साल 1972 में कमाल अमरोही ने मीना कुमारी के साथ एक फिल्म बनाई , जिसका नाम था ‘पाकीजा’। अब करीब 54 साल बाद इस फिल्म को एक बार फिर अलग अंदाज में रिलीज किया जाएगा।
फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन के मार्गदर्शन में दो साल तक फिल्म ‘पाकीजा’ की मरम्मत और उसे बेहतर बनाने का काम किया गया। अब फिल्म के नए और बहाल किए गए एडिशन की पहली स्क्रीनिंग अक्टूबर में फ्रांस के लियोन में होने वाले फेस्टिवल लुमिएर में होगी। इसके बाद BFI लंदन फिल्म फेस्टिवल में भी फिल्म की खास स्क्रीनिंग की जाएगी।
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ये फिल्म अपने आप में एक कमाल की कहानी है। सोचिए एक फिल्म को बनाने में 15 साल लग गए। जब फिल्म शुरू हुई तो मीना कुमारी और कमाल अमरोही एक दूसरे से बेहद प्यार करते थे और शादी में थे लेकिन फिल्म के बनने और रिलीज होने तक दोनों का रिश्ता और उसके बीच का प्यार खत्म हो गया।
‘पाकीजा’ की कहानी
1972 की फिल्म ‘पाकीजा’ एक मशहूर प्रेम कहानी है जिसे कमाल अमरोही ने लिखा और निर्देशित किया था। फिल्म की कहानी एक तवायफ साहिबाजान की जिंदगी के बारे में थी, जिसे पर्दे पर खूबसूरत एक्ट्रेस मीना कुमारी ने प्ले किया था। पाकीजा में मीना कुमारी के अलावा राज कुमार, अशोक कुमार और नादिरा नजर आए थे।
एक के बाद एक मुश्किलों से गुजरी फिल्म
तकनीकी और निजी कारणों के साथ-साथ बजट की कमी के चलते फिल्म को पूरा होने में करीब 15 साल लग गए।
फिल्म की शूटिंग 1956 में ब्लैक एंड व्हाइट में शुरू हुई थी। बाद में 1958 में इसे ईस्टमैनकलर में शूट किया जाने लगा। कलाकारों में बदलाव, कहानी में कई बार किए गए बदलाव और निर्देशक कमाल अमरोही की बारीकी से काम करने की आदत के कारण फिल्म की शूटिंग काफी धीमी हो गई और खर्च बढ़ता ही चला गया।
मीना कुमारी की बीमारी
1964 में कमाल अमरोही और मीना कुमारी के निजी मतभेदों के चलते दोनों अलग हो गए। इसके बाद फिल्म का काम भी रुक गया। फिल्म में सबसे बड़ी रुकावट तब आई जब साल 1968 में मीना कुमारी को पता चला कि उन्हें लिवर सिरोसिस है। इसके बाद फिल्म की शूटिंग रुक गई।
करीब एक साल बाद, ये प्रोजेक्ट फिर से शुरू हुआ। इस प्रोजेक्ट को दोबारा शुरू करना किसी जादू से कम नहीं था। अभिनेता सुनील दत्त और नरगिस ने जब पहले से शूट किए गए सीन देखे, तो उन्होंने बीमार मीना कुमारी को फिल्म की शूटिंग पूरी करने के लिए मना लिया।
सिनेमैटोग्राफर और म्यूजिक कंपोजर का निधन
बाद में 1967 में फिल्म के फेमस सिनेमैटोग्राफर जोसेफ विरशिंग का निधन हो गया। प्रोडक्शन का काम रुक गया। बाद में फिल्म के लिए भारत के टॉप सिनेमैटोग्राफर्स को इस प्रोजेक्ट से जोड़ा गया। उन्होंने इस फिल्म की कमान संभाली और फिल्म को पूरा किया।
ये भी कम नहीं था, फिल्म के साथ अभी और भी मुश्किलों का जुड़ना बाकी था। साल 1968 में फिल्म में शानदार गानों पर काम करने वाले म्यूजिक कंपोजर गुलाम मोहम्मद का निधन हो गया। बाद में लेजेंडरी नौशाद ने फिल्म के गानों को पूरा किया। फाइनली फिल्म 4 फरवरी 1972 में सिनेमाघरों में रिलीज हुई। ये मीना कुमारी की जिंदगी की आखिरी फिल्म थी, उसी साल 31 मार्च को एक्ट्रेस का निधन हो गया।
