हाल ही में बॉलीवुड के मशहूर प्लेबैक सिंगर अरिजीत सिंह ने अपने रिटायरमेंट की घोषणा की थी। जिसके बाद कई लोगों के मन में ये सवाल आए कि आखिर अब वो क्या करने वाले हैं। उन्होंने बताया कि यह संगीत से पूरी तरह ब्रेक नहीं है, वे पहले से तय कुछ कमिटमेंट्स को पूरा करेंगे और कुछ गीत इस साल भी रिलीज हो सकते हैं। वो भले ही फिल्मों के लिए गाने ना गाएं, लेकिन हम आपको बता दें कि वो अपने गाए हुए पुराने गानों से आगे भी कमाई कर सकते हैं। कैसे? आइये समझाते हैं।

जब कोई सिंगर फिल्मों या गानों से रिटायर होता है, तो अक्सर लोग सोचते हैं कि उसके लिए कमाई खत्म हो जाती है। लेकिन असलियत इससे कहीं अलग है। रिटायरमेंट लेने के बाद भी सिंगर्स अपने पुराने गानों से लगातार कमाई कर सकते हैं और ऐसा म्यूजिक रॉयल्टी से हो सकता है।

क्या होती है म्यूजिक रॉयल्टी?

म्यूजिक रॉयल्टी एक भुगतान का एक कानूनी तरीका है जो कलाकारों, गीतकारों और संगीत निर्माताओं को मिलता है जब उनके गाने कई तरीकों से उपयोग किए जाते हैं। यह सिस्टम दुनिया भर में अलग-अलग होता है, लेकिन इसके कई प्रकार होते हैं-

1- परफॉर्मेंस रॉयल्टी: जब आपका गाना रेडियो, टीवी, लाइव कार्यक्रम या डिजिटल स्ट्रीमिंग पर बजता है।

2- मेकैनिकल रॉयल्टी: जब आपका गाना डिजिटल डाउनलोड, सीडी/विनाइल या स्ट्रीम के रूप में फिर से बजता है।

3- सिंक रॉयल्टी: जब आपका गाना किसी फिल्म, विज्ञापन, टीवी शो या गेम के साथ सिंक्रोनाइज़ होता है — यानी विजुअल मीडिया में इस्तेमाल होता है।

4- डिजिटल प्लेटफॉर्म से रॉयल्टी: जैसे YouTube, Spotify, Apple Music आदि, जहां हर बार आपका गाना प्ले होने पर आपको भुगतान मिलता है।

हर बार जब आपका गाना सुना जाता है, चाहे वह पुराने दशकों का हिट गाना हो या यूट्यूब पर वायरल हुआ ट्रैक, इससे रॉयल्टी के रूप में भुगतान मिलता है और यह जीवनभर चलता है।

डिजिटल स्ट्रीमिंग है कमाई का बड़ा तरीका

आजकल गानों को ज्यादातर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सुना जाता है। YouTube जैसे प्लेटफॉर्म हर साल म्यूजिक इंडस्ट्री को अरबों डॉलर का भुगतान करते हैं, जिसका बड़ा हिस्सा कलाकारों और राइट्स होल्डर्स को रॉयल्टी के रूप में जाता है। इसके उदाहरण के तौर पर हम बता दें कि कई हिट गानों को करोड़ों बार स्ट्रीम किया जाता है और छोटे-छोटे माइक्रो-पेमेंट्स इकट्ठा होकर एक बड़ा रेवेन्यू बनाते हैं। इसी से कलाकारों को जीवनभर कमाई का मौका मिलता है।

रिटायरमेंट के बाद कैसे होती है कमाई?

जब सिंगर रिटायरमेंट ले लेते हैं या फिल्मों के लिए गाने नहीं गाते, तब भी उनके पुराने गानों की रॉयल्टी जारी रहती है। इसके कुछ खास तरीके हैं:

  1. 1- पुराने गानों का प्लेबैक: अगर फिल्मों में इस्तेमाल हुए पुराने गानों को रेडियो, टीवी, स्ट्रीमिंग या लाइव पर प्ले किया जाता है तो कलाकार को परफॉर्मेंस रॉयल्टी मिलती रहती है।
  2. 2- डिजिटल स्ट्रीमिंग और डाउनलोड: अगर गाने को Spotify, YouTube, Apple Music पर जब भी सुना जाता है, उससे मेकैनिकल और परफॉर्मेंस रॉयल्टी मिलती है, जो समय के साथ बड़ा राजस्व बनाती है।
  3. 3- सिंक लाइसेंसिंग: अगर कोई पुराना गाना फिल्म, वेब सीरीज, एडवर्टाइजमेंट या गेम में इस्तेमाल होता है, तो कलाकार को सिंक रॉयल्टी और upfront लाइसेंस फीस मिलती है।

इंडियन इंडस्ट्री में क्या है रॉयल्टी सिस्टम?

हाल के इंटरव्यूज और कलाकारों के बयान बताते हैं कि भारत में रॉयल्टी का सिस्टम अभी भी पूरी तरह विकसित नहीं है। कई सिंगर्स को अपनी रॉयल्टी या पेंशन जैसी सुविधाएं नहीं मिलती हैं और कुछ मामलों में उन्हें सिर्फ एक बेहद कम शुल्क मिलता है। लेकिन दुनिया भर में रॉयल्टी सिस्टम मजबूत है, जिससे पुराने गानों के राइट्स सही तरीके से रजिस्टर्ड होने पर रिटायर होने के बावजूद भी आय होती रहती है।