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इस फेमस विलेन को जब पहचानना हो गया था मुश्किल, मौत से पहले रह गया था हड्डियों का ढांचा

रामी ने आंध्र प्रदेश की उस्मानिया यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म की डिग्री ली। फिल्मों में आने से पहले रामी रेड्डी जर्नलिस्ट थे।

रामी रेड्डी।

‘तबाही की आंधी और बर्बादी के तुफान का नाम है चिकारा’ फिल्म ‘वक्त हमारा है’ में ऐसे न जाने कितने हिट डायलॉग रामी रेड्डी ने बोले हैं। 90 के दशक में बॉलीवुड के फेमस विलेन में से रहे हैं रामी रेड्डी। 1990 में तेलुगु फिल्म ‘अंकुशम’ से एक्टिंग की शुरुआत ‘स्पॉट नागा’ का रोल किया था जिसमें उनके डायलॉग काफी फेमस हुए थे। कई तेलुगु फिल्मों में काम करने के बाद रामी को उसी साल पहली बॉलीवुड फिल्म ‘प्रतिबंध’ में काम करने का मौका मिला था। फिल्म में उनका किरदार ‘अन्ना’ काफी पॉपुलर हुआ और रामी रेड्डी को लोग साउथ के साथ-साथ बॉलीवुड में भी जानने लगे। इसके बाद उन्होंने करीब दर्जनभर हिंदी फिल्मों में काम किया। वहीं फिल्मों में अपने विलेन के रोल से ऑडियंस को भी खौफजदा करने वाले रामी रेड्डी का जब निधन हुआ तब उनकी हालत काफी बुरी हो चुकी थी। आइए जानते हैं रामी रेड्डी के बारे में कुछ बातें।

तेलुगु फिल्म अमोरू के एक सीन में रामी रेड्डी।

1 जनवरी, 1959 को आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के वाल्मीकिपुरम में जन्में रामी रेड्डी का रियल नाम गंगासानी रामी रेड्डी है। रामी ने आंध्र प्रदेश की उस्मानिया यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म की डिग्री ली। फिल्मों में आने से पहले रामी रेड्डी जर्नलिस्ट थे। उन्होंने ‘मुंसिफ डेली’ नाम के न्यूजपेपर में नौकरी भी की थी।

फिल्म अंकुशम के एक सीन में रामी रेड्डी।

रामी रेड्डी को अक्सर फिल्मों विलेन का ही रोल दिया जाता था। उनका किरदार और लुक इतना भयानक और क्रूर होता था कि लोग देखते ही सक-पका जाते थे। फिर चाहे 1990 में आई फिल्म ‘प्रतिबंध’ में अन्ना का रोल हो या 1993 में आई फिल्म ‘वक्त हमारा है’ में कर्नल चिकारा का रोल।

वहीं साल 2000 के बाद रामी को लिवर की बीमारी ने घेर लिया। इसके चलते रामी ने बाहर आना जाना छोड़ दिया, कम लोगों से मिलते थे और ज्यादा वक्त घर पर ही बीतते थे। एक बार वो एक इवेंट में नजर आए थे, जहां उन्हें पहचानना मुश्किल हो गया था। रामी की परेशानी यहीं खत्म नहीं हुई थी उनको लिवर के बाद किडनी की बीमारी ने घेर लियाल था। जिसकी वजह से मौत के पहले वो सिर्फ हड्डियों का ढांचा रह गए थे। कुछ महीनों तक इलाज चलने के बाद 14 अप्रैल, 2011 को सिकंदराबाद के एक प्राइवेट अस्पताल में रामी रेड्डी की मौत हो गई थी।

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