ज्योति कलश छलके

पंडित नरेंद्र शर्मा छायावादोत्तर दौर के ऐसे गीतकार हैं, जिनके गीतों में रागात्मक संवेदना तो है ही, वह पुट भी है जिससे बगैर साहित्यिक स्फीति के लोकप्रियता अर्जित की जा सके।

पंडित नरेंद्र शर्मा छायावादोत्तर दौर के ऐसे गीतकार हैं, जिनके गीतों में रागात्मक संवेदना तो है ही, वह पुट भी है जिससे बगैर साहित्यिक स्फीति के लोकप्रियता अर्जित की जा सके। उनकी यह खासियत इसलिए भी बड़ी है क्योंकि वे संस्कृतनिष्ठ शब्दों का प्रयोग करते थे। यहां तक कि भाव निरूपण में भी उन्होंने भाषाई और साहित्यिक गरिमा हमेशा बनाई रखी। उनकी यह विलक्षणता उन लोगों के लिए एक सबक की तरह है जो संस्कृति और स्फीति का धरातल एक करते हुए कामयाबी का कुबेरी मंत्र पढ़ते हैं।

नरेंद्र शर्मा के गीतों का संसार सरल पर हृदय को गहराई तक स्पर्श करने वाला है। प्राकृतिक सुषमा, मानवीय सौंदर्य और उससे उत्पन्न विरह व मिलन जैसी अनुभूतियां उनकी रचनाओं के मुख्य विषय हैं। फिल्मों के लिए गीत लिखने के बावजूद उनकी रचनाओं की साहित्यिक गरिमा कायम रही। ‘भाभी की चूड़ियां’ फिल्म का गीत ‘ज्योति कलश छलके’, ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ के सभी गीत और शहीदों के लिए लिखा गया उनका ‘समर में हो गए अमर’ गीत आज भी उतने ही लोकप्रिय है। ‘शंखनाद ने कर दिया, समारोह का अंत, अंत यही ले जाएगा कुरुक्षेत्र पर्र्यंत’, यह दोहा उनकी अंतिम रचना है, जिसे उन्होंने धारावाहिक ‘महाभारत’ के लिए लिखा था। जब बीआर चोपड़ा ‘महाभारत’ बना रहे थे तो नरेंद्र शर्मा उनके सलाहकार थे।

पढें मनोरंजन समाचार (Entertainment News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।

Next Story
चिटफंड घोटाले में ओड़िशा के पूर्व महाधिवक्ता अशोक मोहंती गिरफ्तार
अपडेट