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सिस्टम के लिए हर आदमी बस एक आंकड़ा- कोरोना पर मध्य प्रदेश के मंत्री के बेतुके बयान पर बिफरे कुमार विश्वास

Kumar Vishwas: कुमार विश्वास ने प्रेम सिंह पटेल के बयान का वीडियो शेयर करते हुए ताना मारा और लिखा- “प्राथमिकता क्या किसी की, क्या भला छोटा बड़ा है? व्यवस्था के वास्ते हर आदमी बस आंकड़ा है।”

Kumar Vishwas, Ventilator, 10% duty on Ventilator, WTO, Modi Governmentकुमार विश्वास (फोटोसोर्स- इंडियन एक्सप्रेस)

Kumar Vishwas: डॉ. कुमार विश्वास सोशल मीडिया पर खूब एक्टिव रहते हैं और तमाम मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखने के लिए जाने जाते हैं। देशभर में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच वे लगातार शासन-प्रशासन और स्वास्थ्य सेवाओं की नाकामी पर सवाल उठा रहे हैं। इसी बीच उन्होंने मध्य प्रदेश के मंत्री प्रेम सिंह पटेल के उस बयान पर पलटवार किया है, जिसमें उन्होंने कोरोना से हो रही मौतों पर बात करते हुए कहा था- ‘मौत को कौन रोक सकता है?’

कुमार विश्वास ने प्रेम सिंह पटेल के बयान का वीडियो शेयर करते हुए ताना मारा और लिखा- “प्राथमिकता क्या किसी की, क्या भला छोटा बड़ा है? व्यवस्था के वास्ते हर आदमी बस आंकड़ा है।” एक अन्य पोस्ट में विश्वास ने लिखा- रात-दिन परिचितों की करुण पुकार और बेबसी के कॉल सुन रहा हूं। ईश्वरीय बल से जो संभव सहायता है, कर रहा हूं। इस काम में मेरा सहयोग कर रहे हर व्यक्ति का आभार। घर में रहिए सब।“

बता दें, वीडियो में एमपी के पशुपालन मंत्री प्रेम सिंह पटेल कहते दिखते हैं-‘देखो मैं बोल तो रहा हूं, मौतें कोई नहीं रोक सकता। कोरोना ऐसी चीज है जिसके बारे में अकेला मैं ही नहीं कह रहा हूं। पूरा देश कह रहा है। कोरोना से बचने के लिए हम सभी लोग सहयोग करें वरना मरने का क्या है कि अब उम्र हो जाती है तो उसको तो मरना भी पड़ता है।’

कुमार की इस पोस्ट पर तमाम यूजर्स भी कमेंट करने लगे और मंत्री की बात पर हैरानी जताते दिखे। एक यूजर ने लिखा- इन्हें कहो कि आपकी भी तो उम्र हो चली है। आप भी निकलिए। जब तक ऐसे लोग नेता बनते रहेंगे तब तक देश का यही हाल रहेगा।

अनिल त्रिपाठी नाम के यूजर ने लिखा- अपनी नाकामी को दर्शनशास्त्र में पिरोकर मंत्री ने सिद्ध कर दिया है कि यह व्यक्ति संवैधानिक पद पर रहने के लायक नहीं है। एक यूजर ने लिखा- समय पर हकीकत बताई होती तो आज ये हालत नहीं होते। अखिलेश राव ने लिखा- “किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को जिम्मेदारी से अपनी बात कहनी चाहिए। खासकर जब आप जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं। तब तो आपकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। पर अभी जिम्मेदारी लेने का चलन नहीं रहा है, हर कोई आरोप प्रत्यारोप में लगा है और जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने में।

एक यूजर ने लिखा, ‘इंसानियत कैसे इतनी सस्ती हो गई है? वो जायज़ा ले रहे हैं अस्पतालों का। वहां लोग इलाज के इंतजार में मर रहे हैं। दोष विकृति को दे या विकृत सोच को? यहां सबको बस अब अपनी ही पड़ी है।

एक यूजर ने लिखा- इतना अच्छा देश हमारा, इतने अच्छे लोग। लेकिन चाटुकार और अनपढ़ लोगों को नेता बनाओगे तो यही हाल होगा। बनारसी बाबू नाम के शख्स ने कहा- देश ने इन जैसे कई मुर्खाधिराजों को सत्तासीन क्या कर दिया ये अपने आपको भारत भाग्य विधाता समझने लगे हैं।

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