कुछ हफ्तो पहले दिवंगत कोरियोग्राफर सरोज खान की सहयोगी रुबीना खान ने एक यूट्यूब चैनल को इंटरव्यू दिया था, जिसमें उन्होंने माधुरी दीक्षित, करिश्मा कपूर को लेकर काफी चीजें कही थी। रुबीना ने दावा किया था कि संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘देवदास’ के गाने ‘डोला रे डोला’ की शूटिंग के दौरान माधुरी दीक्षित चार महीने की प्रेग्नेंट थीं। हालांकि, स्क्रीन के साथ हाल ही में हुई बातचीत में माधुरी ने खुद यह साफ किया है कि उस समय वह गर्भवती नहीं थीं।

क्या बोलीं माधुरी दीक्षित

माधुरी ने हंसते हुए कहा, “अरिन का जन्म 2003 में हुआ था। तो आप खुद ही हिसाब लगा लीजिए।” बता दें कि अभिनेत्री के बड़े बेटे अरिन नेने 23 साल के हैं, उनका जन्म 17 मार्च, 2003 को हुआ था। वहीं, ‘देवदास’ 12 जुलाई, 2002 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। उससे पहले 23 मई, 2002 को इसका प्रीमियर कान्स फिल्म फेस्टिवल में हुआ था।

यह भी पढ़ें: ‘बिना किसी डर के ट्रेवल कर रहा था’, ‘घूसखोर पंडत’ विवाद के दौरान मनोज बाजपेयी को मिली थी धमकियां, बोले- परिवार को भी इसमें…

माधुरी ने आगे कहा, “मेरी तबीयत थोड़ी खराब थी, क्योंकि मैं बहुत ज्यादा ट्रेवल कर रही थी। मैं बार-बार आ-जा रही थी, यहां शूटिंग करती और फिर वापस चली जाती और मेरी सारी शूटिंग रात में होती थी। इसलिए, मेरे लिए यह बहुत थकाने वाला था। मेरी तबीयत थोड़ी नासाज थी, लेकिन ऐसा कुछ बहुत गंभीर नहीं था।”

शादी के बाद अमेरिका चली गई थीं माधुरी

मधुर दीक्षित 1999 में श्रीराम नेने से शादी करने के बाद अमेरिका के डेनवर शहर में बस गईं। श्रीराम नेने वहां के एक जाने-माने हार्ट सर्जन थे। शादी के बाद भी वह कई सालों तक मुंबई और डेनवर के बीच आती-जाती रहीं, लेकिन अपने बेटों अरिन और रयान नेने को जन्म देने से पहले उन्होंने जो आखिरी फिल्म की थी, वह ‘देवदास’ थी। यह फिल्म शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के 1917 के मशहूर बंगाली उपन्यास पर आधारित थी। इसमें माधुरी दीक्षित ने ‘चंद्रमुखी’, ऐश्वर्या राय ने ‘पारो’ और शाहरुख खान ने ‘देव’ का रोल निभाया था।

क्या बोली थीं रुबीना खान

यूट्यूब चैनल ‘बॉलीवुड ठिकाना’ के पॉडकास्ट में रुबीना ने कहा था कि एक स्टेप ऐसा है जिसमें माधुरी मैम घूमकर नीचे बैठती हैं। वह शॉट सुबह 9 बजे से रात 10 बजे तक चलता रहा, क्योंकि वह उस समय वह चार महीने की गर्भवती थीं। इसलिए, वह ठीक से घूम नहीं पा रही थीं और उन्हें चक्कर भी आ रहे थे।”

रुबीना ने आगे बताया, “उस समय उन्हें बुखार भी था। उन्होंने बहुत संघर्ष किया। उन्होंने कभी किसी स्टेप को बदलने के लिए नहीं कहा। मास्टरजी (सरोज खान) जो भी कहती थीं, वह पत्थर की लकीर होता था।”

यह भी पढ़ें: ‘झूठी खबरें फैलाना बंद करें’, ईशा गुप्ता ने दिया प्रेमानंद महाराज का हेल्थ अपडेट, बोलीं- उनके सभी अनुयायियों से…