मनीषा कोइराला को साल 2012 में स्टेज IV ओवेरियन कैंसर का पता चला था। इसके इलाज के लिए वह न्यूयॉर्क गई थीं। वहां उन्होंने मेमोरियल स्लोन केटरिंग कैंसर सेंटर में अपनी सर्जरी करवाई और कीमोथेरेपी करवाई थी। अप्रैल 2013 में उन्होंने कीमोथेरेपी का आखिरी चरण पूरा किया और बाद में उन्हें कैंसर मुक्त घोषित कर दिया गया था।
अब हाल ही में अभिनेत्री ने कैंसर के दौरान अपने डर और अकेलेपन के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि जिस रात उन्हें कैंसर होने की खबर मिली थी, वह उनकी जिंदगी की सबसे मुश्किल और डरावनी रातों में से एक थी।
सुशांत प्रधान के साथ बातचीत में मनीषा ने बताया कि वह नेपाल के नॉर्विक इंटरनेशनल हॉस्पिटल में थीं, जब दिन में उन्हें बताया गया कि उन्हें कैंसर है। उन्होंने कहा कि उस रात मौत की आशंका के बीच उन्हें अपनी जिंदगी की सबसे “अकेली और लंबी” रात महसूस हुई।
मनीषा ने अपने अनुभव को याद करते हुए कहा, “मैं अस्पताल में थी और मुझे बताया गया कि मुझे कैंसर है। वह रात मेरे लिए सबसे अकेली और सबसे लंबी रात थी। ऐसा लगा जैसे मैं किसी अंधेरी जगह में हूं। मुझे लगा कि मैं मरने वाली हूं। उस पल यह सबसे डरावनी और अंधेरी स्थिति थी-बहुत, बहुत अकेली।”
अभिनेत्री ने कहा कि कैंसर के अनुभव ने उन्हें यह समझने में मदद की कि गंभीर बीमारी से जूझ रहा मरीज किस तरह के अकेलेपन से गुजरता है। उन्होंने यह भी बताया कि कई बार लोगों से घिरे होने के बावजूद इंसान खुद को अकेला महसूस कर सकता है।
उन्होंने कहा, “मैंने कई बार अकेलापन महसूस किया है। जब मुझे कैंसर हुआ, तब मुझे एहसास हुआ कि एक मरीज कितना अकेला महसूस करता है। यह सबसे भयानक और खराब समय था, जिसे कोई महसूस कर सकता है। जिंदगी में ऐसे समय आते हैं जब आप अकेलापन महसूस करते हैं। यह जिंदगी की सच्चाई है। कभी-कभी आप इसके साथ सहज भी होते हैं।”
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मनीषा ने आगे कहा, “जिंदगी कई परतों और कई अलग-अलग आयामों का मिश्रण है। भीड़ में भी कभी-कभी आप अकेला महसूस करते हैं, जैसे आप वहां के नहीं हैं। जब मैं बॉलीवुड की कुछ पार्टियों में जाती हूं तो लोगों से घुलने-मिलने की कोशिश करती हूं, लेकिन ऐसा नहीं हो पाता। आप वहां रहना चाहते हैं, फिर भी अकेलापन महसूस करते हैं। यह दुनिया का एक हिस्सा है, जहां आप खुद को अकेला महसूस करते हैं।”
मनीषा कोइराला ने बताया कि कैंसर के अनुभव ने उन्हें अपनी जिंदगी में जरूरी और गैर-जरूरी चीजों के बारे में दोबारा सोचने पर मजबूर किया। उन्होंने कहा, “मुझे जिंदगी का दूसरा मौका मिला, इसलिए जो भी गैर-जरूरी था, मैंने उसे किनारे कर दिया। गैर-जरूरी चीज दरअसल वह होती है, जो आपके अस्तित्व की बुनियाद और आपके मूल्यों के अनुरूप नहीं होती।”
अभिनेत्री ने कहा कि अब वह अपने परिवार पर ज्यादा ध्यान देना चाहती हैं और अपने आसपास लोगों का छोटा लेकिन अर्थपूर्ण दायरा रखना चाहती हैं। उन्होंने कहा, “मैं चाहती हूं कि मेरा परिवार एक-दूसरे से जुड़ा हुआ परिवार हो। मुझे भीड़ नहीं चाहिए थी। पहले मेरे दोस्तों का एक बड़ा समूह हुआ करता था।”
मनीषा ने यह भी स्वीकार किया कि पहले उन्होंने अपनी सेहत को नजरअंदाज किया। उन्होंने कहा, “मुझे अपनी सेहत की बिल्कुल परवाह नहीं थी। अगर मुझे जिंदगी का दूसरा मौका मिला है, तो मैं अपनी सेहत को प्राथमिकता दूंगी।”
उन्होंने बताया कि इस अनुभव ने उनके जीवन जीने का नजरिया बदल दिया। अब वह सेहत, रिश्तों, प्रकृति और जिंदगी के प्रति आभार पर ज्यादा ध्यान देना चाहती हैं।
उन्होंने कहा, “तो मूल रूप से मेरे पास चार-पांच चीजें हैं। मैं कुछ अच्छे और करीबी दोस्त चाहती हूं। मैं प्रकृति के लिए समय निकालना चाहती हूं। मैं जिंदगी का आनंद लेना चाहती हूं, जिंदगी को महसूस करना चाहती हूं और इस बात के लिए आभारी रहना चाहती हूं कि मैं जिंदा हूं।”
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बहुत ज्यादा काम करने पर भी बोलीं मनीषा कोइराला
मनीषा कोइराला ने अपने करियर के उस दौर के बारे में भी बात की, जब वह बेहद व्यस्त रहती थीं। उन्होंने स्वीकार किया कि एक समय के बाद वह अभिनय से थक गई थीं।
उन्होंने कहा, “एक समय था जब मैं दिन में तीन-चार फिल्मों में काम कर रही थी, 18 घंटे रोज, लगातार। सालों तक न रविवार था, न शनिवार, कुछ नहीं। मैं अपने करियर के उस मुकाम पर पहुंच गई थी, जहां मैं अपने काम से थक और ऊब गई थी।” अभिनेत्री ने कहा कि लगातार काम करने की थकान का असर उनके करियर से जुड़े फैसलों पर भी पड़ा।
उन्होंने कहा, “मैं उस दौर में काम करते-करते थक चुकी थी। फिर मैंने फिल्मों को लेकर गलत फैसले लेने शुरू कर दिए। मुझे लगा कि मैंने दुनियाभर में अपने प्रशंसकों से मिले प्यार को नजरअंदाज किया।”
मनीषा ने बताया कि कैंसर के दौरान दर्शकों की ओर से मिले संदेशों ने उन्हें अपने काम की अहमियत फिर से समझाई। उन्होंने कहा, “जब मुझे कैंसर हुआ, तो बहुत सारे लोगों ने मुझे संदेश भेजे, मेरे लिए दुआ की और शुभकामनाएं दीं। मुझे एहसास हुआ कि मेरा काम जरूरी है, क्योंकि वे सभी संदेश और लोगों की शुभकामनाएं मेरे काम की वजह से आई थीं।”
इसके बाद मनीषा को अपने दर्शकों के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी महसूस हुई और उन्होंने तय किया कि वह अब सोच-समझकर फिल्मों का चुनाव करेंगी। उन्होंने कहा, “इसलिए मेरे लिए अच्छा काम करना और अपने लिए और उन लोगों के लिए अच्छा काम देना जरूरी था, जो मेरे काम से प्यार करते हैं।”
मनीषा कोइराला का करियर
मनीषा कोइराला ने 1991 में सुभाष घई की फिल्म ‘सौदागर’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। इसके बाद उन्होंने अपनी पीढ़ी की कई यादगार फिल्मों में काम किया। इनमें ‘1942: ए लव स्टोरी’, ‘अकेले हम अकेले तुम’, ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘बॉम्बे’, ‘अग्नि साक्षी’, ‘गुप्त’, ‘दिल से..’, ‘मन’, ‘लज्जा’, ‘कंपनी’ और ‘एस्केप फ्रॉम तालिबान’ जैसी फिल्में शामिल हैं।
कैंसर के इलाज के बाद उन्होंने दोबारा अभिनय की दुनिया में वापसी की। वह ‘डियर माया’ (2017), ‘संजू’ (2018) और ‘लस्ट स्टोरीज’ (2018) जैसी फिल्मों में नजर आईं। 2024 में उन्होंने संजय लीला भंसाली के साथ दोबारा काम किया। भंसाली ने ही उन्हें ‘खामोशी: द म्यूजिकल’ में निर्देशित किया था। नेटफ्लिक्स की सीरीज ‘हीरामंडी: द डायमंड बाजार’ में मनीषा ने मल्लिकाजान का किरदार निभाया था।
