Judaai Revisit: छलचित्र में आज हम बात कर रहे हैं – श्रीदेवी, अनिल कपूर और उर्मिला मातोंडकर जैसे बड़े सितारों से सजी फिल्म ‘जुदाई’ की। ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही लेकिन इसका कॉन्सेप्ट ऐसा है कि आज भी सवाल खड़े होते हैं।
‘बिकाऊ नहीं हूं’ मगर 2 करोड़ में बिक गया
ये कहानी है एक ऐसे इंजीनियर की, जो नौकरी बदलना नहीं चाहता क्योंकि उसे लगता है कि जिसने पहली नौकरी दी, उसे छोड़ना धोखा है। उसके सिद्धांत बड़े ऊंचे हैं – “मैं बिकाऊ नहीं हूं।” लेकिन विडंबना ये है कि… वही आदमी 2 करोड़ रुपये में खरीद लिया जाता है।
जुदाई फिल्म की कहानी
राज वर्मा (अनिल कपूर) की शादी होती है काजल (श्रीदेवी) से। शादी के बाद जब काजल ससुराल पहुंचती है, तो गर्मी से परेशान होकर एसी चलाने को कहती है। राज कहता है- मेरा दिल ही एसी है। वो फ्रिज से ठंडा पानी मांगती है, तो जवाब मिलता है – मैं मटके का पानी पीता हूं।
यहां काजल की मांगें नाजायज़ नहीं थीं मगर फिल्म में गरीबी को रोमांस की तरह दिखाया जाता है। काजल समझौता करती है। दो बच्चे भी हो जाते हैं। जिंदगी किसी तरह चलती रहती है।
उर्मिला मातोंडकर की एंट्री
फिर एंट्री होती है जान्हवी (उर्मिला मातोंडकर) की – एक अमीर, आधुनिक, विदेश से लौटी लड़की। उसे धीरे-धीरे राज से प्यार हो जाता है। वो राज से प्रेम का इज़हार करती है, मगर राज बताता है कि वो शादीशुदा है, दो बच्चों का बाप है। जान्हवी का जवाब होता है- “दो बच्चे हैं… तो दो बीवियां भी हो जाएंगी।”
यहीं से फिल्म का असली छल शुरू होता है। फिल्म ऐसे दिखाती है जैसे दो पत्नियां रखना कोई बड़ी बात नहीं है।
राज उसे थप्पड़ मारता है। लेकिन जान्हवी सीधे उसकी पत्नी काजल के पास पहुंचती है और 2 करोड़ में पति खरीदने का प्रस्ताव रखती है।
फिल्म हमें दिखाती है कि एक औरत अपने पति को पैसों के लिए बेचने को तैयार हो जाती है।
राज मना करता है तो काजल खाना-पीना छोड़ देती है। इमोशनल ब्लैकमेल के बाद आख़िरकार राज दूसरी शादी कर लेता है। वो एक एडल्ट है मगर फिल्म दिखाती है कि वो अपनी मर्ज़ी से नहीं, पत्नी को खुश करने के लिए दूसरी शादी करता है।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। वो जान्हवी से शादी तो कर लेता है, पर उसे पत्नी का दर्जा नहीं देता। जान्हवी भी खाना छोड़ देती है। फिर उसे पत्नी की तरह स्वीकार कर लिया जाता है।
अब जान्हवी और राज को करीब देखकर धीरे-धीरे काजल के मन में जलन पनपती है। एक दिन जब जान्हवी जब राज को टीका लगा देती है, काजल उसे थप्पड़ मार देती है।
क्लाइमेक्स में दिखाते हैं कि काजल से परेशान होकर राज और जान्हवी बच्चों के साथ विदेश जाने का प्लान बनाते हैं। लेकिन एयरपोर्ट पर जान्हवी कहती है – तुम काजल के साथ रहो, मैं अकेली अमेरिका जा रही हूं।
वो अकेली विदेश जाती है। पेट में राज का बच्चा लेकर। एक सिंगल मदर बनने। और फिल्म इसे त्याग, प्रेम और बलिदान की तरह दिखाती है।
जुदाई फिल्म का छल
- पति को वस्तु की तरह खरीदना-बेचना।
- दो बीवियों रखने को को सामान्य बनाना।
- औरतों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करना।
लेकिन इस पूरी कहानी में एक और दिलचस्प बात है – राज को हर बार बेबस, मासूम और परिस्थितियों का शिकार दिखाया गया है।
जब जान्हवी दूसरी शादी की बात करती है, वो उसे थप्पड़ मार देता है, एक औरत पर हाथ उठाने वाले को अच्छे इंसान की तरह पेश किया जाता है। 2 करोड़ का सौदा होता है तो काजल से नाराज होता है।
मगर जब वो दूसरी शादी करता है, तो वजह बताई जाती है- “काजल खाना नहीं खा रही थी।”
जब जान्हवी को पत्नी का दर्जा देता है, तो वजह फिर वही होती है – “वो भी खाना नहीं खा रही थी।”
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मतलब उसकी जिंदगी के हर बड़े फैसले के पीछे स्त्री को दिखाया गया है और राज को ऐसे पेश किया गया है जैसे वो बस हालात में फंस गया था। फिल्म चतुराई से आदमी को मजबूर दिखाती है।
क्योंकि ना तो उसने पैसे मांगे, ना दो पत्नियों की मांग की ना ही उसने किसी को छोड़ा। मगर सच तो यही है ना कि आखिरी फैसला राज का ही था। वो एक एडल्ट था और दूसरी शादी और दूसरी पत्नी से बच्चा बिना उसके फैसले के नहीं हो सकता है।
फिल्म बड़ी चतुराई से हमें एक पक्ष दिखाती है और हैरानी की बात ये है कि उस वक्त फिल्म देखते वक्त किसी को अजीब भी नहीं लगा था, यही फिल्म का असली छल है।
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