CineGram: हिंदी सिनेमा के सबसे चर्चित प्रेम कहानियों का जिक्र हो और दिलीप कुमार व मधुबाला का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। दोनों की प्रेम कहानी आज भी बॉलीवुड की सबसे यादगार अधूरी मोहब्बतों में गिनी जाती है। फिल्मों में साथ काम करते-करते दोनों एक-दूसरे के करीब आए और उनका रिश्ता इंडस्ट्री में चर्चा का विषय बन गया। हालांकि किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और यह प्यार शादी तक नहीं पहुंच सका।

मधुबाला ने अपने करियर में 73 फिल्मों में अभिनय किया, जिनमें सबसे ज्यादा फिल्में उन्होंने दिलीप कुमार के साथ की थीं। इस बात पर उन्हें हमेशा गर्व रहता था। अभिनेत्री और टीवी होस्ट तबस्सुम ने अपने शो तबस्सुम टॉकीज में मधुबाला की जिंदगी से जुड़े कई अनसुने किस्से शेयर किए थे। उन्होंने बताया था कि मधुबाला दिलीप कुमार की अदाकारी ही नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व की भी बेहद कायल थीं।

तबस्सुम के मुताबिक, मधुबाला कहा करती थीं कि जब भी वह दिलीप कुमार के साथ किसी रोमांटिक सीन की शूटिंग करती थीं, तो उन्हें कभी ऐसा महसूस नहीं होता था कि वह सिर्फ अभिनय कर रहे हैं। उन्हें उनकी आंखों में सच्चा प्यार दिखाई देता था और दिल की धड़कनों में भी वास्तविक भावनाओं का एहसास होता था। मधुबाला का मानना था कि दिलीप कुमार का प्यार फिल्मी नहीं, बल्कि दिल से था।

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तबस्सुम ने यह भी बताया था कि मधुबाला अक्सर अपनी अधूरी मोहब्बत का जिक्र करते हुए कहा करती थीं कि दुनिया की सबसे खुशकिस्मत लड़कियां वे होती हैं, जिनके माता-पिता उनके जीवनसाथी की पसंद को भी स्वीकार कर लें। लेकिन उनकी जिंदगी में ऐसा नहीं हो पाया। एक तरफ उनके पिता थे और दूसरी तरफ उनका प्यार। दोनों के स्वाभिमान और मतभेदों के बीच उनका रिश्ता टूट गया।

दरअसल, मधुबाला अपने परिवार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी थीं। उनके माता-पिता सहित कुल 11 भाई-बहनों का खर्च काफी हद तक उन्हीं की कमाई पर निर्भर था। लाहौर से मुंबई आने के बाद उनके पिता को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, जिसके चलते मधुबाला ने बचपन से ही फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया। बड़ी होने पर वह हिंदी सिनेमा की सबसे सफल अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं और इसी दौरान उनकी नजदीकियां दिलीप कुमार से बढ़ीं।

दोनों की प्रेम कहानी में सबसे बड़ा मोड़ साल 1957 में आया, जब फिल्म नया दौर की शूटिंग शुरू हुई। निर्माता-निर्देशक बी.आर. चोपड़ा फिल्म के कुछ हिस्सों की शूटिंग मध्य प्रदेश में करना चाहते थे, लेकिन मधुबाला के पिता ने उन्हें आउटडोर शूटिंग पर भेजने से साफ इनकार कर दिया। मजबूरी में मधुबाला को फिल्म छोड़नी पड़ी और उनका कॉन्ट्रैक्ट भी टूट गया।

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इस विवाद के बाद बी.आर. चोपड़ा अदालत पहुंचे। केस के दौरान दिलीप कुमार ने निर्माता के पक्ष में गवाही दी, जिससे मधुबाला को गहरा आघात पहुंचा। यही घटना दोनों के रिश्ते में ऐसी दरार बन गई, जिसे फिर कभी भरा नहीं जा सका। धीरे-धीरे दोनों हमेशा के लिए अलग हो गए।

हालांकि, वक्त बीतने के बाद भी दिलीप कुमार के दिल में मधुबाला के लिए सम्मान और अपनापन बना रहा। कहा जाता है कि जब मधुबाला अपनी जिंदगी के आखिरी दौर से गुजर रही थीं, तब दिलीप कुमार उनसे मिलने भी पहुंचे थे। उनकी प्रेम कहानी भले ही अधूरी रह गई, लेकिन हिंदी सिनेमा के इतिहास में यह आज भी सबसे भावुक और यादगार प्रेम कहानियों में शुमार की जाती है।