मैंने भी कहा- ‘हां जी, बहुत पसंद है।’ वो बोले अच्छा-अच्छा।’

एक्टर ने आगे बताया था- ‘इसके बाद वो अपना काम खत्म कर वापस जाने लगे, तो मैं उन्हें छोड़ने नीचे तक गया। वो गाड़ी में बैठ गए। देखिए सर, इंसान चला जाता है अपनी यादें छोड़ कर चला जाता है, ऐसे लोग मिलेंगे? जब गाड़ी थोड़ी सी दूर गई, तो उन्होंने अपनी कार का दरवाजा खोला और बाहर निकल कर बोले जोगिंदर जी नीचे देखिए। तिल्ले की जूती पड़ी हुई थी सर। खुद नंगे पांव चले गए औऱ तिल्ले वाली जूती मेरे पास छोड़े गए। वो जूती आज भी मेरे पास पड़ी हुई है। ऐसे आर्टिस्ट कहां मिलते हैं।’

मोहम्मद रफी के गानों ने तो कई लोगों के दिलों को छुआ ही था, वहीं उनकी जीवनशैली से भी लोग बहुत प्रभावित थे। बताते चलें, जब मोहम्मद साहब का इंतकाल हुआ था, उस वक्त तेज बारिश हो रही थी, बावजूद इसके हजारों की संख्या में लोगों का हुजूम मोहम्मद रफी के जनाजे में इकट्ठा हो गया था। मोहम्मद साहब के निधन की खबर पूरे शहर में आग की तरह फैल गई थी।

मोहम्मद साहब एक ऐसे शख्स थे, जिन्हें हर वर्ग, हर मजहब का व्यक्ति चाहता था। क्या सिख, क्या मुस्लिम क्या, क्या हिंदू उनकी अंतिम यात्रा में मोहम्मद साहब को कांधा देने के लिए हर व्यक्ति शामिल हुआ। यह खबर सुनते ही हर कोई बांद्रा की मस्जिद की तरफ जल्दी में दौड़कर जा रहा था। उस समय मोहम्मद साहब के जनाजे में करीब 10,000 से ज्यादा लोग शामिल हुए थे।

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