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‘मस्जिद है या शिवाला, पत्थर गवाही देंगे…’ ज्ञानवापी विवाद के बीच मनोज मुंतशिर की नई कविता वायरल

गीतकार मनोज मुंतशिर मनोज मुंतशिर ने एक कविता लिखी और कही है, जिसके लिए कई लोग उनका विरोध कर रहे हैं।

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गीतकार मनोज मुंतशिर (फोटो सोर्स: twitter/@manojmuntashir)

ज्ञानवापी मामले के बीच गीतकार मनोज मुंतशिर ने एक कविता लिखी है, जो तेजी से वायरल हो रही है। विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने ट्विटर पर इस कविता का वीडियो शेयर किया है, जिसमें मनोज ‘मस्जिद है या शिवाला, पत्थर गवाही देंगे’ कविता बोल रहे हैं। इसके अलावा कविता में मनोज मुगल शासकों के बारे में कहते हुए पूछ रहे हैं कि ‘बाबर ने राम को वनवास में क्यों भेजा, काशी को क्यों उजाड़ा?’

मनोज मुंतशिर की इस कविता की लाइनें कुछ यूं हैं। ‘मस्जिद है या शिवाला, ये सच बता ही देंगे, पूछेगी जब अदालत, पत्थर गवाही देंगे। हम जोड़ने के काइल, तुम तोड़ने में माहिर, मेहमान तुमको माना, तुमने हमको काफ़िर। बस ये बता दो खंजर क्यों पीठ में उतारा, क्यों सोमनाथ तोड़ा? मथुरा को क्यों उजाड़ा, शंकर का जुर्म क्या था….।’

इस कविता को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया। एक वर्ग उनपर जहर उगलने का आरोप लगा रहा है। तो वहीं कई लोग उनकी कविता की तारीफ कर रहे हैं। बता दें कि कविता पढ़ते वक्त मनोज ने हरे रंग की टीशर्ट पहनी है। जिसपर एक यूजर ने लिखा,”हरे रंग की शर्ट क्यों? भगवा रंग की शर्ट क्यों नहीं पहनी? अमर कुमार सक्सेना ने लिखा,”राम जी को बनवास “बाबर ” ने दिया था?? अपने को कवि कहते हो?।”

बता दें कि ये पहली बार नहीं है जब मनोज मुंतशिर ने इस तरह की कोई कविता लिखी हो। इससे पहले भी मनोज ने एक कविता लिखी थी, जिसका नाम था ‘आप किसके वंशज हैं।’ जिसमें मनोज ने मुगलों को लेकर कई बात कही थी, जिसका लोगों ने जमकर विरोध किया था।

आपको बता दें कि इस वक्त ज्ञानवापी मस्जिद का मामला गरमाया हुआ है। जिला जज अजय कुमार विश्वेश की अदालत में सुनवाई पूरी हुई। कोर्ट ने इस मामले में 30 मई को अगली सुनवाई करने को कहा है। 26 मई को मुस्लिम पक्ष ने बहस शुरू की, लेकिन पूरी नहीं हो पाई। 30 मई दोबारा 2 बजे मुस्लिम पक्ष अपनी बात रखेगा।

कैसे शुरू हुआ विवाद? वाराणसी का श्रृंगार गौरी का मंदिर ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में मौजूद है। जिसके लिए पिछले साल अगस्त में रेखा पाठक, सीता साहू, लक्ष्मी देवी और मंजू व्यास और राखी सिंह नाम की पांच महिलाओं ने कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमें उन्होंने ऋंगार गौरी मंदिर में रोजाना पूजा अर्चना की अनुमति की अपील की थी। इस मामले में वाराणसी सिविल कोर्ट ने 26 अप्रैल को आदेश जारी किया। जिसमें 6 और 7 मई को दोनों पक्षों की मौजूदगी में श्रृंगार गौरी मंदिर का सर्वे करने को कहा गया।

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