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शराब-सिगरेट की लग गई थी लत, पत्नी से रिश्तों में भी आ गई थी तल्ख़ी- KBC-5 जीतने वाले बिहार के सुशील कुमार ने सुनाई दास्तां

सुशील कुमार के मुताबिक केबीसी जितने के बाद उनकी जिंदगी में बहुत कुछ खराब हो रहा था तो कुछ अच्छी चीजें भी हो रही थीं। उन्होंने आगे लिखा है कि दिल्ली में मैंने कुछ कार लेकर अपने एक मित्र के साथ चलवाने लगा था जिसके कारण...

Sushil Kumar, Sushil Kumar KBC, Kaun Banega Crorepati Winner Sushil Kumar,सुशील कुमार ने लिखा कि केबीसी के बाद मैं दानवीर बन गया था।

छोटे पर्दे के सबसे लोकप्रिय रिएलिटी क्विज शो ‘कौन बनेगा करोड़पति‘ में साल 2011 में 5 करोड़ रुपए की धनराशि जीतने वाले मोतिहारी बिहार के सुशील कुमार को नेम फेम और पैसा सबकुछ हासिल हुआ लेकिन उनकी निजी जिंदगी में सबकुछ ठीक नहीं रहा। सुशील कुमार ने हाल ही अपने फेसबुक पेज पर अपनी दुखभरी दास्तां बताई है। उन्होंने बताया है कि कैसे कुछ लोगों की संगत में फंस गए थे और शराब,सिगरेट की लत लग गई थी।

सुशील कुमार ने लिखा कि केबीसी के बाद मैं दानवीर बन गया था। और गुप्त दान का चस्का लग गया था। महीने में लगभग 50 हज़ार से ज्यादा ऐसे ही कार्यों में चला जाता था। इस कारण कुछ चालू टाइप के लोग भी जुड़ गए थे। सुशील कुमार ने कहा कि ऐसे लोगों के चक्कर में वे खूब ठगे जाते थे। दान करने के बाद ठगी का पता चलता था।

पत्नी से रिश्तों में आ गई थी तल्खीः फेसबुक पोस्ट में सुशील कुमार ने अपनी आपबीती बयां करते हुए लिखा है कि दान करने की वजह से पत्नी संग रिश्ते भी खराब हो गए थे। और कई बातों को लेकर झगड़े भी होते थे। बकौल सुशील कुमार, वो अक्सर कहा करती थी कि आपको सही गलत लोगों की पहचान नही है और भविष्य की कोई चिंता नहीं है। ये सब बातें सुनकर हमको लगता था कि वह नहीं समझ पा रही है। इस बात पर खूब झड़गा भी होता था ।

सुशील कुमार के मुताबिक केबीसी जितने के बाद उनकी जिंदगी में बहुत कुछ खराब हो रहा था तो कुछ अच्छी चीजें भी हो रही थीं। उन्होंने आगे लिखा है कि दिल्ली में मैंने कुछ कार लेकर अपने एक मित्र के साथ चलवाने लगा था जिसके कारण मुझे लगभग हर महीने कुछ दिनों दिल्ली आना पड़ता था। और दिल्ली में ही उनका परिचय कुछ जामिया मिलिया में मीडिया की पढ़ाई कर रहे छात्रों से हुआ। आईआईएमसी और जेएनयू में रिसर्च कर रहे लड़के और कुछ थियेटर आर्टिस्ट से भीपरिचय हुआ। सुशील कुमार लिखते हैं कि जब ये लोग किसी विषय पर बात करते थे तो लगता था कि अरे! मैं तो कुएँ का मेढ़क हूँ। मैं तो बहुत चीजों के बारे में कुछ नही जानता। हालांकि यहीं से उनकी बुरी आदतों की शुरुआत भी हो गई।

ऐसे लगी शराब सिगरेट की लतः सुशील कुमार ने लिखा है कि जब इन छात्रों के साथ बैठकी होती थी तो दारू और सिगरेट के बिना नहीं होती। उन्होंने आगे लिखा कि एक समय ऐसा आया कि अगर सात दिन रुक गया तो सातों दिन इस तरह के सात ग्रुप के साथ अलग अलग बैठकी हो जाती थी। इन लोगों की संगति का ये असर हुआ कि मीडिया को लेकर जो मैं बहुत ज्यादा सीरियस रहा करता था वो गंभीरता धीरे धीरे कम हो गई ।

बता दें साल 2017 में सुशील कुमार ने सबसे तंग आकर टीचर बनने की ठानी और इसी साल टीईटी यानि शिक्षक पात्रता परीक्षा में सफलता हासिल की। टीईटी रिजल्ट में सुशील कुमार को 140 में से 100 अंक प्राप्त हुए हैं। फिलहाल वे एक सरकारी टीचर हैं। इसके साथ ही उन्होंने कोटवा प्रखंड की मच्छरगावां महादलित बस्ती के 100 बच्चों को गोद लिया है। उनकी शिक्षा का खर्च उठा रहे हैं। सुशील ने बताया कि अब वह टीचर हैं और साल 2016 से शराब नहीं पी है। सिगरेट की लत भी छूट गई है।

 

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