गीतकार और कवि मनोज मुंतशिर एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। दरअसल, इस बार उन्होंने एआर रहमान के उस बयान पर सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में धार्मिक भेदभाव झेलने की बात कही थी। सिर्फ इतना ही नहीं, रहमान ने विक्की कौशल स्टारर फिल्म ‘छावा’ को भी विभाजनकारी बताया था और इस पर भी गीतकार ने रिएक्ट किया है। मनोज मुंतशिर का कहना है कि अगर उन्हें फिल्म से इतनी परेशानी थी, तो वह इस प्रोजेक्ट का हिस्सा ही क्यों बने।
मनोज मुंतशिर ने पूछे सवाल
दरअसल, मनोज मुंतशिर हाल ही में शुभंकर मिश्रा के पॉडकास्ट का हिस्सा बने, जहां उन्होंने एआर रहमान के बयां ‘छावा’ को बांटने वाली फिल्म बताने पर रिएक्ट करते हुए कहा, “ऐसा तो नहीं है कि फिल्म में काम करने के लिए हां कहने से पहले आपने स्क्रिप्ट नहीं सुनी थी। क्या आपने अचानक इसके लिए संगीत बनाना शुरू कर दिया? उन्होंने जरूर स्क्रिप्ट पढ़ी होगी। ठीक है, अगर यह प्रोपेगैंडा फिल्म थी और आप इसे नहीं करना चाहते थे… लेकिन फिल्म करने के बाद इसे प्रोपेगैंडा फिल्म कहना, यह बात मुझे समझ नहीं आती, माफ कीजिएगा।”
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एआर रहमान के हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में धार्मिक भेदभाव महसूस करने के बयान पर भी मनोज ने अपनी बात रखी। गीतकार ने कहा, “आज किसी वजह से आपको लगता है कि आपको कम काम मिल रहा है, तो हमें इसके दूसरे कारण भी क्यों नहीं देखने चाहिए? हो सकता है कि हमने लोगों के साथ अच्छे रिश्ते नहीं बनाए हों। हो सकता है कि पिछले कुछ सालों में हमारे गाने नहीं चले हों। इसके कई कारण हो सकते हैं। इस देश में उनसे बड़ा नाम कोई नहीं है। उन्होंने यह सवाल क्यों नहीं पूछा कि ‘मैं ही क्यों’ या ‘एक मुस्लिम ही क्यों?”
मनोज ने आगे कहा, “मैं नहीं समझता कि अचानक देश के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने की वजह क्या है। जब भी मैं उनसे मिलूंगा, मैं उनसे यह सवाल जरूर पूछूंगा। वह खुलकर बातचीत करने से परहेज नहीं करते।”
क्या बोले थे एआर रहमान?
इसी साल जनवरी में बीबीसी के साथ बात करते हुए एआर रहमान ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में मौजूद एक तरह के भेदभाव की बात की थी। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने कभी भेदभाव महसूस किया है, तो उन्होंने कहा था, “शायद मुझे कभी इसका पता नहीं चला, शायद इसे छिपाकर रखा गया, लेकिन मुझे ऐसा कुछ महसूस नहीं हुआ। शायद पिछले आठ सालों में ऐसा हुआ हो, क्योंकि अब ताकत का संतुलन बदल गया है और जिन लोगों में क्रिएटिविटी नहीं है, उनके पास अब ताकत है।
यह धार्मिक मामला भी हो सकता है… लेकिन यह मेरे सामने सीधे तौर पर नहीं आता। यह बातें मुझे इधर-उधर से सुनने को मिलती हैं कि उन्होंने आपको बुक किया था, लेकिन म्यूजिक कंपनी ने आपके बजाय अपने पांच कंपोजर्स को रख लिया। मैं कहता हूं, अच्छी बात है। अब मुझे अपने परिवार के साथ आराम करने के लिए ज्यादा समय मिलेगा।”
इसी इंटरव्यू में एआर रहमान ने ‘छावा’ को भी विभाजनकारी फिल्म बताया था। उन्होंने कहा था, “यह एक विभाजनकारी फिल्म है। मुझे लगता है कि इसने विभाजन का फायदा उठाया, लेकिन इसका मूल उद्देश्य बहादुरी दिखाना है। मैंने निर्देशक से पूछा था कि इस फिल्म के लिए उन्हें मेरी जरूरत क्यों थी। उन्होंने कहा कि इसके लिए हमें सिर्फ आप चाहिए।”
