रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है और दर्शकों के साथ-साथ कई सेलिब्रिटीज से तारीफ भी बटोर रही है। हालांकि, फिल्म को लेकर कुछ लोग लगातार आलोचना भी कर रहा है और इसे प्रोपेगेंडा करार दे रहा है।

कन्नड़ अभिनेत्री और पूर्व राजनेता राम्या ने भी फिल्म की आलोचना की है। उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर फिल्म की तीखी आलोचना करते हुए इसे कम्प्लीट प्रोपेगेंडा बताया और निर्देशक आदित्य धर को ‘जिंगोइज्म’ (अंधराष्ट्रवाद) से आगे बढ़ने की सलाह दी।

राम्या ने लिखा, “अभी-अभी धुरंधर 2 देखी और यह इस बात का मास्टरक्लास है कि एक अच्छी संभावना को कैसे एक थकाऊ अनुभव में बदला जा सकता है। यह ऐसी किताब पढ़ने जैसा है जो बेहद बोरिंग हो और खत्म ही न हो। अगर आप इसे देखना चाहते हैं तो थिएटर में समय और पैसे बर्बाद मत कीजिए। यह ऐसी कंटेंट है जिसे सिर्फ ओटीटी पर ही देखा जाना चाहिए, जहां आप कभी भी बाहर निकल सकते हैं।”

फिल्म के तकनीकी पहलुओं पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “डायरेक्शन, डायलॉग, एडिटिंग, बैकग्राउंड स्कोर और एक्टिंग—सब कुछ औसत से भी नीचे है। ऐसा लगता है जैसे किसी को रिलीज डेट की परवाह ही नहीं थी।”

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रणवीर सिंह की तारीफ पर सवाल उठाते हुए राम्या ने लिखा, “लोग कह रहे हैं कि रणवीर फिल्म को संभाल रहे हैं, लेकिन वह क्या संभाल रहे हैं? मुझे तो बस उनके बाल ही नजर आए, जो हर सीन में रुकावट बन रहे थे।”

फिल्म की हिंसा पर भी उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, “यह फिल्म नहीं, बल्कि हिंसा का एक विजुअल हैंडबुक लगती है, जिसमें हर चीज को हथियार बना दिया गया है- सीरिंज से लेकर स्पैनर, चाकू, बंदूक, बम तक सब कुछ।” निर्देशक पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि निर्देशक हर सीन को पिछले से ज्यादा हिंसक बनाने की कोशिश में लगे हैं, जिससे फिल्म डरावनी नहीं बल्कि हास्यास्पद लगने लगती है।”

उन्होंने अंत में लिखा, “धुरंधर 2 एक बहुत बड़ी निराशा है। अगर पहला पार्ट आपको उत्साहित करता था, तो यह पार्ट आपको सोचने पर मजबूर करेगा कि आखिर इसकी जरूरत ही क्या थी। रणवीर, आप इससे बेहतर हैं। आदित्य धर—जिंगोइज़्म और प्रोपेगेंडा अब पुराने हो चुके हैं।”

इससे पहले अभिनेता प्रकाश राज ने भी फिल्म पर तंज कसते हुए लिखा, “मैं धुरंधर से बहुत दूर हूं… आप हैं?” एक अन्य पोस्ट में उन्होंने दक्षिण भारतीय सितारों- अल्लू अर्जुन, जूनियर एनटीआर, महेश बाबू और विजय देवरकोंडा—पर भी इशारों-इशारों में टिप्पणी की और कहा कि “दक्षिण में भी मजबूरी के संकेत दिख रहे हैं।”

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राजनीति में भी घमासान, बैन की मांग

फिल्म को लेकर विवाद सिर्फ फिल्मी जगत तक सीमित नहीं है। कई नेताओं और संगठनों ने भी इसे “प्रोपेगेंडा” बताते हुए विरोध किया है। एआईएमआईएम के प्रवक्ता वारिस पठान ने फिल्म पर बैन की मांग करते हुए कहा, “कुछ लोग पैसे कमाने के लिए नफरत और झूठ फैलाते हैं। उन्हें कुछ और बनाना नहीं आता। नोटबंदी जैसे असली मुद्दों को गलत तरीके से दिखाया जा रहा है। फिल्में मनोरंजन और सच्चाई दिखाने के लिए बननी चाहिए, न कि समाज में नफरत फैलाने के लिए। सरकार को ऐसी फिल्मों पर रोक लगानी चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा, “अगर आपने पाकिस्तान के खिलाफ फिल्म बनाई है तो उसे वहां दिखाइए, यहां क्यों माहौल खराब कर रहे हैं?”