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Manikarnika Movie Review: ‘खूब लड़ी मर्दानी’, झांसी की रानी के साहस और संघर्ष को बयां करती है कंगना की ‘मणिकर्णिका’

Manikarnika Movie Review: फिल्म में कंगना शुरू से आखिर तक छाई हैं। हालांकि इसी चक्कर में तात्या टोपे (अतुल कुलकर्णी) और गौस खां (डैनी) के किरदार कुछ दब गए हैं। झलकारी बाई की भूमिका में अंकिता लोखंडे हैं।

Manikarnika Movie Review: फिल्म मणिकर्णिका के एक सीन में कंगना रनौत।

Manikarnika Movie Review and Rating:  लक्ष्मीबाई के बचपन का नाम मणिकर्णिका था। कंगना रानौत ने फिल्म में जो किरदार निभाया है वह भी लोगों के मन में बसा रहेगा। यह कंगना की अब तक की सबसे बड़ी फिल्म है। हालांकि फिल्म में कुछ अतिरंजनाएं भी हैं और कुछ जगहों पर इतिहास के साथ आजादी भी ली गई है। फिल्म में देशभक्ति का जज्बा पूरे तेज के साथ उभरा है साथ ही प्रस्तुति में बहुत कुछ काल्पनिक भी है लेकिन हर फिल्म इतिहास के अलावा वर्तमान में भी होती है। मध्यांतर के पहले फिल्म मणिकर्णिका के बचपन और युवावस्था के उस दौर को दिखाती है, जिसमें उसका विवाह झांसी के राजा के साथ होता है। इस भाग में मणिकर्णिका की तलवारबाजी और तीरंदाजी उभरती है। साथ ही उसके दिल में आम लोगों के साथ साथ जीव जंतुओं के लिए प्रेम भी सामने आता है। शेर को तीर से घायल कर उसकी मरहम पट्टी करने वाले दृश्य से मणिकर्णिका के चरित्र के इस पहलू को उभारा गया है।

मध्यांतर के बाद फिल्म उस वीरांगना की गाथा बन जाती है, जिसने ब्रिटिश हुकुमत को हिला दिया था। एक अतिसाधारण परिवार में जन्म लेने वाली लक्ष्मीबाई भारत की आजादी की लड़ाई की ऐसी सेनानी बन गई, जो हिम्मत और बहादुरी की मिसाल भी है। उसको तत्कालीन राजे-रजवाड़ों का समर्थन नहीं मिला, फिर भी जिस वीरता से उसने सैन्य संचालन कर अंग्रेजों का मुकाबला किया वह बेमिसाल है। संकटों के बावजूद वह हिम्मत नहीं हारती है और ‘मैं झांसी नहीं दूंगी’ की प्रतिज्ञा पर मरते दम तक अड़ी रहती है। प्रस्तुति इतनी प्रभावशाली है कि दर्शक कंगना में लक्ष्मीबाई को ही देखेंगे।

फिल्म में कंगना शुरू से आखिर तक छाई हैं। हालांकि इसी चक्कर में तात्या टोपे (अतुल कुलकर्णी) और गौस खां (डैनी) के किरदार कुछ दब गए हैं। झलकारी बाई की भूमिका में अंकिता लोखंडे हैं। फिल्म शुरू से आखिर तब बांधे रखती है। युद्ध के दृश्यों में भव्यता भी है। फिल्म के दो निर्देशक हैं। इस तरह यह कंगना की दोहरी उपलब्धि वाली फिल्म है। बतौर निर्देशक भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी है।

फिल्म का एक नारीवादी पहलू भी है। लक्ष्मीबाई विधवा हो गई थी और इस नाते पारंपरिक भारतीय समाज में उस पर कई तरह के दबाव थे। एक विधवा औरत किस तरह अपने परिवार के लोगों से भी भिड़ती है, यह भी ‘मणिकर्णिका’ में गूंथा हुआ है। यही नहीं वह महिलाओं को भी स्वतंत्रता की लड़ाई में शामिल करती है। एक सामंती परिवार की बहू आम जन के दिल में स्थान बना लेती है। ‘झांसी वाली रानी’ सिर्फ झांसी की नहीं रही, हर भारतीय के दिल में समा गई। फिल्म इस बात को दर्ज कराती है।

निर्देशक- कंगना, राधाकृष्ण जागरलामुडी
कलाकार-कंगना रनौत, अंकिता लोखंडे, अतुल कुलकर्णी, सुरेश ओबेराय, डैनी डेग्जोंग्पा, कुलभूषण खरबंदा, रिचर्ड कीप, जिशु सेनगुप्ता

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