हिंदी सिनेमा के तीन मशहूर एक्टर मनोज बाजपेयी, नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी और विजय राज एक समय थिएटर की दुनिया में साथ काम करते थे। हाल ही में अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए मनोज बाजपेयी ने एक मजेदार किस्सा साझा किया है, जिसमें नवाज़ुद्दीन और विजय राज को एक नाटक में घंटों तक पेड़ का रोल निभाना पड़ा था।

फीवर एफएम से बातचीत में मनोज ने बताया कि जब दोनों कलाकार थिएटर प्रोडक्शन का हिस्सा बने, तो उन्हें पता चला कि उस समय उनके लिए कोई मुख्य भूमिका खाली नहीं थी।

मनोज बाजपेयी ने बताया कि यह एक बहुत बड़ा थिएटर प्रोडक्शन था और उन्हें आज भी वह दिन साफ याद है जब नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी और विजय राज पहली बार डायरेक्टर से मिले थे।

मनोज के अनुसार, जब दोनों कलाकार ऑडिशन देने पहुंचे तो डायरेक्टर ने उनसे पूछा कि वे कहां से आए हैं और एक्टिंग क्यों करना चाहते हैं। उस समय प्रोडक्शन में कोई खास भूमिका खाली नहीं थी, इसलिए डायरेक्टर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि ठीक है, इन्हें पेड़ों का रोल दे देते हैं, क्योंकि स्टेज पर पेड़ों की जरूरत है। इस तरह नवाज़ुद्दीन और विजय राज समेत करीब सात, आठ कलाकारों को नाटक में सिर्फ पेड़ों की भूमिका निभानी पड़ी।

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मनोज ने यह भी याद किया कि उनकी लगातार और बेहद गंभीर रिहर्सल देखकर नवाज और विजय अक्सर हैरान रह जाते थे। उन्हें समझ नहीं आता था कि जिस एक्टिंग को वे ग्लैमर की दुनिया समझकर आए थे, वहां इतनी मेहनत भी करनी पड़ती है।

मनोज बाजपेयी ने बताया कि वह थिएटर के दिनों में दिन-रात लगातार रिहर्सल करते थे। उनका पूरा शेड्यूल सिर्फ प्रैक्टिस में ही निकल जाता था। बाद में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने मनोज को बताया कि वह और विजय राज उन्हें घंटों मेहनत करते देख हैरान रह जाते थे। दोनों आपस में चर्चा करते थे कि क्या एक्टिंग वाकई इतनी कठिन होती है।

उनका कहना था कि वे स्टार बनने का सपना लेकर आए थे, लेकिन मनोज की मेहनत देखकर उनके मन में भी कभी-कभी वापस लौट जाने का ख्याल आता था, क्योंकि उन्हें लगता था कि ये आदमी तो बहुत ज्यादा मेहनत कर रहा है।

मनोज ने आगे खुलासा किया कि नवाज़ुद्दीन और विजय राज को उस नाटक में करीब ढाई घंटे तक स्टेज पर पेड़ बनकर खड़ा रहना पड़ता था। उन्होंने यह भी एक मज़ेदार किस्सा सुनाया कि कैसे उस प्ले के डायरेक्टर उनके कारण घायल हो गए थे।

डयरेक्टर इतने जोश में निर्देशन करते थे कि एक बार वह दोनों से टकराकर गिर पड़े, जिससे उन्हें गंभीर फ्रैक्चर हो गया और ऑपरेशन में स्क्रू तक लगाने पड़े। इसके बाद वे एक हाथ से ही निर्देशन करते रहे। बाद में लोग मजाक में कहते थे कि ये दोनों कलाकार उनके लिए पनौती साबित हुए।

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मनोज ने यह भी बताया कि उनकी दोस्ती नवाज़ुद्दीन और विजय राज से उसी थिएटर दौर में शुरू हुई थी। तीनों साथ सफर करते, एक ही जगह रुकते और जहां भी ठहरते, वहीं साथ खाना खाते थे।

दिलचस्प बात यह है कि नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने भी इस नाटक को याद करते हुए कहा था कि उस समय मनोज बाजपेयी थिएटर सर्किट में काफी मशहूर थे। वह मुख्य भूमिका में थे, जबकि नवाज और विजय को सिर्फ पेड़ों का रोल मिला था। बाद में जब मनोज को ‘बैंडिट क्वीन’ फिल्म मिली, तब उन्हें समझ आया कि मनोज कितने बड़े कलाकार हैं।

नवाज ने यह भी बताया था कि मनोज उस समय काफी शरारती थे। वह कोआला का किरदार निभा रहे थे और स्टेज पर जंगल के बीच पेड़ों के रूप में खड़े कलाकारों के पास जाकर उन्हें गुदगुदाते थे, लेकिन वे हंस भी नहीं सकते थे। इसी थिएटर के दौर से शुरू हुई यह दोस्ती आगे चलकर ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ जैसी फिल्मों में साथ काम करने तक पहुंची।