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वक्त आ गया है अनुच्छेद 30 को हटाकर स्कूलों में सनातन धर्म की शिक्षा दी जाए- बोले महाभारत एक्टर, आने लगे ऐसे कमेंट्स

गजेंद्र चौहान (Gajendra Chauhan) ने एक ट्वीट कर कहा है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 30 को हटाने की जरूरत है जिससे भारत के स्कूलों में गीता, रामायण और सनातन धर्म की शिक्षा दी जा सके।

gajendra chauhan, gajendra chauhan twitter, article 30गजेंद्र चौहान का कहना है कि भारत के स्कूलों में सनातन धर्म की शिक्षा दी जानी चाहिए (Photo- Indian Express Archive Photo by Pradip Das)

महाभारत में युधिष्ठिर का किरदार निभा चुके अभिनेता गजेंद्र चौहान के ट्वीट्स आए दिनों खूब वायरल हो रहे हैं। वो एक धर्म विशेष को लेकर लगातार ट्वीट्स कर रहे हैं जिस पर यूजर्स खूब कमेंट पर रहे हैं और उनके कुछ ट्वीट्स पर तो मीम भी बन रहे हैं। हाल ही में किया गया उनका ट्वीट, ‘मैं हिंदू जगाने आया हूं, मैं हिंदू जगाकर जाऊंगा’ काफी वायरल हुआ था। हालांकि उनके इस तरह के ट्वीट्स पर कुछ लोग उनकी आलोचना भी कर रहे हैं। गजेंद्र चौहान ने एक बार फिर ट्वीट किया है जिसमें उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 30 को हटाने की बात कह दी है। जाहिर है, इस ट्वीट पर भी लोग खूब प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

आपको बता दें कि आर्टिकल 30 देश के धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को कई अधिकार देता है जिसमें यह प्रावधान है कि एक मुसलमान चाहे तो अपने बच्चे को उर्दू में और एक ईसाई चाहे तो बच्चे को अंग्रेजी माध्यम से पढ़ा सकता है। उन्हें अपने पसंद के शैक्षणिक संस्थानों को स्थापित करने का भी अधिकार है। ये अधिकार केवल अल्पसंख्यकों तक ही सीमित है, देश के बहुसंख्यक समुदाय तक यह अधिकार विस्तारित नहीं है।

लेकिन इस अनुच्छेद के प्रावधानों को लेकर हमेशा से एक भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश होती रही है। पूर्व में कई सोशल मीडिया पोस्ट्स के जरिए यह कहा जाता रहा है कि आर्टिकल 30 (A) भारतीय स्कूलों में भगवत गीता, वेद पुराणों यानि धार्मिक शिक्षा पर  प्रतिबंध लगाता है और मदरसों में हदीस, कुरान की शिक्षा की अनुमति देता है।

इसी अनुच्छेद पर गजेंद्र चौहान ने भी ट्वीट कर कहा है कि भारत के स्कूलों में सनातन धर्म की शिक्षा दी जानी चाहिए। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, ‘वक्त आ गया है कि अनुच्छेद 30 को हटाया जाए ताकि भारत के स्कूलों में गीता, रामायण और सनातन धर्म संस्कृति की शिक्षा भी दी जा सके। क्या आप सब मुझसे सहमत हैं?’

 

गजेंद्र चौहान के इस ट्वीट पर यूजर्स भी खूब कमेंट पर रहे हैं। नम्रता वर्मा ने उन्हें जवाब देते हुए लिखा, ‘तो अब ये गजेंद्र चौहान संविधान सभा के उन 299 सदस्यों को चुनौती देना चाहते हैं। तुम जैसे देशद्रोही चाहे कितना भी जोर लगा लो, संविधान को तुम लोग मनुस्मृति में नहीं बदल सकते।’

सुधांशु मौर्य नाम के यूजर लिखते हैं, ‘भाई ये व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का फालतू ज्ञान है। आर्टिकल 30 का इससे दूर- दूर तक कोई संबंध नहीं है।’

 

भूपी नाम की एक यूजर लिखती हैं, ‘विज्ञान, इतिहास, भूगोल को छोडो काल्पनिक कथाओं को पढाओ। जब तुम या तुम्हारे परिवार में से किसी का एक्सीडेंट हो या दिल का दौरा पड़ने पर हॉस्पिटल की जरूरत पड़े तो अस्पताल की  तरफ नहीं मंदिर की तरफ दौड़ना। तब पता चलेगा कि उच्च शिक्षा की जरूरत है या काल्पनिक कथाओं की जरूरत है।’

 

बाबा लपेटू नाथ नाम के एक यूजर ने गजेंद्र चौहान के ट्वीट पर तंज कसते हुए उन्हें जवाब दिया, ‘वक्त आ गया है कि भारत में अंग्रेजी भाषा को पूर्णतः बंद कर दिया जाए तभी तो हम आत्मनिर्भर बन सकेंगे। दूसरों की भाषा पर कब तक भिखारियों की तरह आश्रित रहेंगे।’

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