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लोगन मूवी रिव्यू: एक्स-मैन सीरीज की कहानी को एक नए मुकाम पर ले जाती है ह्यूज जैकमैन की यह फिल्म

जेम्स मैनगोल्ड निर्देशित ह्यूज जैकमैन स्टारर फिल्म लोगन भारत में रिलीज हो चुकी है। फिल्म शुरू होती है सैंकड़ों साल पहले मिस्र के एक पिरामिड में हुए शक्ति परिवर्तन से।

Logan, Logan Movie Review, Logan Story, Logan First Day Collection, Logan Star Cast, Logan Release Date, Logan Director Name, Bollywood news in Hindi, Entertainment news in Hindiजेम्स मैनगोल्ड निर्देशित ह्यूज जैकमैन स्टारर फिल्म लोगन भारत में रिलीज हो चुकी है।

एक नए कलेवर से सजी इस नई किस्त में एक्शन बहुत ज्यादा नहीं है। जितना है वो बहुत साफ और तेज है। एक तरफ जहां तमाम सुपरहीरोज को दुनिया पर बोझ समझा जा रहा है वहीं दूसरी ओर एक्स-मैन को जरूरत बताया जा रहा है। ये बात इस सीरिज के हक में जाती है। पर कई अच्छी बातों के बावजूद कुछेक बातें खलती भी हैं। कुल मिलाकर एक्स-मैन की यह नई किस्त रोमांच पैदा करती है। मनोरंजन करती है और इस वादे के साथ अलविदा भी लेती है कि हमारी जरूरत अभी अत्म नहीं हुई है।

जेम्स मैनगोल्ड निर्देशित ह्यूज जैकमैन स्टारर फिल्म लोगन भारत में रिलीज हो चुकी है। फिल्म शुरू होती है सैंकड़ों साल पहले मिस्र के एक पिरामिड में हुए शक्ति परिवर्तन से। सबाह नूर/एपोकलेप्स के किरदार में ऑस्कर इसैक अमरत्व प्राप्त करने की कोशिशों में जुटा है, उसी वक्त बगावत हो जाती है और उसकी पूरी सल्तनत पिरामिड के साथ धरती में समा जाती है। इस वाकिये की महज एक ही गवाह है सीआईए की एक एजेन्ट मोआइरा (रोज ब्रायन)। 1983 में दूसरा जन्म लेने के बाद एपोकलेप्स सबसे पहले अपने चार सेनापतियों को जिंदा करना चाहता है, जिसके लिए उसे म्यूटेंट की ताकत का सहारा लेना पड़ता है।

अपने कुछ नुमाइंदों और सेनापति को फिर से इकठ्ठा करने के बाद सबाह नूर फिर अपने मिशन में जुट जाता है। अपनी सेना के साथ वह अब उस दुनिया पर हमला करना चाहता है, जिसके तहत म्यूटेंट की काबिलियत को एक नई दिशा देने की तैयारी बरसों से चल रही है। सबाह, चार्ल्स के दिमाग पढ़ लेने और लाखों-करोंड़ों लोगों एवं म्यूटेंट से सीधे बात कर लेने की क्षमता का कायल हो जाता है। वह चार्ल्स को अपने साथ ले जाता है और पूरी दुनिया के परमाणु अस्त्रों को अंतरिक्ष में भेज कर नष्ट भी कर देता है।

फिल्म के शुरूआती सीन्स 1999 में रिलीज हुई द ममी की याद दिलाते हैं लेकिन जैसे ही फिल्म टाइम फ्रेम की यात्रा कर अस्सी के दशक में पहुंचती है तो म्यूटेंट्स को देख आप वापस म्यूटेंट वाली इस कहानी में वापस आने लगते हैं। एपोकलेप्स का चरित्र और उसका किरदार काफी रोचक ढंग से सामने आता है। उसका मेक-अप और वेशभूषा डर और उत्सुकता पैदा करने वाले हैं। कई जगह तो म्यूटेंट से कहीं ज्यादा। इसी तरह से मैग्नेटो का किरदार भी है, जो रोचक है।

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