तुम्हारा क्या करूंगा मैं? जब महेश भट्ट के पास काम मांगने गए मनोज बाजपेयी, थियेटर बैकग्राउंड के कारण सुननी पड़ी थीं ऐसी बातें

जब महेश भट्ट ने मनोज बाजपेयी को देखा तो कहा था कि मैं तुम्हारा क्या करूंगा। न तो वो हीरो की तरह दिखते थे और न ही उन्हें नाचना आता था।

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मनोज बाजपेयी और महेश भट्ट ने कई फिल्मों में साथ काम किया (Photo-Indian Express/File)

मनोज बाजपेयी ने अपने करियर की शुरुआत थियेटर से की थी। वो दिल्ली में थियेटर करते थे जिससे गुजारा लायक उन्हें पैसे मिल जाते थे। शेखर कपूर के कहने पर मनोज बाजपेयी पहली बार मुंबई आए और काम की तलाश में महेश भट्ट के पास गए। 90 के दशक की फिल्मों में एक्टर का हैंडसम होना जरूरी माना जाता था। साथ ही उस वक्त की फिल्मों में गाने अधिक होते थे जिस वजह से एक्टर का अच्छा डांसर होना जरूरी था।

मनोज बाजपेयी इनमें से किसी खांचे में फिट नहीं बैठते थे। वो थियेटर से गए थे जिन्हें रियलिस्टिक सिनेमा की ही जानकारी थी। जब महेश भट्ट ने उन्हें देखा तो कहा था कि मैं तुम्हारा क्या करूंगा। न तो वो हीरो की तरह दिखते थे और न ही उन्हें नाचना आता था इसलिए महेश भट्ट ने ये बात कह दी थी।

इस बात का जिक्र मनोज बाजपेयी ने अतिका फारुकी को दिए एक इंटरव्यू में किया था। उन्होंने बताया था, ‘90 का जो दौर चल रहा था, उसमें हम खुद को फिट नहीं पा रहे थे। हमें लग ही नहीं रहा था कि हमारे लिए यहां कोई जगह है या कभी बनेगी भी। शेखर कपूर ने मुझसे कहा था कि रंगमंच हो गया, कल को शादी करोगे तो बच्चों को खिलाने के लिए पैसे चाहिए होंगे। इसलिए मुंबई चले जाओ।’

मनोज बाजपेयी ने बताया कि शेखर कपूर की बात सुनकर वो डर गए और मुंबई आ गए। लेकिन मुंबई में काम के लिए उन्हें बड़ी मशक्कत करनी पड़ी। उन्होंने बताया था, ‘उस वक्त की जो स्थिति थी, उसमें हमारे लिए कोई जगह नहीं थी। हम जिस भी स्टूडियो में जाते थे, वहां पर या तो सिर्फ स्टार होते थे और शूटिंग भी होती थी तो हर दूसरे फ्लोर पर गाने की शूटिंग चल रही होती थी।’

उन्होंने आगे कहा था, ‘हमारी तरफ जब लोग देखते थे तब कहते थे कि भाई, इसका हम करेंगे क्या? भट्ट साहब ने मेरी तरफ देखकर कहा था कि यार तुम्हारा क्या करूंगा मैं? मुझे भी लगा कि ये सच में हमारा क्या करेंगे।’

मनोज बाजपेयी को आखिरकार ब्रेक मिला फिल्म ‘द्रोहकाल’ में। हालांकि इस फिल्म में उनका रोल बस 1 मिनट का था। इसके कुछ समय बाद उन्हें शेखर कपूर की फिल्म, ‘बैंडिट क्वीन’ में काम करने का मौका मिला था। मनोज बाजपेयी को हिंदी सिनेमा जगत में पहचान साल 1998 की फिल्म ‘सत्या’ से मिली। रामगोपाल वर्मा की इस फिल्म में मनोज ने गैंगस्टर भीखू महात्रे का रोल किया था।

इस फिल्म ये लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। मनोज बाजपेयी को सत्या के लिए ही फिल्मफेयर का बेस्ट एक्टर (क्रिटिक्स) अवॉर्ड भी मिला। मनोज बड़े परदे के साथ साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी सक्रिय हैं। अमेजन प्राइम की वेब सीरीज, ‘द फैमिली मैन’ ने उन्हें और अधिक लोकप्रिय बनाया है।

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