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बेटे ने रोते-रोते बताया कैसे गुजरे कादर खान के आखिरी पल, ‘मुझे चूमना चाहते थे पर चूम न सके’

कादर खान 300 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय और 250 फिल्मों के लिए लेखन करने से पहले सिविल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर भी रहे थे।

कादर खान। (Photo: PTI)

पटकथा लेखन के जरिए कई यादगार फिल्में देने वाले और अपनी अदाकारी से प्रशंसकों को दीवाना बनाने वाले कादर खान का कनाडा के टोरंटो में 31 दिसम्बर को निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। वह 81 साल के थे। 1980 और 1990 के दशक में कई चर्चित फिल्मों का हिस्सा रहे खान कनाडा के एक अस्पताल में भर्ती थे। उनके परिवार में उनके दो बेटे सरफराज और शाहनवाज हैं। कादर खान के बेटे सरफराज ने पीटीआई को बताया, ‘‘मेरे पिता हमें छोड़कर चले गए। लंबी बीमारी के बाद 31 दिसम्बर की शाम छह बजे (कनाडाई समय) उनका निधन हो गया। वह दोपहर को कोमा में चले गए थे। पिछले 16-17 हफ्ते से वह अस्पताल में भर्ती थे।’’

इसके साथ ही सरफराज ने रोते हुए कादर खान के आखिरी पलों के बारे में बताया। सरफराज ने कहा, “हमारे वालिद ने दौलत के रूप में मान-सम्मान कमाया। मेरे लिए यही है कि जो उनकी इज्जत और मोहब्बत है, यदि हम उसे बढ़ा न सकें तो गिरा भी न दें। उसे बनाए रखें। मेरे वालिद साहब एक अमीर और पैसे वाले आदमी थे। मगर असलियत में लोग जानते थे कि वे फकीर की तरह थे। उनको दुनिया की ज्यादा चीजों का कोई शौक नहीं था। आज 100 रुपये रोज में लोग जी नहीं सकते लेकिन वे इतने पैसों में तीन वक्त तक खाना खा सकते थे। वे ऐसे आदमी थे।”

सरफराज ने आगे कहा, “वे मेरे पिता व उस्ताद सबकुछ थे। कोई मिले, किसी को कुछ तकलीफ हो, हर किसी की मदद करते थे। सब को लेकर चलते थे। जिंदगी में ब्रिज बनने की बात करते थे। हमेशा जोड़ने की बात करते थे। वे बोलते थे कि मुझे किसी का बोझ नहीं बनना है। बीमारी के समय में उनके हाथ सिर्फ हिलते थे। अंतिम समय में वे मुझे चूमना चाहते थे, लेकिन चूम न सकें।”

कादर खान 300 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय और 250 फिल्मों के लिए लेखन करने से पहले सिविल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर भी रहे थे। सरफराज ने कहा, ‘‘हमारा सारा परिवार यहीं है और हम यहीं रहते हैं, इसलिए हम ऐसा कर रहे हैं। हम दुआओं और प्रार्थना के लिए सभी का शुक्रिया अदा करते हैं।’’खबरों के मुताबिक खान को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी और डॉक्टर उन्हें नियमित वेंटीलेटर तथा बीपीएपी वेंटीलेटर पर रखे हुए थे। सुपर न्यूक्लियर पाल्सी बीमारी के कारण उन्हें चलने में भी दिक्कत आ रही थी और याददाश्त भी कमजोर हो गई थी। (भाषा इनपुट के साथ)

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