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हमारी याद आएगीः तीन दशक तक अमीर, डेढ़ दशक तक गरीब

पंजाब के रायविंड से 20 साल की खुर्शीद जहां अपनी बहन के पास मुंबई घूमने गईं।

मीना शौरी

मीना शौरी (17 नवंबर, 1921- 9 फरवरी, 1989)
सन 1949 में लता मंगेशकर की आवाज में जब ‘लारा लप्पा लारा लप्पा’ गाना गूंजा, तो देश भर में उसे गुनगुनाया जाने लगा। गाने की शोहरत पाकिस्तान में भी एक समान थी। पार्टियों, शादियों, कॉलेज के समारोहों में युवा वर्ग समूह में तालियां बजाते हुए इस गाने पर कदमताल कर रहा था। इस गाने के साथ ही अभिनेत्री मीना शौरी उर्फ खुर्शीद जहां सफलता के सातवें आसमान पर पहुंच गई थीं।

पंजाब के रायविंड से 20 साल की खुर्शीद जहां अपनी बहन के पास मुंबई घूमने गईं। उनके जीजा उन्हें एक फिल्म के मुहूर्त में ले गए। यह मुहूर्त था सोहराब मोदी की फिल्म ‘सिकंदर’ का। मुहूर्त के दौरान सोहराब मोदी को खुर्शीद भा गई और उन्होंने ‘सिकंदर’ में तक्षशिला नरेश की बहन आंबी की भूमिका सौंप दी। खुर्शीद को नया नाम भी दिया मीना। साथ ही एक अनुबंध भी साइन करवाया। यह 1941 की बात है।

‘सिकंदर’ सफल हुई तो मीना को रूप के शौरी ने ‘शालीमार’ (46) और महबूब खान ने ‘हुमायूं’ (45) में काम करने का प्रस्ताव दिया। दलसुख पंचोली ने भी अपनी दो फिल्मों में मीना को लिया। गरीबी से जूझने वाली खुर्शीद के परिवार के अच्छे दिन आ गए। अचानक मीना को एक नोटिस मिला। सोहराब मोदी के भिजवाए इस नोटिस में लिखा था कि मीना ने उनके साथ तीन फिल्मों का अनुबंध साइन किया है। वह तब तक कोई दूसरी फिल्म साइन नहीं कर सकतीं। चूंकि मीना ने अनुबंध का उल्लंघन किया है लिहाजा हर्जाने के तौर पर तीन लाख रुपए चुकाएं। मीना के पैरों से जमीन निकल गई क्योंकि उन्होंने तो एक फिल्म का अनुबंध साइन किया था, तीन फिल्मों का नहीं। उन्होंने मोदी पर आरोप लगाया कि उनके साथ धोखा हुआ है।

जब अच्छा भला चलता कॅरियर ठहरने लगा, तो मीना ने मोदी से मिन्नतें की। मोदी भी नरम पड़े और हर्जाने की रकम 60 हजार कर दी गई। मगर यह भी मोटी रकम थी। आखिर मीना ने मोदी की पत्नी महताब से मुलाकात की। महताब ने समझौता करवाया। तीन लाख मांगने वाले मोदी ने आखिर 30 हजार लेकर मीना को अनुबंध से आजाद कर दिया। इस बीच मीना ने तीन निकाह कर डाले। पहले निर्माता, निर्देशक, अभिनेता जहूर राजा से। फिर अभिनेता अल नासिर से और आखिर में रूप के शौरी से।

उधर भारत-पाक विभाजन के कारण लाहौर में रूप के शौरी का धंधा ठप पड़ गया तो वह अपनी अधूरी पंजाबी फिल्म ‘चमन’ (48) लेकर मुंबई आ गए। यहां मीना के पैसों से ‘चमन’ पूरी की और एक नई फिल्म ‘एक थी लड़की’ (1949) की घोषणा कर दी। इस फिल्म में मोतीलाल और मीना की जोड़ी थी। संगीतकार विनोद का बनाया गाना ‘लारा लप्पा लारा लप्पा लाई रखुदा, आडीडप्पा आडीडप्पा लाई रखुदा…’ सुपर डुपर हिट हुआ और देखते-ही- ॉदेखते मीना युवा दिलों की धड़कन बन गई।

लाहौर में मीना की लोकप्रियता को देखते हुए 1956 में एक पाकिस्तानी निर्माता जेसी आनंद ने शौरी और मीना को एक फिल्म ‘मिस 56’ बनाने के लिए आमंत्रित किया। फिल्म पूरी करने के बाद शौरी तो भारत लौट आए, मगर मीना नहीं लौटीं क्योंकि उन्हें वहां लक्स का विज्ञापन मिल गया था। पाकिस्तान की पहली लक्स गर्ल बनने वाली लारा लप्पा गर्ल पाकिस्तान में ही रह गई। बताते हैं कि वहां उन्होंने रजा मीर और असद बुखारी से निकाह किया। इस तरह मीना के पांच पति हो गए।

पाक में मीना ने जिन 29 फिल्मों में काम किया उनमें से 11 में वे हीरोइन थीं। मगर सफलता आसमान में उड़ने वाली पतंग की तरह होती है, जिसे जमीन पर आना ही होता है। लिहाजा 1974-75 से डेढ़ दशक तक आर्थिक संकटों का सामना करने के बाद 9 फरवरी 1989 को मीना ने पाकिस्तान में अंतिम सांस ली। गुरबत से उठी खुर्शीद ने मीना बनकर ग्लैमर की चकाचौंध में लगभग तीन दशक गुजारे मगर जब इंतकाल फरमाया तो पांच में एक भी पति उनके पास नहीं था। चंदा करके मीना को सुपुर्दे खाक किया गया था।

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