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कोंकणा सेन शर्मा को है उम्मीद जल्द रिलीज होगी लिपस्टिक अंडर माय बुर्का होगी रिलीज

कोंकणा सेन शर्मा को लगता है कि अभी उम्मीद खत्म नहीं हुई है क्योंकि यह ट्रिब्यूनल के पास गई है। उन्होंने कहा- मैं उन सभी लोगों की बहुत आभारी हूं जो लिपस्टिक अंडर माय बुर्को का समर्थन कर रहे हैं।

Konkona Sen Sharma, Ratna Pathak Shah, Aahana Kumra, Plabita Borthakurफिल्म लिपस्टिक अंडर माई बुर्का का एक सीन (Image Source: Youtube)

लिपस्टिक अंडर माय बुर्का के बारे में बहुत सारी खबरें सामने आ चुकी हैं। सीबीएफसी ने इसे सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया है जिसकी वजह से इंटरनेट पर इसके बारे में बहुत कुछ मौजूद है। इतना ही नहीं कई बॉलीवुड सेलिब्रिटिज ने कास्ट का साथ दिया है। पहलाज निहलानी की कमिटी ने कहा है कि फिल्म बहुत नारीवादी है और जिंदगी के बारे में उनकी  फैंटेसी पर आधारित है। इसमें कई सेक्सुअल सींस है, गाली गलौज वाले शब्द, ऑडियो पोर्नोग्राफी और समाज के एक हिस्से के लिए थोड़ी संवेदनशील है। फिल्म को बहुत पहचान मिल रही है और कई अंतर राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में इसे अवॉर्ड मिल चुके हैं।

कोंकणा सेन शर्मा को लगता है कि अभी उम्मीद खत्म नहीं हुई है क्योंकि यह ट्रिब्यूनल के पास गई है। उन्होंने कहा- मैं उन सभी लोगों की बहुत आभारी हूं जो लिपस्टिक अंडर माय बुर्को का समर्थन कर रहे हैं। अब लगता है कि इसे दिखाया जाएगा क्योंकि फिल्म ट्रिब्यूनल के पास गई है और हमें उम्मीद है कि वो हमें सर्टिफिकेट देंगे जिसकी वजह से हम आगे बढ़ेंगे। खैर हमें उम्मीद है कि फिल्म को अप्रूवल मिल जाएगा। ग्लास्गो फिल्म फेस्टिवल में इस फिल्म को तीसरा एनुअल ऑडियंस अवॉर्ड मिला था। फिल्म की निर्देशक अलंकृता श्रीवास्तव को डेविड टेन्नेंट ने अवॉर्ड दिया जिन्हें कि डॉक्ट हू सीरिज में, हैरी पॉटर और गोब्लेट ऑफ फायर एंड जेसिका जोंस जैसी फिल्मों में अपने किरदार के लिए जाना जाता है।

हम भी यही उम्मीद करते हैं कि फिल्म को जल्द ही सर्टिफिकेट मिले। केवल सीबीएफसी ही नहीं मुस्लिम नेताओं ने भी इसके खिलाफ फतवा जारी कर दिया है। उनका कहना है कि फिल्म में उनके धर्म को नकारात्मक तौर पर दिखाया गया है। वहीं फिल्‍म के निर्माता प्रकाश झा ने कहा है कि वह बैन के खिलाफ ट्रिब्‍यूनल में अपील करेंगे। उन्‍होंने एएनआई से कहा, ”हां, जैसे मैंने पहले भी किया है, ट्रिब्‍यूनल में फिर अपील करूंगा, वही इकलौता विकल्‍प है।”

झा ने यह भी कहा कि सेंसर बोर्ड के पास फिल्‍मों पर कैंची चलाने की ताकत नहीं होनी चाहिए। उन्‍होंने कहा, ”दर्शक इतने समझदार हैं कि वह समझते हैं कि क्‍या सही है और क्‍या गलत। सेंसरिंग को हटाकर के क्‍लेरिफिकेशन की जरूरत है, कैंची चलाने की ताकत नहीं होनी चाहिए।”

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