ओटीटी के दौर में सिनेमाघरों तक दर्शकों को दो ही चीजें पहुंचा सकती है- पहला अच्छा कंटेंट दूसरा अच्छा एक्सपीरियंस…
याद है पहले लोग धूप में सिनेमाघरों के बाहर लाइन लगाते थे, 20,30 और 50 रुपये के टिकट्स होते थे, और बालकनी टिकट लेकर ऊपर से फिल्म देखने में लग्जरी फीलिंग आती थी।
वक्त बदला… मल्टीप्लेक्स का ट्रेंड शुरू हुआ… मॉल के अंदर बने आलीशान मल्टीप्लेक्स… जहां आपके पास ऑप्शन है कि आप कई फिल्मों में से एक चुन सकते हैं…ये लग्जरी एक्सपीरियंस हमें बहुत अच्छा लगने लगा…
मगर वक्त का काम है बदलना… अब समय और आगे निकल चुका है और आजकल फिल्में देखना सिर्फ कहानी एन्जॉय करने तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि उसे प्रीमियम एक्सपीरियंस की तरह जीने का ट्रेंड शुरू हुआ है।
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यही वजह है कि बड़े शहरों में कई सिनेमाघर लग्जरी होटल जैसी सुविधाएं देते हैं, रिक्लाइनर सीट से लेकर प्राइवेट लाउंज तक लोगों के मूवी देखने का अंदाज बदल रहा है।
हजारों रुपये के टिकट्स होने के बावजूद शो हाउसफुल रहते हैं और लोग लग्जरी एक्सपीरियंस लेने के लिए इन थियेटर्स का रुख करते हैं। आजकल के सिनेमा के सिस्टम में क्या-क्या सुविधाएं होती हैं चलिए आपको बताते हैं।
रिक्लाइनर सीट्स
इन प्रीमियम थिएटर्स में साधारण सीटों की जगह रिक्लाइनर चेयर्स होती हैं, जिन्हें पीछे झुकाकर आराम से फिल्म देखी जा सकती है। सीट आगे से भी ऊपर हो जाती है और आप अपने दोनों पैर ऊपर रखकर आराम से फिल्म एन्जॉय कर सकते हैं। कुछ जगहों पर सीट के साथ ब्लैंकेट और पिलो भी दिए जाते हैं ताकि दर्शक पूरी तरह रिलैक्स महसूस करें।
प्राइवेट लाउंज
कई लक्जरी सिनेमाघरों में दर्शकों के लिए अलग प्राइवेट लाउंज होता है जहां फिल्म शुरू होने से पहले आराम भी किया जा सकता है।
कपल पॉड्स
कुछ स्क्रीन में दो लोगों के लिए प्राइवेट पॉड सीटिंग भी होती है, जहां कपल आराम से फिल्म एन्जॉय कर सकते हैं।
ऑन सीटिंग सर्विस
कई सिनेमाघरों में आपको पॉपकॉर्न और ड्रिंक्स के लिए लाइन में लगने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि फूड सीधे आपकी सीट तक सर्व किया जाता है।
महंगा लेकिन खास अनुभव
इस तरह के सिनेमाघरों की टिकट आम थिएटर से काफी ज्यादा महंगी होती है, लेकिन दर्शकों को लग्जरी फील, कम भीड़, प्राइवेसी और शानदार माहौल का अनुभव होता है। कीमतें शहर और सिनेमा चेन के अनुसार अलग हो सकती हैं।
प्रीमियम साउंड सिस्टम
आजकल PVR, INOX और Cinepolis जैसी सिनेमा चेन में Dolby Atmos साउंड भी होता है जिससे दर्शकों को बेहतर मूवी-एक्सपीरियंस मिल सके। इंडस्ट्री रिपोर्ट्स और ट्रेंड्स भी यह संकेत देते हैं कि लोग अब केवल कंटेंट ही नहीं, बल्कि सिनेमाघर का अनुभव भी महत्वपूर्ण मानने लगे हैं
VIP एंट्री और पर्सनल स्क्रीन कंट्रोल
आपको वीआईपी मिलती है। कई सिनेमाघरों में तो सीट से ही लाइटिंग कंट्रोल का ऑप्शन होता है। कई जगह आप बैठे-बैठे ही सर्विस और फूड का ऑर्डर भी कर सकते हैं।
चूंकि ओटीटी आने के बाद लोग फिल्में देखने तभी बाहर निकलते हैं जब फिल्म का कंटेंट अच्छा हो और जब वो फिल्म देखने कम बाहर जाते हैं तो उस अनुभव को खास बनाना चाहते हैं, ये भी एक वजह है कि इन लग्जरी एक्सपीरियंस का ट्रेंड बढ़ने लगा है।
हालांकि लग्जरी सिनेमा एक्सपीरियंस हर शहर और हर थिएटर में एक जैसा नहीं होता। ये सुविधाएं चुनिंदा प्रीमियम मल्टीप्लेक्स में होती हैं, खासकर दिल्ली, मुंबई, बैग्लोर जैसे बड़े शहरों के हाई-एंड सिनेमाघरों में ही देखने को मिलती हैं।
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