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मस्जिदें बंद करने के लिए फतवे का समर्थन कर जावेद अख़्तर आए ट्रोल्स के निशाने पर, देनी पड़ी सफाई

Javed Akhtar: गीतकार जावेद अख्तर ने लॉक डाउन के बावजूद मस्जिदों के खुले रहने पर निशाना साधा है और कहा कि अगर काबा और मदीना बंद हो सकता है तो भारत की मस्जिदें क्यों नहीं?

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Javed Akhtar: भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। दिल्ली के निजामुद्दीन में आयोजित तबलीगी जमात के मरकज में शामिल 8 लोगों की इस वायरस से मौत के बाद चिंता और बढ़ गई है। इस बीच गीतकार जावेद अख्तर ने लॉक डाउन के बावजूद मस्जिदों के खुले रहने पर निशाना साधा है और कहा कि अगर काबा और मदीना बंद हो सकता है तो भारत की मस्जिदें क्यों नहीं?

जावेद अख्तर ने ट्वीट किया, ‘अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमैन और जाने-माने स्कॉलर ताहिर महमूद साहब ने दारुल उलूम देवबंद से कोरोना वायरस के खत्म होने तक सभी मस्जिदों को बंद करने के लिए फतवा जारी करने को कहा है। मैं महमूद साहब की इस बात से पूरी तरह सहमत हूं। अगर काबा और मदीना बंद हो सकते हैं तो भारत की मस्जिदें क्यों नहीं? हालांकि इस ट्वीट के बाद जावेद अख्तर ट्रोल्स के निशाने पर आ गए। तमाम यूजर्स ने उनसे सवाल किया कि आखिर फ़तवे की जरूरत क्यों? क्या मस्जिदों को बंद करने के लिए सरकार का निर्देश काफी नहीं है?

दिलीप कुमार सारंगी नाम के एक ट्विटर यूजर ने जावेद अख्तर से सवाल किया, ‘आखिर फतवा क्यों? सरकार ने तो लॉक डाउन का आर्डर दिया है, क्या इन लोगों के लिए सरकार का निर्देश मान्य नहीं है?’ इसका जवाब देते हुए जावेद अख्तर ने लिखा ‘थोड़ा कॉमन सेंस और धैर्य रखो भाई…क्या तुम नहीं देखना चाहते कि वे इस अपील का कैसे उत्तर देते हैं। कम से कम मैं तो जानने को उत्सुक हूं…’।

एक अन्य यूजर ने जावेद अख्तर से सवाल किया, अब क्यों नहीं बोलते हैं सर? निजामुद्दीन का केस देखिए…’। इस ट्वीट का जवाब देते हुए जावेद अख्तर ने लिखा, ‘मैंने इसीलिए फतवे का समर्थन किया है ताकि निजामुद्दीन जैसे केस या मस्जिदों में नमाज पर इन उलेमाओं की राय सामने आ सके। ना तो मैं उन्हें फॉलो करता हूं ना कभी करूंगा, लेकिन उन्हें हकीकत से रूबरू कराना चाहता हूं। आखिर कुछ बेवकूफों को ये बात क्यों समझ में नहीं आती है…।

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